रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने 28 जून, 2026 को पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि देश को 'ईंधन की एक निश्चित कमी' का सामना करना पड़ रहा है और यह 'मुश्किल दौर' है। [1][4][5] यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। [2][5] दो दिनों के भीतर मास्को की सबसे बड़ी...

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यहां घटनाओं और उनके परिणामों का एक विस्तृत, स्रोत-आधारित विवरण दिया गया है।
रविवार, 28 जून 2026 को, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि रूस 'ईंधन की एक निश्चित कमी' का सामना कर रहा है और इस दौर को देश के लिए 'मुश्किल' बताया। उन्होंने तेल सुविधाओं की सुरक्षा मजबूत करने और ईंधन उत्पादन बढ़ाने का वादा किया।
उनकी यह टिप्पणी यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बीच आई, जो रूसी ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं।
28-29 जून, 2026 — दक्षिणी रिफाइनरी में आग और अंदर तक हमले
पिछले हमले जिन्होंने मंच तैयार किया
रूस वर्षों में अपने सबसे भीषण राष्ट्रव्यापी ईंधन संकट का सामना कर रहा है।
क्रेमलिन ने घरेलू आपूर्ति को संरक्षित करने के लिए ईंधन निर्यात पर कई प्रतिबंध लगाए हैं:
28 जून को पुतिन का 'मुश्किल दौर' स्वीकारोक्ति, यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कई हफ्तों के चरम पर पहुंचने के बाद आई, जिसने कई प्रमुख रिफाइनरियों को नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है — सबसे महत्वपूर्ण रूप से मास्को की आपूर्ति करने वाला कपोतन्या संयंत्र, जिसके महीनों तक बंद रहने की उम्मीद है। इस संचयी प्रभाव ने वर्षों में रूस का सबसे भीषण ईंधन संकट पैदा कर दिया है, कम से कम 15-17 क्षेत्रों में राशनिंग, पंपों पर पैनिक-बॉयिंग और पेट्रोल, जेट ईंधन और संभावित रूप से डीजल पर बढ़ते सरकारी निर्यात प्रतिबंधों की एक श्रृंखला लगाई गई है।
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रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने 28 जून, 2026 को पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि देश को 'ईंधन की एक निश्चित कमी' का सामना करना पड़ रहा है और यह 'मुश्किल दौर' है। [1][4][5]
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने 28 जून, 2026 को पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि देश को 'ईंधन की एक निश्चित कमी' का सामना करना पड़ रहा है और यह 'मुश्किल दौर' है। [1][4][5] यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। [2][5]
दो दिनों के भीतर मास्को की सबसे बड़ी कपोतन्या रिफाइनरी पर दो ड्रोन हमलों ने उसकी कच्चे तेल की सभी प्रोसेसिंग यूनिट को बंद कर दिया। इसकी मरम्मत में कम से कम छह महीने लगने का अनुमान है। [4][7][8]