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अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का 11वां वार्षिक वैश्विक ऊर्जा दक्षता सम्मेलन 29-30 जून 2026 को कनाडा के मॉन्ट्रियल में आयोजित हुआ। यह सम्मेलन वैश्विक ऊर्जा नीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। IEA के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल, कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन और पर्यावरण मंत्री जूली डाब्रुसिन की सह-मेजबानी में हुए इस सम्मेलन में लगभग 100 देशों के 600 मंत्रियों, सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया । इसका मुख्य परिणाम ऊर्जा दक्षता को दोगुना करने की प्रतिबद्धता का नवीनीकरण था, लेकिन इस आयोजन पर होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और आगामी COP31 शिखर सम्मेलन के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की भी गहरी छाप रही।
मॉन्ट्रियल सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि एक मंत्रिस्तरीय वक्तव्य था जिसमें 45 सरकारों ने 2030 तक ऊर्जा दक्षता सुधारों की औसत वैश्विक दर को दोगुना करने के लक्ष्य का समर्थन किया । यह लक्ष्य पहली बार COP28 में UAE सहमति के हिस्से के रूप में तय किया गया था और इस सम्मेलन में इसे सतत आर्थिक विकास और नेट-जीरो उत्सर्जन की ओर एक सुरक्षित और किफायती मार्ग की आधारशिला के रूप में फिर से पुष्टि की गई
। संयुक्त वक्तव्य में ऊर्जा दक्षता की भूमिका पर प्रकाश डाला गया, जो जीवन स्तर को बेहतर बनाने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करने में मददगार है
।
सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण समानांतर विकास COP31 अध्यक्ष-नामित मूरत कुरुम द्वारा COP31 अध्यक्षता के कार्य एजेंडा का औपचारिक शुभारंभ था । तुर्की द्वारा नवंबर 2026 में अंताल्या में आयोजित होने वाले COP31 शिखर सम्मेलन ने तीन प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए
:
बिरोल ने उम्मीद जताई कि अंताल्या में COP पक्ष विद्युतीकरण लक्ष्य का समर्थन करेंगे, और इसे ऊर्जा सुरक्षा और उत्सर्जन में कमी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया ।
मॉन्ट्रियल सम्मेलन दशकों में सबसे गंभीर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवधान के बीच हुआ। 28 फरवरी 2026 को, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ हवाई युद्ध शुरू किया, जिसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से शिपिंग यातायात को प्रभावी ढंग से अवरुद्ध कर दिया - जो दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदु है । इसका प्रभाव तत्काल और गंभीर था:
बिरोल ने स्पष्ट रूप से इस संकट को कनाडा की क्षमता से जोड़ा, यह देखते हुए कि खाड़ी तेल आपूर्ति में व्यवधान कनाडाई ऊर्जा निर्यात के लिए एक रणनीतिक अवसर पैदा करता है । सम्मेलन में ऊर्जा दक्षता पर जोर को भी इस संकट के कारण उत्पन्न ऊर्जा सुरक्षा और सामर्थ्य दबावों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा गया
।
मॉन्ट्रियल सम्मेलन ने मजबूत किया कि ऊर्जा दक्षता जलवायु लक्ष्यों और तत्काल ऊर्जा सुरक्षा चुनौतियों दोनों को संबोधित करने के लिए एक केंद्रीय उपकरण है। जैसे-जैसे दुनिया होर्मुज संकट के परिणामों से जूझ रही है, मॉन्ट्रियल में की गई प्रतिबद्धताओं और COP31 अध्यक्षता द्वारा निर्धारित लक्ष्यों का परीक्षण तेज, ठोस कार्रवाई की आवश्यकता से होगा। नवंबर में अंताल्या में होने वाला COP31 शिखर सम्मेलन इन वादों को बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में बदलने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।
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IEA के 11वें वार्षिक ऊर्जा दक्षता सम्मेलन (मॉन्ट्रियल, 29 30 जून 2026) में 45 सरकारों ने 2030 तक ऊर्जा दक्षता सुधारों की औसत वार्षिक दर को दोगुना करने के लक्ष्य का समर्थन किया, जो COP28 में हुए UAE सहमति का हिस्सा था...
IEA के 11वें वार्षिक ऊर्जा दक्षता सम्मेलन (मॉन्ट्रियल, 29 30 जून 2026) में 45 सरकारों ने 2030 तक ऊर्जा दक्षता सुधारों की औसत वार्षिक दर को दोगुना करने के लक्ष्य का समर्थन किया, जो COP28 में हुए UAE सहमति का हिस्सा था... COP31 अध्यक्ष नामित मूरत कुरुम ने तीन प्रमुख लक्ष्य पेश किए: 2035 तक वैश्विक ऊर्जा मांग में बिजली की हिस्सेदारी 35% तक पहुंचाना, भवन क्षेत्र में ऊर्जा खपत तीव्रता में 25% की कमी, और वैश्विक अपशिष्ट वृद्धि को 2035 तक आ...
IEA के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल ने कनाडा को होर्मुज संकट के मद्देनजर 'सदी में एक बार आने वाला' ऊर्जा महाशक्ति बनने का अवसर बताया, जबकि खाड़ी तेल आपूर्ति ठप है [1][11]