एस्ट्रल सिस्टम्स ने मल्टी-स्टेट फ्यूज़न (MSF) तकनीक का आविष्कार और व्यावसायीकरण किया है। यह एक नवीन फ्यूज़न दृष्टिकोण है जिसमें फ्यूज़न मुख्य रूप से एक ठोस-अवस्था जाली (solid-state lattice) के अंदर होता है, जबकि प्लाज़्मा में भी होता रहता है। यह विधि NASA के लैटिस कंफ़ाइनमेंट फ्यूज़न (Lattice Confinement Fusion) शोध से ली गई है । MSF तकनीक पेटेंटेड है और एस्ट्रल ने 2024 में इसका व्यावसायीकरण किया
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कंपनी के रिएक्टर तीव्र न्यूट्रॉन बीम उत्पन्न करते हैं जिनका उपयोग कैंसर निदान और उपचार के लिए मेडिकल रेडियोआइसोटोप बनाने में किया जा सकता है। यह वैश्विक कमी को सीधे संबोधित करता है । मिली पूंजी का उपयोग रिएक्टरों की तैनाती को बढ़ाने और 2027 की शुरुआत तक मेडिकल आइसोटोप का पहला व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने के लिए किया जाएगा
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एस्ट्रल सिस्टम्स ग्लॉसेस्टरशायर स्थित पूर्व बर्कले पावर स्टेशन (जो 1989 से बंद है) में एक नई सुविधा विकसित कर रही है । कंपनी ने साइट पर अपना प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने के लिए समझौतों को अंतिम रूप दिया है। यह साइट एक व्यापक "परमाणु उत्कृष्टता केंद्र" का हिस्सा होगी
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कंपनी 2026 के अंत तक बर्कले में अपने कई अगली पीढ़ी के कॉम्पैक्ट MSF रिएक्टरों को पूरी क्षमता से चलाने की योजना बना रही है। इसका लक्ष्य दुनिया का सबसे उच्च-फ्लक्स, उच्चतम-तीव्रता वाला, निरंतर संचालित प्राइवेट फ्यूज़न वॉल्यूमेट्रिक न्यूट्रॉन स्रोत स्थापित करना है । वर्तमान में उपलब्ध उत्पादों में Mk0 MSF रिएक्टर (DD: 1×10⁸ n/s; DT: 1×10¹⁰ n/s) और Mk1 शामिल हैं, जो बाजार के मौजूदा विकल्पों की तुलना में 10 गुना अधिक न्यूट्रॉन आउटपुट और 10 गुना अधिक लाइफटाइम प्रदान करता है
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एस्ट्रल सिस्टम्स फ्यूज़न स्टार्टअप्स में असामान्य है क्योंकि यह पहले से ही राजस्व अर्जित कर रही है। इसने वाणिज्यिक और अनुसंधान अनुबंधों से ₹34 करोड़ (£3 मिलियन) से अधिक कमाए हैं । कंपनी वर्तमान में तीन वाणिज्यिक फ्यूज़न सुविधाएं संचालित करती है जिनमें कई रिएक्टर टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल 9 (TRL9) पर हैं - जो वास्तविक दुनिया में तैनाती का उच्चतम स्तर है
। इसका राजस्व मॉडल न्यूट्रॉन-स्रोत अनुसंधान अनुबंधों को भविष्य की B2B मेडिकल आइसोटोप आपूर्ति के साथ जोड़ता है
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एस्ट्रल सिस्टम्स ने अपने स्वयं के फ्यूज़न रिएक्टर का उपयोग करके ट्रिटियम का सफलतापूर्वक उत्पादन करने वाली पहली वाणिज्यिक फ्यूज़न कंपनी बनकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के सहयोग से और यूके एटॉमिक एनर्जी अथॉरिटी (UKAEA) के समर्थन से संभव हुआ । कंपनी ने UKAEA के साथ £200,000 का एक शोध अनुबंध भी पूरा किया है
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उन्नत विखंडन के मोर्चे पर, एस्ट्रल मैकमास्टर यूनिवर्सिटी (कनाडा) जैसे भागीदारों के साथ काम कर रही है, जिसने फ्यूज़न-आधारित कॉपर-67 उत्पादन परियोजना को वित्त पोषित किया है। साथ ही, कंपनी अपनी 14 MeV न्यूट्रॉन विकिरण क्षमताओं का उपयोग करके उन्नत विखंडन ईंधन चक्र विकास, सामग्री परीक्षण और सबसिस्टम योग्यता के लिए अनुसंधान अनुबंध भी कर रही है ।
उपलब्ध स्रोतों में हाल ही में हुई विशिष्ट तकनीकी नेतृत्व नियुक्तियों के नाम नहीं मिले हैं। कंपनी के सह-संस्थापकों में टैल्मन फायरस्टोन और डॉ. टॉम वालेस-स्मिथ (ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के रिसर्च एसोसिएट) शामिल हैं । मौजूदा स्रोत सेट में कोई अतिरिक्त CTO या वरिष्ठ नियुक्ति की घोषणा नहीं मिली - यह एक साक्ष्य अंतराल है।