जून 2026 के मध्य में एक अंतरिम शांति समझौता हुआ, जिसमें 60-दिवसीय संघर्ष विराम ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) शामिल था स। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और क्षेत्र में शत्रुता समाप्त करने पर सहमति बनी । इस खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतें गिरीं और फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंकाएं कम हुईं, जिससे सोने की कीमतों में 2-3% से अधिक की तेजी आई
। हालांकि, यह संघर्ष विराम बहुत नाजुक साबित हुआ। 20 जून तक फिर से शत्रुता शुरू हो गई, तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और सोने की सारी बढ़त खत्म हो गई
। 29 जून को अमेरिका और ईरान के बीच फारस की खाड़ी में नए हमलों के बाद सोना फिर से $4,000 के करीब आ गया
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फेडरल रिजर्व की पसंदीदा महंगाई दर, PCE प्राइस इंडेक्स, मई 2026 में सालाना आधार पर बढ़कर 4.1% हो गई, जो अप्रैल 2023 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है । इसी तरह, कोर PCE (जिसमें खाद्य और ऊर्जा को शामिल नहीं किया जाता) बढ़कर 3.4% हो गया, जो अक्टूबर 2023 के बाद का सबसे ऊंचा आंकड़ा है
। इस आंकड़े के सामने आने के बाद बाजारों ने फेड द्वारा इस साल कम से कम एक बार ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को तेजी से भुनाया। स्वैप बाजारों (Swap Markets) ने सितंबर तक दर बढ़ाए जाने की 63.2% और दिसंबर तक 81.5% संभावना जताई
। महंगाई के मजबूत आंकड़ों ने सीधे तौर पर सोने को कमजोर किया, क्योंकि इससे गैर-उपज वाली संपत्ति (नॉन-यील्डिंग एसेट) को धारण करने की अवसर लागत (ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट) बढ़ गई।
पूरे साल एक मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड (Treasury Yields) ने लगातार सोने पर दबाव बनाया। मार्च 2026 में, युद्ध की परस्पर विरोधी खबरों के बीच डॉलर के मजबूत होने पर सोने ने अपनी बढ़त खो दी । जून तक, फेड अध्यक्ष केविन वार्श के सख्त रुख (Hawkish Stance) ने डॉलर को और मजबूत किया, जिससे सोने की कीमतों पर ऊपरी सीमा लग गई
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2026 के दौरान, सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जब भी होर्मुज में नाकाबंदी या हमलों की खबर आई, सोना उछला, लेकिन संघर्ष विराम की उम्मीदों पर वापस लुढ़क गया। अप्रैल में, अमेरिका द्वारा होर्मुज की नाकाबंदी की खबर पर सोना एक ही दिन में 2.2% गिर गया था । मई में फिर से तनाव बढ़ने पर सोने में एक दिन में 2% की गिरावट आई
। इस 'बाय द वॉर, सेल द पीस' (युद्ध की खबर पर खरीदो, शांति की खबर पर बेचो) के चक्र ने बार-बार भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को खत्म कर दिया, जिससे हर चक्र के बाद सोना निचले स्तर पर पहुंच गया।
सोने के साथ-साथ चांदी और अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में भी गिरावट आई। संघर्ष विराम की उम्मीदों और फेड की सख्ती के कारण पूरे धातु समूह पर नकारात्मक असर पड़ा। जून के अंत में भारत में चांदी की कीमतें स्थिर लेकिन कमजोर बनी रहीं ।