संरक्षण संगठनों के एक गठबंधन ने रविवार, 29 जून 2026 को एक रिपोर्ट जारी कर मेटा पर फेसबुक के जरिए दुनिया के 'सबसे बड़े अवैध वन्यजीव बाजार' को होस्ट करने का आरोप लगाया। इसमें बंदर, गैंडे के सींग और मरे हुए पैंगोलिन जैसे... ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम (GI TOC) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 202...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for What did a coalition of conservation organizations allege in a report released on Sunday about Me. Article summary: On **Sunday, June 29, 2026**, a coalition of conservation NGOs released a report accusing Meta of hosting the world's "largest single known illegal wildlife trade market" on its Facebook platform, with endangered animals. Topic tags: general, general web, user generated, news, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
रविवार, 29 जून 2026 को संरक्षण संगठनों के एक गठबंधन द्वारा जारी एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मेटा अपने फेसबुक प्लेटफॉर्म पर दुनिया का 'सबसे बड़ा ज्ञात अवैध वन्यजीव व्यापार बाजार' चला रहा है। इसमें बंदर, गैंडे के सींग और मरे हुए पैंगोलिन जैसे लुप्तप्राय जानवरों और उनके अंगों को खुलेआम बिक्री के लिए विज्ञापित किया जा रहा है । यह रिपोर्ट ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम (GI-TOC) और अन्य शोध संगठनों के आंकड़ों पर आधारित है।
10 देशों में अप्रैल 2024 से मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार:
शोधकर्ताओं ने फेसबुक की कई डिजाइन विशेषताओं की पहचान की जो सक्रिय रूप से अवैध वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा देती हैं:
रिपोर्ट के लेखकों ने निष्कर्ष निकाला कि फेसबुक की संरचना इसे "कई प्लेटफार्मों में से एक नहीं, बल्कि वह केंद्रीय सार्वजनिक बुनियादी ढांचा बनाती है जिसके माध्यम से ऑनलाइन वन्यजीव तस्करी केंद्रित हो रही है" ।
शोधकर्ताओं ने 'डबल-डिपिंग' के सबूत पाए — मेटा एक ही अवैध गतिविधि से दो बार मुनाफा कमा रहा है:
मेटा ने कहा कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर लुप्तप्राय जानवरों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है और गूगल, अमेज़न, टिकटॉक, ईबे, एट्सी और अन्य के साथ कोलिशन टू एंड वाइल्डलाइफ ट्रैफिकिंग ऑनलाइन का सदस्य है । कंपनी ने यह भी कहा कि वह अवैध वन्यजीव लिस्टिंग का पता लगाने और हटाने के लिए AI-आधारित टूल्स का उपयोग कर रही है, और उसने 2018 से 2021 के बीच लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए 11.6 मिलियन से अधिक लिस्टिंग को हटाया या ब्लॉक किया
। 2026 में एक अलग कार्रवाई में, मेटा ने एक संयुक्त मोंगाबे और बेलिंगकैट जांच के बाद इंडोनेशिया में नौ फेसबुक ग्रुप्स को बंद कर दिया
। हालांकि, एनजीओ की रिपोर्ट का तर्क है कि समस्या के पैमाने को देखते हुए ये कार्रवाइयां अपर्याप्त हैं।
एनजीओ ने निष्कर्ष निकाला कि स्व-नियमन विफल रहा है। 2018 से कोलिशन टू एंड वाइल्डलाइफ ट्रैफिकिंग ऑनलाइन में शामिल होने के बावजूद, मेटा का प्लेटफॉर्म अवैध वन्यजीव बिक्री का प्रमुख केंद्र बन गया है, और इसकी निष्कासन दर में गिरावट आई है । शोधकर्ताओं ने कहा कि 11 टेक दिग्गजों (मेटा सहित) द्वारा अवैध वन्यजीव लिस्टिंग के खिलाफ AI का उपयोग करने की जून 2026 की हालिया प्रतिज्ञा एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अकेले अपर्याप्त है
। उन्होंने तर्क दिया कि अनिवार्य प्रवर्तन, स्वतंत्र ऑडिटिंग और तस्करी से लाभ कमाने वाले प्लेटफार्मों के लिए वित्तीय दंड के बिना, ऐसी प्रतिज्ञाएं 'ग्रीनवॉशिंग' के समान हैं
। रिपोर्ट ने विशेष रूप से स्वैच्छिक उद्योग प्रतिबद्धताओं पर निर्भर रहने के बजाय सरकारी नियमन का आह्वान किया।
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संरक्षण संगठनों के एक गठबंधन ने रविवार, 29 जून 2026 को एक रिपोर्ट जारी कर मेटा पर फेसबुक के जरिए दुनिया के 'सबसे बड़े अवैध वन्यजीव बाजार' को होस्ट करने का आरोप लगाया। इसमें बंदर, गैंडे के सींग और मरे हुए पैंगोलिन जैसे...
संरक्षण संगठनों के एक गठबंधन ने रविवार, 29 जून 2026 को एक रिपोर्ट जारी कर मेटा पर फेसबुक के जरिए दुनिया के 'सबसे बड़े अवैध वन्यजीव बाजार' को होस्ट करने का आरोप लगाया। इसमें बंदर, गैंडे के सींग और मरे हुए पैंगोलिन जैसे... ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम (GI TOC) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2024 से मार्च 2026 तक 10 देशों में 61 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 21,904 अवैध वन्यजीव विज्ञापन पाए गए, जिनमें से 16,290 (74.37%) अक...
कुल 266,535 वन्यजीव उत्पादों की पेशकश की गई, जिनमें से 84% CITES (लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन) के तहत प्रतिबंधित या विनियमित थे [5][6][9]।