यह UNDP (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) की 2026 की रिपोर्टों पर आधारित एक तथ्य-जांच सारांश है, जो मध्य पूर्व में सैन्य तनाव के आर्थिक प्रभावों पर केंद्रित है।
1. UNDP का 2026 में वैश्विक जीवाश्म ईंधन सब्सिडी के बारे में अनुमान
UNDP ने अपनी मध्य पूर्व तनाव रिपोर्टों में 2026 के लिए वैश्विक जीवाश्म ईंधन सब्सिडी का कोई अलग से अनुमान जारी नहीं किया है। हालांकि, रिपोर्टें सब्सिडी के मुद्दे से दो तरह से गहराई से जुड़ी हुई हैं:
- बढ़ती ऊर्जा लागत एक भारी राजकोषीय बोझ पैदा कर रही है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को संघर्ष के कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतों से घरों को बचाने के लिए सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं
। UNDP की नवीनतम रिपोर्ट, Military Escalation in the Middle East: Cushioning the Global Shock (जून 2026), इन आपातकालीन ऊर्जा लागत हस्तक्षेपों को राजकोषीय भीड़-भाड़ (fiscal crowding-out) के संकट के रूप में स्पष्ट रूप से चित्रित करती है
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- सब्सिडी सुधार पर UNDP की पूर्व-स्थिति प्रासंगिक बनी हुई है। UNDP लंबे समय से यह दस्तावेजित करता आया है कि सरकारें दुनिया भर में जीवाश्म ईंधन की खपत पर औसतन 423 अरब डॉलर प्रति वर्ष खर्च करती हैं, और उनका तर्क है कि उन्हें चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने से हरित निवेश और सामाजिक संरक्षण के लिए राजकोषीय स्थान खाली हो जाएगा
। मौजूदा संकट इस तर्क को और मजबूत करता है।
वैश्विक सब्सिडी के व्यापक आंकड़ों के लिए, IMF (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) के 2025 के अपडेट ने अनुमान लगाया था कि 2024 में स्पष्ट (राजकोषीय) जीवाश्म ईंधन सब्सिडी 725 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.6%) थी, जबकि अंतर्निहित सब्सिडी (अमूल्य बाह्य प्रभाव) कहीं अधिक थी
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