ब्लैकलिस्टेड (पूर्ण निर्यात प्रतिबंध):
निगरानी सूची (उन्नत जांच):
फरवरी 2026 के दौर में जिन 20 संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया गया था, उनमें मित्सुबिशी शिपबिल्डिंग, मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज शिपबिल्डिंग, आईएचआई कॉरपोरेशन की कंपनियां, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) शामिल थीं ।
यह पूरा संकट नवंबर 2025 में तब शुरू हुआ जब जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संसद में कहा था कि चीन द्वारा ताइवान पर हमला जापान के लिए 'अस्तित्वगत संकट' हो सकता है, जिसके तहत जापान सामूहिक आत्मरक्षा के उपाय कर सकता है ।
चीन ने इसके बाद से कदम दर कदम आर्थिक दबाव बढ़ाया:
| तारीख | कार्रवाई |
|---|---|
| 6 जनवरी 2026 | चीन ने सैन्य उद्देश्यों के लिए जापान को सभी दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया |
| 24 फरवरी 2026 | चीन ने 20 जापानी संस्थाओं (मित्सुबिशी शिपबिल्डिंग, JAXA, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) को ब्लैकलिस्ट और 20 को वॉचलिस्ट में डाला |
| 29 जून 2026 | चीन ने 20 और को ब्लैकलिस्ट और 20 को वॉचलिस्ट में डाला, जापान के 'पुनः सैन्यीकरण' और 'परमाणु हथियार हासिल करने के प्रयासों' का हवाला दिया |
चीन का पक्ष: MOFCOM का कहना है कि ये उपाय 'राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा और अप्रसार जैसे अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के लिए आवश्यक' हैं । बीजिंग का तर्क है कि ये उपाय लक्षित हैं और केवल 'जापान की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने' में शामिल इकाइयों पर लागू होते हैं, इसलिए सामान्य व्यापार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा ।
जापान का पक्ष: टोक्यो ने इसका कड़ा विरोध किया है। जापान का कहना है कि ये प्रतिबंध अत्यधिक हैं और ताकाइची के ताइवान बयानों के लिए राजनीतिक प्रतिशोध हैं । जापान ने कहा है कि वह उचित जवाबी कार्रवाई पर विचार करेगा और कूटनीतिक माध्यमों से यह मामला उठाया है ।
29 जून 2026 की यह कार्रवाई निर्यात प्रतिबंधों की दूसरी बड़ी लहर है। 60 जापानी संस्थाओं पर प्रतिबंध के साथ यह विवाद कम होने के बजाय बढ़ता दिख रहा है। दोनों पक्षों की स्थिति बिल्कुल अलग है - चीन इसे सुरक्षा उपाय बता रहा है, जबकि जापान इसे आर्थिक दबाव की राजनीति मान रहा है।