एशियाई इक्विटी बाजारों ने सोमवार, 25 जून को मिलाजुला प्रदर्शन किया। इसकी तीन मुख्य वजहें थीं- AI शेयरों में तकनीकी गिरावट, अमेरिका-ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम को चुनौती देती बढ़ती दुश्मनी, और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावना, जिसने डॉलर को मजबूत किया।
स्रोतों से प्राप्त मुख्य तथ्य:
- टोक्यो का निक्केई 225 ~1% गिरा: सोमवार को यह सूचकांक 68,704.70 पर बंद हुआ, जो शुक्रवार के 4.2% के गिरावट के बाद लगातार दूसरे दिन गिरावट है। सबसे ज्यादा बिकवाली AI से जुड़े शेयरों में हुई, जिसमें सॉफ्टबैंक ग्रुप का नेतृत्व रहा। निवेशक AI रैली में हुए मुनाफे को भुनाने में जुटे थे।
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- सियोल का कोस्पी 7.7% धड़ाम: दक्षिण कोरिया का बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ क्योंकि उसका झुकाव सेमीकंडक्टर और AI शेयरों (सैमसंग, SK हैनिक्स) पर सबसे ज्यादा है। 26 जून को भी कोस्पी में 8.2% की गिरावट आई, जिसके बाद 20 मिनट के लिए प्रोग्राम ट्रेडिंग रोकनी पड़ी।
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- हांगकांग का हैंग सेंग 2.1% चढ़ा, शंघाई भी हरा: जापान और कोरिया के विपरीत, हांगकांग और मुख्यभूमि चीन के बाजारों में तेजी रही। निवेशकों को चीनी सरकार से नए प्रोत्साहन की उम्मीद थी और उन्होंने महंगे टेक शेयरों से पैसा निकालकर साइक्लिकल शेयरों में लगाया। साथ ही, इन बाजारों में AI सेक्टर का भार अपेक्षाकृत कम है।
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- अमेरिका-ईरान युद्धविराम खतरे में: 17 जून को हुए नाजुक समझौते (MoU) का बार-बार उल्लंघन हुआ। ईरानी ड्रोन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया (कुछ रिपोर्टों के अनुसार पनामा-फ्लैग जहाज, अन्य के अनुसार सिंगापुर-फ्लैग MV एवर लवली)। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने 27-28 जून को बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।