MOU पर हस्ताक्षर होते ही ईरान ने इसे अपने युद्ध उद्देश्यों की पूर्ति के रूप में पेश किया। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) के अनुसार, ईरान ने दावा किया कि समझौते का अंतिम पाठ उसकी प्रमुख युद्ध आकांक्षाओं को पूरा करता है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण भी शामिल है। तेहरान का तर्क है कि पाठ उसे जलडमरूमध्य से आवाजाही को नियंत्रित करने का अधिकार देता है ।
23 जून तक, ईरान ने अपने इस दावे को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया। ISW की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ओमान के साथ एक संयुक्त तंत्र स्थापित करने जा रहा था, जो उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर दीर्घकालिक अधिकार देता और वह अपनी इच्छानुसार यातायात को प्रतिबंधित कर सकता है ।
द गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि MOU 'बहुत अस्पष्ट रूप से लिखा गया था', जिससे दोनों पक्षों को अपने-अपने हिसाब से व्याख्या करने का मौका मिला । समझौते के अनुच्छेद-5 में 'सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए ईरान द्वारा सर्वोत्तम प्रयास' और 'व्यवस्थाएं' जैसे अस्पष्ट शब्दों ने विवाद की जड़ बनाई
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गुरुवार या शुक्रवार, 26 जून की सुबह, राष्ट्रपति ट्रम्प ने Truth Social पर पोस्ट किया कि ईरान ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कम से कम चार ड्रोन ने मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया, जिसमें से एक ड्रोन ने 'एक बड़े और बहुत महंगे कार्गो जहाज के ऊपरी डेक को जोरदार टक्कर मारी', हालांकि जहाज चलने में सक्षम था । ट्रम्प ने इसे 'मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' बताया
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इसके कुछ ही घंटों बाद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जवाबी कार्रवाई में ईरानी मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों और तटीय रडार साइटों पर हमला करने की घोषणा की ।
शनिवार, 27 जून को, पनामा ध्वज वाले टैंकर MT किकु पर होर्मुज जलडमरूमध्य में एक ईरानी ड्रोन ने हमला किया। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी (UKMTO) ने पुष्टि की कि जहाज के पुल (ब्रिज) को नुकसान पहुंचा, लेकिन सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए ।
उसी दिन, अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरी रात हमले किए। इस बार निशाना ईरान का सैन्य निगरानी बुनियादी ढांचा, संचार प्रणाली, वायु रक्षा स्थल, ड्रोन भंडारण सुविधाएं और जलडमरूमध्य के किनारे खदान बिछाने की क्षमताएं थीं। हमले सिरिक, बंदर-ए-लेंगेह और क्वेश्म द्वीप के आसपास किए गए । CENTCOM ने इसे 'आत्मरक्षा' और 'वाणिज्यिक शिपिंग के खिलाफ लगातार ईरानी आक्रामकता की सीधी प्रतिक्रिया' बताया
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रविवार, 28 जून को, ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में बहरीन और कुवैत पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, यह सीधी जवाबी कार्रवाई थी ।
ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली और दावा किया कि उन्होंने बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय और कुवैत में अली अल सलेम एयरबेस को निशाना बनाया । बहरीन में एयर रेड सायरन बज उठे, जबकि कुवैत ने पुष्टि की कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली 'दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन खतरों' का जवाब दे रही है
। कुवैत ने यह भी कहा कि उसने ईरानी ड्रोन और दो मिसाइलों को रोक लिया; किसी के हताहत या नुकसान की सूचना नहीं है
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यह ईरान का इस तरह का पहला हमला नहीं था। उसने MOU पर हस्ताक्षर होने से पहले भी जून की शुरुआत में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हमला किया था । लेकिन 28 जून के हमले समझौते के बाद सबसे बड़ा उकसावा माने जा रहे हैं
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होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल निकासी (चोकपॉइंट) है। शांति काल में, दुनिया के कुल तेल की खपत का लगभग 20% (लगभग 17-20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) इसी मार्ग से होकर गुजरता है । जब MOU पर हस्ताक्षर हुए और अमेरिका ने 18 जून को अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में इसकी सीधी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड की कीमत 8.5% गिरकर लगभग 80.59 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थी
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19 जून को, ऊर्जा ट्रैकिंग फर्म Global Energy Flow ने जलडमरूमध्य की स्थिति को "ELEVATED (रिकवरी-फ्रैजाइल)" यानी 'उच्च (सुधार-नाजुक)' घोषित किया । नए सिरे से शुरू हुई शत्रुता ने अब इस मार्ग के भविष्य को फिर से अनिश्चित बना दिया है।
28 जून तक, बातचीत की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो चुकी थी। ईरान ने स्पष्ट रूप से 'बातचीत को पूरी तरह बंद' करने की धमकी दी, अगर वाशिंगटन ने अपने हमले जारी रखे ।
बातचीत के किसी भी नए दौर की कोई तारीख तय नहीं की गई थी। द गार्जियन ने 28 जून को रिपोर्ट किया कि युद्धविराम 'पतन के कगार पर' था और MOU होर्मुज पर शासन और लेबनान युद्धविराम की शर्तों जैसे मुख्य विवादों को सुलझाने में विफल रहा था । ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अगले 30 दिनों तक जलडमरूमध्य पर एकमात्र प्रबंधन और निगरानी रखेगा, उसके बाद ही पूर्ण यातायात बहाल होगा
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17 जून 2026 को हुआ अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौता महज 11 दिनों में ध्वस्त हो गया। 28 जून तक, दोनों पक्ष होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हमलों का आदान-प्रदान कर चुके थे, ईरान ने खाड़ी के पड़ोसी देशों पर हमला कर दिया था और बातचीत को पूरी तरह बंद करने की धमकी दी गई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसका नियंत्रण होगा, यह अब भी सबसे बड़ा फ्लैशप्वाइंट बना हुआ है, जहां ईरान एक अस्पष्ट समझौते के तहत अपने विशेष अधिकार का दावा कर रहा है और अमेरिका उस पर युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है।