इस बदलाव का सीधा कारण EV की बढ़ती बिक्री है, जिसने उत्सर्जन मानकों को कम करने के राजनीतिक दबाव को कम कर दिया। EU जलवायु आयुक्त वोप्के हुएकस्ट्रा ने 25 जून 2026 को स्पष्ट कहा, "कुछ सदस्य देश वास्तव में मानकों में देरी या नरमी की मांग कर रहे थे, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की शानदार स्वीकार्यता ने उनका रुख बदल दिया है" ।
जून 2026 में, सात देशों - डेनमार्क, फ्रांस, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड्स, पुर्तगाल, स्पेन और स्वीडन - ने औपचारिक रूप से उत्सर्जन नियमों में किसी भी तरह की ढील को खारिज कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि नई छूट से EV संक्रमण धीमा होगा और उद्योग में निवेश किए गए अरबों यूरो पर संकट आएगा ।
इस बीच, कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों में भी बदलाव हुए हैं। दिसंबर 2025 में, यूरोपीय आयोग ने 2035 तक 100% उत्सर्जन मुक्ति के मूल लक्ष्य को बदलकर 90% CO₂ कमी का नया लक्ष्य रखा, जिससे सीमित संख्या में पेट्रोल-डीज़ल वाहनों को बिक्री की अनुमति मिल सके ।
आयुक्त हुएकस्ट्रा ने इस संशोधन को "जलवायु और प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक स्मार्ट और समझदारी भरा समझौता" बताया, और कहा कि decarbonisation की दिशा अपरिवर्तित है । हालांकि, ऑटो उद्योग और कुछ देशों (जैसे जर्मनी और इटली) का कहना है कि 2035 के लक्ष्य "अब व्यावहारिक नहीं हैं" और उन्हें और बढ़ाने की ज़रूरत है
।
EV बिक्री में आया यह उछाल EU की जलवायु नीति के लिए एक मजबूत संकेत है। बाजार की ताकत ने ही नियमों को कमज़ोर करने का विरोध पैदा कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या बढ़ती EV बिक्री सरकारों और उद्योग के बीच के इस नीतिगत तनाव को पूरी तरह खत्म कर पाएगी।
Comments
0 comments