'कैरियोप्टोसिस' शब्द ग्रीक शब्दों karyon (केंद्रक) और ptosis (गिरना) से मिलकर बना है, जो इसकी केंद्रक-जनित उत्पत्ति को दर्शाता है ।
शोधकर्ताओं ने 28 रोगियों के 3,000 से अधिक मस्तिष्क कोशिकाओं का कम्प्यूटेशनल एकल-कोशिका विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि अल्ज़ाइमर के रोगियों के फ्रंटल कॉर्टेक्स (ललाट प्रांतस्था) में 35% न्यूरॉन्स में कैरियोप्टोसिस के सक्रिय मार्कर पाए गए, जबकि स्वस्थ वृद्धों में यह संख्या केवल 15% थी । रोगग्रस्त मस्तिष्कों में कैरियोप्टोसिस-पॉज़िटिव कोशिकाओं का यह दोगुने से अधिक होना दर्शाता है कि यह तंत्र अल्ज़ाइमर की विशेषता वाली न्यूरोनल हानि में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
शोध दल ने पूरी आणविक श्रृंखला का मानचित्रण किया जो कैरियोप्टोसिस की ओर ले जाती है। उन्होंने एक विशिष्ट प्रोटीन-प्रोटीन इंटरैक्शन की पहचान की, जिसे भविष्य की दवाओं का लक्ष्य बनाया जा सकता है :
p38-LaminB1 इंटरैक्शन को इसलिए डिमेंशिया में न्यूरोनल हानि को धीमा करने या रोकने के लिए एक आशाजनक चिकित्सीय लक्ष्य माना जा रहा है । डॉ. मैनोलिस फैंटो और डॉ. रेबेका कास्टरटन, जिन्होंने इस शोध का नेतृत्व किया, ने इस अध्ययन को "किंग्स में 10 साल की यात्रा का चरमोत्कर्ष" बताया
।
अल्ज़ाइमर रिसर्च UK (जिसने इस अध्ययन को सह-वित्तपोषित किया) की वरिष्ठ अनुसंधान प्रबंधक डॉ. सारा रॉड्रिग्स ने कहा: "कैरियोप्टोसिस की पहचान उपचारों के लिए लक्ष्य खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो कोशिका हानि को रोक या धीमा कर सकते हैं। यह उन थेरेपियों के लिए खिड़की को चौड़ा कर सकता है जो बीमारी के अंतर्निहित कारणों से निपटती हैं, जिससे हम डिमेंशिया के इलाज के और करीब पहुंच सकेंगे" । चैरिटी ने यह भी नोट किया कि यह खोज "शोधकर्ताओं को नए उपचार लक्ष्यों की पहचान करने और हमें प्रभावी उपचारों के करीब लाने में मदद कर सकती है"
।
कैरियोप्टोसिस की खोज ने यह समझने का एक नया ढांचा प्रदान किया है कि अल्ज़ाइमर रोग और FTD में न्यूरॉन्स कैसे मरते हैं। चूंकि p38-LaminB1 इंटरैक्शन एक दवा-योग्य (ड्रगेबल) लक्ष्य है, दवा कंपनियां संभावित रूप से छोटे-अणु अवरोधक (स्मॉल-मॉलिक्यूल इनहिबिटर्स) विकसित कर सकती हैं जो इस इंटरैक्शन को ब्लॉक करेंगे, न्यूरॉन्स को संरक्षित करेंगे और रोग की प्रगति को धीमा करेंगे। हालांकि, यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है — रुकावट के प्रयोग चूहे के न्यूरॉन्स पर प्रयोगशाला में किए गए थे, और इन निष्कर्षों को सुरक्षित और प्रभावी मानव उपचारों में बदलने के लिए अभी और अधिक काम करने की आवश्यकता है ।
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