MIT के लॉन्ग जू समूह के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने रोम्बोहेड्रल मल्टीलेयर ग्रैफीन (एक क्रिस्टलीय, गैर मुड़ा हुआ ग्रैफीन) में कई अलग अलग सुपरकंडक्टिंग चरणों की खोज की है। पेंटालेयर ग्रैफीन में तीन अलग अलग प्रकार की फील्ड एन्हांस्ड और फील्ड इंड्यूस्ड सुपरकंडक्टिविटी पाई गई, जो 8.5 टेस्ला तक के चुंबकीय क्षेत्र में भी मज...
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शोध उत्तर

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मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं (लॉन्ग जू के नेतृत्व में) ने रोम्बोहेड्रल-स्टैक्ड मल्टीलेयर ग्रैफीन में सुपरकंडक्टिंग चरणों की एक समृद्ध श्रृंखला का पता लगाया है। ग्रैफीन कार्बन की एक अति पतली परत है, जो पेंसिल की सीसे में पाए जाने वाले ग्रेफाइट से बनती है। रोम्बोहेड्रल संरचना में ग्रैफीन की परतें एक विशिष्ट 'सीढ़ीदार' क्रम में रखी होती हैं, जो इसके इलेक्ट्रॉनिक गुणों को नाटकीय रूप से बदल देती हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रैफीन की अलग-अलग मोटाई (परतों की संख्या) में अलग-अलग प्रकार की सुपरकंडक्टिविटी उभरती है:
सामान्य (s-वेव) सुपरकंडक्टिविटी चुंबकीय क्षेत्र से नष्ट हो जाती है — चाहे वह समतल से बाहर (आर्बिटल डिपेयरिंग) हो या समतल के अंदर (पॉली पैरामैग्नेटिक डिपेयरिंग)। MIT की खोजें इस नियम को बार-बार तोड़ती हैं:
MIT टीम का प्रस्ताव है कि ये असामान्य गुण पारंपरिक स्पिन-सिंगलेट पेयरिंग के बजाय स्पिन-ट्रिपलेट पेयरिंग से उत्पन्न होते हैं । मुख्य सैद्धांतिक तत्व इस प्रकार हैं:
ये निष्कर्ष अपरंपरागत सुपरकंडक्टिविटी के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं:
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MIT के लॉन्ग जू समूह के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने रोम्बोहेड्रल मल्टीलेयर ग्रैफीन (एक क्रिस्टलीय, गैर मुड़ा हुआ ग्रैफीन) में कई अलग अलग सुपरकंडक्टिंग चरणों की खोज की है।
MIT के लॉन्ग जू समूह के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने रोम्बोहेड्रल मल्टीलेयर ग्रैफीन (एक क्रिस्टलीय, गैर मुड़ा हुआ ग्रैफीन) में कई अलग अलग सुपरकंडक्टिंग चरणों की खोज की है। पेंटालेयर ग्रैफीन में तीन अलग अलग प्रकार की फील्ड एन्हांस्ड और फील्ड इंड्यूस्ड सुपरकंडक्टिविटी पाई गई, जो 8.5 टेस्ला तक के चुंबकीय क्षेत्र में भी मजबूत बनी रहती हैं [1]।
टेट्रालेयर ग्रैफीन में दो नए सुपरकंडक्टिंग अवस्थाएं देखी गईं, जिनमें चिरलिटी और आंतरिक चुंबकत्व दोनों मौजूद हैं एक ऐसा संयोजन जो पहले कभी किसी सुपरकंडक्टर में नहीं देखा गया [8][13]।