2 जुलाई 2026 को अमेरिका में जून में सिर्फ 57,000 नौकरियां बढ़ीं, जो अनुमानित 110,000 115,000 से आधी है। इस खबर ने कीमती धातुओं में जबरदस्त उछाल ला दिया। इसकी पूरी श्रृंखला समझिए: कमजोर रोजगार → Fed द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावनाओं में कमी → कमजोर डॉलर और गिरती बॉन्ड यील्ड → सोने और चांदी की ऊंची कीमतें। चांदी ने...

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2 जुलाई 2026, गुरुवार। एक अमेरिकी आंकड़े ने कीमती धातुओं की दिशा बदल दी। अमेरिकी श्रम विभाग (Bureau of Labor Statistics) की रिपोर्ट के अनुसार, जून में महज 57,000 नई नौकरियां जुड़ीं । यह उम्मीदों (लगभग 110,000-115,000) से बहुत कम था। इस खबर के बाद सोना तुरंत $4,100 प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया, जबकि चांदी $61 के पार चली गई। आइए, स्रोतों के हवाले से समझते हैं कि यह सब कैसे हुआ।
मुख्य आंकड़ा साफ था। रॉयटर्स के एक सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने 110,000 नौकरियां बढ़ने का अनुमान लगाया था । डॉव जोन्स के अनुसार उम्मीद 115,000 थी
। लेकिन मई के आंकड़ों को भी संशोधित कर 172,000 से घटाकर 129,000 कर दिया गया, और अप्रैल-मई के आंकड़ों को मिलाकर कुल 74,000 नौकरियां कम कर दी गईं
।
बेरोजगारी दर 4.3% से घटकर 4.2% हो गई, लेकिन विशेषज्ञों ने कहा कि यह श्रम बल भागीदारी दर (Labor Force Participation Rate) के गिरकर 61.5% (मार्च 2021 के बाद सबसे कम) हो जाने के कारण हुआ - यानी लोग नौकरी पाने के बजाय बाजार छोड़ रहे थे ।
बाजार की प्रतिक्रिया तत्काल और मजबूत थी। सोना पिछले सत्र में पहले ही 1 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया था और गुरुवार को उसने अपनी बढ़त जारी रखी ।
शुक्रवार सुबह तक, स्पॉट गोल्ड $4,182.28 के आसपास कारोबार कर रहा था और साप्ताहिक आधार पर 2.3% की बढ़त के साथ, 5 सप्ताह में पहली साप्ताहिक बढ़त दर्ज कर रहा था ।
चांदी की प्रतिक्रिया और भी नाटकीय रही। यह चांदी पिछले हफ्तों में गंभीर दबाव में थी और अपने रिकॉर्ड शिखर $121 से 50% से अधिक गिरकर $55-$57 के स्तर पर सपोर्ट पा रही थी ।
इस पूरी रैली की सबसे बड़ी वजह फेडरल रिजर्व (Fed) की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में आया बदलाव है। जॉब्स रिपोर्ट से पहले, बाजार में साल के आखिर में दरों में बढ़ोतरी (Rate Hike) की संभावना को लेकर अटकलें तेज थीं ।
जून के कमजोर आंकड़ों ने इस नजरिए को पूरी तरह से पलट दिया:
Fed फंड फ्यूचर्स के अनुसार, गुरुवार देर रात तक बाजार में सितंबर मीटिंग तक दरों में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 50% रह गई थी, जो रिपोर्ट से पहले लगभग 80% थी ।
ब्याज दरों के पुनर्मूल्यांकन का असर डॉलर और बॉन्ड बाजार पर भी पड़ा। US डॉलर इंडेक्स उस दिन 0.7% गिर गया, जिससे डॉलर में मूल्य वाली धातुएं अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सस्ती हो गईं । इसी के साथ 10 साल की ट्रेजरी यील्ड भी गिर गई क्योंकि निवेशकों ने दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं से बाहर निकलना शुरू कर दिया
। कमजोर डॉलर और कम यील्ड का यह संयोजन सोने-चांदी के लिए सबसे अनुकूल माहौल बनाता है।
इस कीमती धातु रैली को एक और सहारा मिला। रॉयटर्स ने बताया कि कच्चे तेल की कम कीमतों ने सोने को और सपोर्ट दिया । CNBC के विश्लेषकों ने पुष्टि की कि "तेल की कम कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को कम किया है," जो Fed के और कड़े कदम उठाने के मुख्य कारणों में से एक है
। रोजगार के नरम आंकड़ों और गिरती ऊर्जा कीमतों ने मिलकर यह संकेत दिया कि मुद्रास्फीति के दबाव कम हो रहे हैं, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तात्कालिकता खत्म हो गई।
जुलाई 2 के जॉब्स रिपोर्ट से सिर्फ दो हफ्ते पहले, 17 जून के FOMC अनुमानों में केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने फेडरल फंड्स रेट को 3.50%–3.75% पर रखने का संकेत दिया था । लेकिन कमजोर पेरोल रिपोर्ट ने निकट भविष्य के लिए दरों के रास्ते को जटिल बना दिया।
रिपोर्ट से पहले, बाजार में श्रम बाजार की फिर से मजबूती को लेकर उम्मीदें बढ़ रही थीं। जून के आंकड़ों ने उस नजरिए को चुनौती दी। जैसा कि रॉयटर्स ने कहा, "पेरोल वृद्धि में मंदी उस कहानी को चुनौती देती है जो हाल के महीनों में श्रम बाजार में फिर से मजबूती की बात कर रही थी" ।
हालांकि, स्रोत यह भी साफ करते हैं कि यह घबराने की बात नहीं थी। रॉयटर्स ने रिपोर्ट को "ठंडा होती लेकिन फिर भी स्थिर" श्रम बाजार की स्थिति बताया, क्योंकि बेरोजगारी दर वास्तव में घटकर 4.2% हो गई । बाजार ने इस डेटा को अलार्म सिग्नल के रूप में नहीं, बल्कि दरों में बढ़ोतरी के लिए आधार खत्म होने के रूप में व्याख्यायित किया।
2 जुलाई, 2026 की रैली एक पाठ्यपुस्तकीय उदाहरण है कि कैसे श्रम बाजार का डेटा उम्मीदों के जरिए सीधे कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकता है। पूरी श्रृंखला साफ थी:
कमजोर पेरोल → ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों में कमी → कमजोर डॉलर और कम यील्ड → सोने और चांदी की ऊंची कीमतें
इस दिन चांदी का उछाल (3.85%) सोने (2.49%) से ज्यादा रहा । यह इसलिए हुआ क्योंकि जब डॉलर कमजोर होता है और ब्याज दरों में ढील की उम्मीदें बढ़ती हैं तो चांदी सोने से ज्यादा तेजी से हिलती है।
निवेशकों के लिए, यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि कीमती धातुएं Fed की उम्मीदों से कितनी बारीकी से जुड़ी हैं। श्रम बाजार में दरार नजर आने और सस्ते तेल से मुद्रास्फीति में कमी के संकेत मिलने पर, एक ही ट्रेडिंग सत्र में पूरा मैक्रो माहौल सोने-चांदी के पक्ष में आ गया।
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2 जुलाई 2026 को अमेरिका में जून में सिर्फ 57,000 नौकरियां बढ़ीं, जो अनुमानित 110,000 115,000 से आधी है। इस खबर ने कीमती धातुओं में जबरदस्त उछाल ला दिया।
2 जुलाई 2026 को अमेरिका में जून में सिर्फ 57,000 नौकरियां बढ़ीं, जो अनुमानित 110,000 115,000 से आधी है। इस खबर ने कीमती धातुओं में जबरदस्त उछाल ला दिया। इसकी पूरी श्रृंखला समझिए: कमजोर रोजगार → Fed द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावनाओं में कमी → कमजोर डॉलर और गिरती बॉन्ड यील्ड → सोने और चांदी की ऊंची कीमतें।
चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया। इस दिन चांदी 3.85% बढ़कर $61.45 पर पहुंची, क्योंकि ब्याज दरों में नरमी के संकेत का इस चांदी पर ज्यादा असर पड़ता है।