जून 2026 में, CERN के CLOUD प्रयोग के नतीजे बताते हैं कि प्लवक द्वारा उत्सर्जित डाइमिथाइल सल्फाइड (DMS) के ऑक्सीकरण से बनने वाला मेथेनसल्फोनिक एसिड (MSA), ठंडी समुद्री हवा में नए कणों के निर्माण को काफी बढ़ावा देता है... यह रास्ता खासतौर पर दक्षिणी महासागर और आर्कटिक जैसे ठंडे और स्वच्छ क्षेत्रों में कारगर है, जहां...
शोध उत्तर

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वैज्ञानिक पिछले लगभग 50 वर्षों से इस बहस में उलझे थे कि क्या समुद्र में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव (प्लवक) जलवायु को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। अब, CERN का एक ऐतिहासिक प्रयोग इसका सबसे मजबूत सबूत पेश करता है कि वे ऐसा कर सकते हैं—और यह कि मौजूदा जलवायु मॉडल पहेली का एक महत्वपूर्ण टुकड़ा छोड़ रहे हैं।
जून 2026 में, क्लाउड (CLOUD) कोलैबोरेशन ने नेचर पत्रिका में परिणाम प्रकाशित किए, जो दर्शाते हैं कि मेथेनसल्फोनिक एसिड (MSA)—प्लवक उत्सर्जन से बनने वाला एक यौगिक—बादलों के बीज निर्माण का एक कहीं अधिक महत्वपूर्ण ड्राइवर है, जितना पहले माना जाता था । इस खोज का जलवायु मॉडलों की सटीकता और भविष्य में होने वाले वार्मिंग के अनुमानों पर तत्काल प्रभाव है
।
यह पूरी श्रृंखला समुद्री फाइटोप्लांकटन (एक प्रकार का प्लवक) से शुरू होती है। प्रकाश संश्लेषण के दौरान, ये सूक्ष्म जीव डाइमिथाइल सल्फाइड (DMS) गैस छोड़ते हैं—यह वही गैस है जो समुद्र की विशिष्ट गंध के लिए जिम्मेदार होती है । वातावरण में पहुंचने पर, DMS हाइड्रॉक्सिल रेडिकल के साथ प्रतिक्रिया करके ऑक्सीकृत होता है, जिसमें सल्फ्यूरिक एसिड और मेथेनसल्फोनिक एसिड (MSA) दोनों बनते हैं
।
CLOUD प्रयोग ने जो खुलासा किया, वह यह है कि MSA कोई छोटा-मोटा उप-उत्पाद नहीं है। ठंडी वायुमंडलीय परिस्थितियों—जैसे समुद्री ऊपरी ट्रोपोस्फीयर और ध्रुवीय क्षेत्रों में—MSA नए कणों के निर्माण और उनके विकास का एक कुशल चालक साबित होता है, जिसकी अस्थिरता सल्फ्यूरिक एसिड के बराबर होती है । ये कण बड़े होकर बादल संघनन नाभिक (CCN) बन जाते हैं—ये वे बीज हैं जिनके चारों ओर बादल की बूंदें बनती हैं
।
यह तंत्र विशेष रूप से ठंडी, स्वच्छ समुद्री हवा में प्रभावी है, जहां सिर्फ सल्फ्यूरिक एसिड अकेले कणों का न्यूक्लिएशन कुशलतापूर्वक नहीं कर पाता ।
दशकों से, "क्लॉ परिकल्पना" (CLAW hypothesis)—जिसका नाम इसके प्रस्तावकों चार्ल्सन, लवलॉक, आंद्रे और वॉरेन के नाम पर रखा गया था—ने प्रस्तावित किया था कि प्लवक से निकलने वाला DMS बादल निर्माण के माध्यम से जलवायु को नियंत्रित कर सकता है । लेकिन इस तंत्र को कमजोर या अनिश्चित माना जाता था
। CLOUD प्रयोगों ने अब प्रदर्शित किया है कि MSA-संचालित मार्ग एक प्रमुख, पहले अनदेखा किया गया मार्ग है—विशेष रूप से जलवायु के लिहाज से महत्वपूर्ण दक्षिणी महासागर और आर्कटिक क्षेत्रों में
।
CLOUD कोलैबोरेशन ने कहा, "समुद्री बायोस्फीयर मानवजनित एरोसोल में भविष्य में कमी की भरपाई पहले की सोच से बेहतर तरीके से कर सकता है ।"
अधिकांश वैश्विक जलवायु मॉडलों में MSA-संचालित नए कण निर्माण को शामिल नहीं किया गया है। जब CLOUD डेटा को EMAC वैश्विक एरोसोल-जलवायु मॉडल में शामिल किया गया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे: MSA-संचालित कण निर्माण और विकास को शामिल करने से दक्षिणी महासागर और ध्रुवीय क्षेत्रों में बादल संघनन नाभिक (CCN) सांद्रता में कम से कम 50% की वृद्धि हुई ।
यह पृथ्वी के सबसे जलवायु रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक में एक बड़ा प्रभाव है। अनुसंधान इस प्रभाव का समर्थन करते हैं: फाइटोप्लांकटन के फूल (blooms) के दौरान, बादल की बूंदों की संख्या दोगुनी हो सकती है, और बादल की बूंदों की त्रिज्या 14% तक कम हो सकती है, जिससे वायुमंडल के शीर्ष पर -15 W/m² तक का शॉर्ट-वेव रेडिएटिव फोर्सिंग प्रभाव उत्पन्न होता है—जो अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों पर एरोसोल के अप्रत्यक्ष प्रभाव के बराबर है ।
जैसे-जैसे मानव निर्मित एरोसोल प्रदूषण (स्वच्छ-वायु नीतियों के कारण) कम होता जाएगा, प्राकृतिक प्लवक-व्युत्पन्न एरोसोल बादल बीजारोपण की भूमिका संभाल सकते हैं, जिससे एक स्वच्छ भविष्य में बादल कैसे बदलते हैं, इसके अनुमान बदल जाएंगे ।
ये निष्कर्ष बताते हैं कि बायोस्फीयर का DMS-बादल फीडबैक मौजूदा IPCC-श्रेणी के मॉडलों में मानी गई तुलना में अधिक मजबूत हो सकता है। इसका मतलब एक प्राकृतिक नकारात्मक फीडबैक हो सकता है जो आंशिक रूप से वार्मिंग का प्रतिकार करता है:
इस फीडबैक की ताकत अनिश्चित बनी हुई है। कुछ पहले के अध्ययनों ने वैश्विक स्तर पर CCN की DMS उत्सर्जन परिवर्तनों के प्रति कम संवेदनशीलता पाई थी, और क्लॉ परिकल्पना विवादास्पद रही है । CLOUD के निष्कर्ष मामले को पुनर्जीवित और मजबूत करते हैं, लेकिन MSA रसायन को पृथ्वी प्रणाली मॉडलों में पूरी तरह शामिल करना और अवलोकनों के खिलाफ सत्यापन अभी भी चल रहा है
। परिणाम बहुत हाल ही के हैं (24-25 जून, 2026 को प्रकाशित) और अभी तक व्यापक जलवायु मॉडलिंग समुदाय द्वारा मूल्यांकन नहीं किया गया है।
CLOUD प्रयोग एरोसोल कण निर्माण की यांत्रिक समझ प्रदान करना जारी रखता है जिसे जलवायु मॉडलों में पैरामीटराइज़ किया जा सकता है । प्रमुख अगले कदमों में शामिल हैं: IPCC-श्रेणी के पृथ्वी प्रणाली मॉडलों में MSA रसायन को शामिल करना, दक्षिणी महासागर और आर्कटिक पर क्षेत्रीय अवलोकनों के खिलाफ मॉडल प्रभावों को मान्य करना, और यह आकलन करना कि विभिन्न वार्मिंग परिदृश्यों के तहत फीडबैक कैसे बदल सकता है।
जो पहले से ही स्पष्ट है: समुद्र के जीव विज्ञान का भविष्य की जलवायु पर उससे कहीं अधिक बड़ा कहना हो सकता है, जितना मॉडलों ने उसे श्रेय दिया है।
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जून 2026 में, CERN के CLOUD प्रयोग के नतीजे बताते हैं कि प्लवक द्वारा उत्सर्जित डाइमिथाइल सल्फाइड (DMS) के ऑक्सीकरण से बनने वाला मेथेनसल्फोनिक एसिड (MSA), ठंडी समुद्री हवा में नए कणों के निर्माण को काफी बढ़ावा देता है...
जून 2026 में, CERN के CLOUD प्रयोग के नतीजे बताते हैं कि प्लवक द्वारा उत्सर्जित डाइमिथाइल सल्फाइड (DMS) के ऑक्सीकरण से बनने वाला मेथेनसल्फोनिक एसिड (MSA), ठंडी समुद्री हवा में नए कणों के निर्माण को काफी बढ़ावा देता है... यह रास्ता खासतौर पर दक्षिणी महासागर और आर्कटिक जैसे ठंडे और स्वच्छ क्षेत्रों में कारगर है, जहां सिर्फ सल्फ्यूरिक एसिड से कुशलतापूर्वक न्यूक्लिएशन नहीं हो पाता है [7][22]।
जब CLOUD के डेटा को EMAC ग्लोबल मॉडल में शामिल किया गया, तो पाया गया कि इससे दक्षिणी महासागर और ध्रुवीय क्षेत्रों में बादल संघनन नाभिक (CCN) की सांद्रता में कम से कम 50% की वृद्धि होती है, जो जलवायु मॉडलों की सटीकता क...