सोने की कीमत जून 2026 के अंत में गिरकर लगभग 4,055 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जो जनवरी में बने सर्वकालिक उच्च स्तर 5,589 डॉलर (25% गिरावट) से काफी नीचे है [4]। गिरावट की दो बड़ी वजहें: अमेरिका ईरान के बीच नए सैन्य हमलों ने तेल की कीमतें बढ़ा दीं और महंगाई का डर पैदा कर दिया, वहीं दूसरी ओर बाजार में Fed की ब्याज दर बढ़ोत...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for How are falling gold prices being driven by a combination of renewed US-Iran military strikes tha. Article summary: Here is the verified, sourced breakdown of the factors that plausibly drove gold’s sharp decline and why central bank buying may not have been enough to stop it.. Topic tags: general, general web, news, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thumbnails, icons, and tiny thu
जून 2026 के अंतिम सप्ताह में सोने में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। स्पॉट कीमत 28-29 जून तक गिरकर लगभग 4,055 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गई, जो जनवरी के सर्वकालिक उच्च स्तर 5,400 डॉलर से लगभग 25% कम है । इस बिकवाली के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं: फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की बढ़ती आशंका, अमेरिका-ईरान के बीच नए सैन्य तनाव ने तेल की कीमतें बढ़ा दीं, और लगातार महंगाई की चिंता। इस दौरान चीन के पीपुल्स बैंक सहित केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीदारी भी इन मजबूत दबावों के आगे टिक नहीं पाई। आइए समझते हैं कि यह बाजार किन कारकों से चल रहा है और क्यों मैक्रोइकोनॉमिक दबाव निर्णायक साबित हो रहे हैं।
जून 2026 के अंत तक सोने की कीमतें कई महीनों के निचले स्तर पर आ गई थीं। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, 29 जून को सोना 4,067.72 डॉलर प्रति औंस पर था, जो पिछले दिन से 0.47% कम था । अन्य स्रोतों ने भी इसी तरह के स्तर दिखाए: एक प्राइस ट्रैकर ने 28 जून को कीमत 4,054.99 डॉलर प्रति औंस बताई
, जबकि फॉर्च्यून ने 24 जून को कीमत 3,988 डॉलर आंकी
। एक सोने के बाजार विश्लेषण में कहा गया कि सोना गिरकर 4,165 डॉलर पर आ गया, जो 28 जनवरी के सर्वकालिक उच्च स्तर 5,589 डॉलर से 25% कम है
। जेएम बुलियन ने बताया कि 26 जून को सोना 4,082.54 डॉलर पर कारोबार कर रहा था और खरीदार इस गिरावट का फायदा उठा रहे थे
। यह कीमत अब मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 4,000 डॉलर के स्तर के करीब पहुंच गई है, और व्यापारियों को चेतावनी है कि आने वाले नॉनफार्म पेरोल्स (रोजगार) के आंकड़े तय करेंगे कि यह समर्थन स्तर टूटता है या नहीं।
सोने की गिरावट का सबसे बड़ा तात्कालिक कारण मध्य पूर्व में फिर से भड़का सैन्य संघर्ष है। अमेरिका और ईरान के बीच नए सैन्य हमलों ने कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया और महंगाई की आशंकाओं को बढ़ा दिया - जो सोने के लिए एक दोधारी तलवार साबित हुआ।
जून की शुरुआत में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे आपूर्ति में बड़े व्यवधान की आशंका पैदा हो गई । इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंडस्ट्रियल स्टडीज (ICIS) ने बताया कि 11 जून को ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 डॉलर प्रति बैरल से अधिक बढ़कर 95.16 डॉलर पर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI में 2.61% की उछाल आई
। इससे पहले, 1 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हमलों के बाद तेल की कीमतों में 5% से अधिक का उछाल आया था
। पूरे जून में यह तनाव जारी रहा, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रही।
तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर महंगाई की चिंताओं को बढ़ाती हैं, जिससे सख्त मौद्रिक नीति (ब्याज दरों में बढ़ोतरी) का मामला और मजबूत होता है। जून 2026 की FOMC बैठक के लिए CME FedWatch के विश्लेषण में स्पष्ट रूप से "भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न लगातार महंगाई के दबाव" का उल्लेख किया गया था ।
हालांकि, 15 जून को अमेरिका-ईरान के बीच एक अनंतिम समझौते की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई। बीबीसी ने बताया कि ब्रेंट क्रूड 5% से अधिक गिरकर 82.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया । लेकिन जून के अंत में फिर से शुरू हुए हमलों ने तेल की कीमतों को वापस ऊपर धकेल दिया
।
जून 2026 की FOMC बैठक में ब्याज दरों को 3.50%-3.75% की मौजूदा सीमा पर बनाए रखने का निर्णय लिया गया, जैसा कि बाजार को उम्मीद थी । लेकिन असली कहानी साल के बाकी हिस्से में ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावनाओं का नाटकीय रूप से बढ़ना था।
17 जून को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि CME ग्रुप के आंकड़ों के अनुसार, इंटरेस्ट-रेट फ्यूचर्स इस साल Fed द्वारा दो बार ब्याज दर बढ़ाने की 37% संभावना दर्शा रहे थे, जो एक दिन पहले सिर्फ 17% थी । यह तेजी से बदलाव एक ऐसे बाजार के माहौल को दर्शाता है जहां लगातार महंगाई, मजबूत श्रम बाजार और नए Fed चेयरमैन केविन वार्श के सख्त रुख ने व्यापारियों को कड़ी नीति के लिए तैयार कर दिया था।
प्रेडिक्शन मार्केट्स ने भी इसी तरह का बदलाव दिखाया। पॉलीमार्केट के आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत तक बाजार में दिसंबर तक कम से कम एक बार ब्याज दर बढ़ने की लगभग दो-तिहाई संभावना दिख रही थी । 27 जून तक CME FedWatch के आंकड़ों ने 69% संभावना दरें स्थिर रहने की और 31% संभावना ब्याज दरों में बढ़ोतरी (3.75%-4.00%) की दिखाई
।
सबसे चौंकाने वाला संस्थागत कदम 22 जून को आया, जब बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने अपने नीतिगत दृष्टिकोण को पूरी तरह उलट दिया। बैंक अब उम्मीद करता है कि फेडरल रिजर्व 2026 में तीन तिमाही-प्रतिशत ब्याज दर बढ़ोतरी करेगा - सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में - जिससे फेड फंड्स रेट बढ़कर 4.25%-4.50% हो जाएगी । यह बैंक के अपने पिछले पूर्वानुमान (जिसमें ब्याज दरों में कटौती की बात कही गई थी) से पूरी तरह उलट था।
BofA ने कहा कि महंगाई "निर्विवाद रूप से बदतर" होती जा रही है, और कोर PCE (Fed की पसंदीदा महंगाई गेज) के सालाना 3.5% रहने का अनुमान लगाया । बैंक के संशोधित पूर्वानुमान को एक बड़ा सख्त संकेत माना गया, जिसने फ्यूचर्स बाजारों में पहले से दिख रही ब्याज दर बढ़ोतरी की कहानी को और मजबूत किया
।
डॉयचे बैंक ने भी दो ब्याज दर बढ़ोतरी का पूर्वानुमान लगाकर इस कहानी को और बल दिया ।
सोने की मौजूदा गिरावट की सबसे खास बात यह है कि यह केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी के बावजूद हुई है। महीनों तक, विश्लेषकों ने मजबूत संस्थागत मांग - जिसमें चीन के पीपुल्स बैंक द्वारा खरीदारी शामिल है - को सोने की कीमतों के लिए एक संरचनात्मक समर्थन बताया था।
लेकिन यह समर्थन तीन कारणों से काफी नहीं रहा:
मैक्रो फोर्सेज सूक्ष्म मांग पर भारी पड़ती हैं। Fed का सख्त रुख एक शक्तिशाली मैक्रो इकोनॉमिक दबाव है जो टिकाऊ संरचनात्मक मांग को भी पछाड़ सकता है। फ्यूचर्स बाजारों ने इस साल दो Fed ब्याज दर बढ़ोतरी की बहुत अधिक संभावना दिखाई, जबकि बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 में तीन बढ़ोतरी का पूर्वानुमान लगाया । उच्च अपेक्षित नीति दरें डॉलर को मजबूत करती हैं और बिना किसी ब्याज के सोने को रखने की लागत (अवसर लागत) बढ़ा देती हैं।
महंगाई और भू-राजनीतिक दबाव ने ब्याज दर बढ़ोतरी की कहानी को मजबूत किया। जून की Fed-बैठक के मद्देनजर लगातार महंगाई के दबाव का हवाला दिया गया, जिसमें भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न हालिया उछाल भी शामिल था । इसने सख्त नीति के मामले को और मजबूत किया, जिससे सोने पर और दबाव पड़ा।
तेल/भू-राजनीतिक जोखिम सोने के लिए दोधारी तलवार साबित हुआ। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव ने शुरू में कच्चे तेल की आपूर्ति और महंगाई के जोखिम को बढ़ाया, जिससे Fed की कड़ी नीति को बल मिला और सोना नीचे आया। जब अनंतिम अमेरिका-ईरान समझौते की घोषणा हुई, तो तेल की कीमतें गिर गईं और जोखिम की भावना में सुधार हुआ - जिससे सुरक्षित निवेश (सोने) की मांग भी कम हो गई । इस चक्र में, भू-राजनीतिक जोखिम सोने के लिए शुद्ध रूप से नकारात्मक साबित हुआ है।
निकट भविष्य में सोने के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े - विशेष रूप से नॉनफार्म पेरोल्स - Fed फंड्स फ्यूचर्स और बैंक पूर्वानुमानों में पहले से दिख रहे सख्त पुनर्मूल्यांकन को और मजबूत कर सकते हैं। ब्याज दर बढ़ोतरी की उच्च संभावनाओं और बैंक ऑफ अमेरिका द्वारा आवाज को और तेज करने के साथ, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी कोई स्थायी उछाल नहीं ला सकती है।
बैंक ऑफ अमेरिका ने अपने दीर्घकालिक 6,000 डॉलर प्रति औंस के लक्ष्य को बरकरार रखा है, लेकिन इसकी समयसीमा को आगे बढ़ा दिया है, यह स्वीकार करते हुए कि निकट भविष्य में Fed की सख्ती और सितंबर 2026 में ब्याज दर बढ़ोतरी की 70% से अधिक संभावना कीमतों पर भारी पड़ रही है । सोने का भविष्य अब इस बात पर निर्भर करता है कि क्या आने वाले आंकड़े ब्याज दर बढ़ोतरी की कहानी की पुष्टि करते हैं - या बाजारों को अपनी उम्मीदों को कम करने का कारण देते हैं।
Studio Global AI
Use this topic as a starting point for a fresh source-backed answer, then compare citations before you share it.
सोने की कीमत जून 2026 के अंत में गिरकर लगभग 4,055 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जो जनवरी में बने सर्वकालिक उच्च स्तर 5,589 डॉलर (25% गिरावट) से काफी नीचे है [4]।
सोने की कीमत जून 2026 के अंत में गिरकर लगभग 4,055 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जो जनवरी में बने सर्वकालिक उच्च स्तर 5,589 डॉलर (25% गिरावट) से काफी नीचे है [4]। गिरावट की दो बड़ी वजहें: अमेरिका ईरान के बीच नए सैन्य हमलों ने तेल की कीमतें बढ़ा दीं और महंगाई का डर पैदा कर दिया, वहीं दूसरी ओर बाजार में Fed की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें तेजी से बढ़ गईं [33][50]।
बैंक ऑफ अमेरिका जैसी बड़ी संस्थाओं ने अपने अनुमान पूरी तरह बदल दिए और अब 2026 में तीन तिमाही प्रतिशत ब्याज दर बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, जो सोने के लिए बड़ा नकारात्मक संकेत है [50]।