2. व्यापक रूप से अपनाए जाने पर मैक्रोइकोनॉमिक और वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम: BIS ने चेतावनी दी है कि स्टेबलकॉइन के व्यापक उपयोग से बैंकों में जमा राशि कम हो सकती है और ऋण देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिसका वित्तीय स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है । पारंपरिक वित्तीय प्रणाली के साथ स्टेबलकॉइन के बढ़ते संबंधों के कारण बाजारों में तनाव फैल सकता है और नीति निर्माताओं के लिए नई चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं
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3. उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (EMDEs) के लिए 'स्टेबलकॉइन डॉलरीकरण' का खतरा: यह BIS की सबसे महत्वपूर्ण चेतावनियों में से एक है। खासकर डॉलर से जुड़े स्टेबलकॉइन का बढ़ता उपयोग कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों में मौद्रिक संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है । अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी इसी तरह की चिंता जताई है कि स्टेबलकॉइन की मांग उन देशों में अधिक होती है जहाँ बुनियादी ढाँचा कमजोर है और मुद्रा के अवमूल्यन का डर है, जिससे डॉलर को अपनाने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है
। लगभग 98% स्टेबलकॉइन डॉलर में ही जारी होते हैं
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4. वित्तीय प्रणाली से बढ़ते जुड़ाव से पैदा हुई नीतिगत चुनौतियाँ: स्टेबलकॉइन जैसे-जैसे पारंपरिक वित्तीय बाजारों से जुड़ रहे हैं, वैसे-वैसे वित्तीय अखंडता (जैसे मनी लॉन्ड्रिंग रोकना), उपभोक्ता संरक्षण और वित्तीय स्थिरता से जुड़ी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं ।
अल्पावधि: मौजूदा स्टेबलकॉइन को विनियमित और सुधारें। BIS ने तुरंत वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की मांग की है, जिसमें स्टेबलकॉइन को नियमों के दायरे में लाने पर जोर दिया गया है ताकि बाजार में विखंडन को रोका जा सके और वित्तीय अखंडता को बनाए रखा जा सके । 'समान जोखिम, समान नियम' के सिद्धांत को स्टेबलकॉइन पर लागू करने में सीमाएँ हैं, इसलिए इसके लिए विशेष नियामक दृष्टिकोण की आवश्यकता है
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दीर्घावधि: 'यूनिफाइड लेजर' के माध्यम से दो-स्तरीय बैंकिंग सिस्टम में टोकनाइजेशन को शामिल करें। BIS का मानना है कि सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर नई समानांतर प्रणाली बनाने के बजाय, टोकनाइजेशन को विकसित किया जाना चाहिए ताकि केंद्रीय बैंक का पैसा मौद्रिक प्रणाली की आधारशिला बना रहे ।
सामान्य सिद्धांत: BIS का कहना है कि तकनीक को पैसे की सार्वजनिक सेवा वाली भूमिका को कमजोर नहीं करना चाहिए, बल्कि उसकी सेवा करनी चाहिए । BIS किसी भी नवाचार को सिरे से खारिज नहीं करता, बल्कि उसे मौजूदा भरोसेमंद व्यवस्था में ढालने का रास्ता सुझाता है।