चार्ल्स श्वाब (Charles Schwab) के अनुसार, डीबेसमेंट ट्रेड का मतलब है सरकारों के बेलगाम कर्ज और नोट छापने की वजह से फिएट करेंसी में विश्वास कम होने पर असली संपत्तियों (जैसे सोना, चांदी, बिटकॉइन) में निवेश करना । यह ट्रेड 2025 और 2026 की शुरुआत तक जबरदस्त रैली लेकर आया था। सोना $5,594 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, चांदी ने $120 को छुआ था, और बिटकॉइन $100,000 के ऊपर था
।
इस पतन की शुरुआत 30 जनवरी 2026 को मानी जाती है । इसी दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वार्श (Kevin Warsh) को फेडरल रिजर्व का नया प्रमुख चुना
। वार्श को एक कड़े रुख वाला (Hawkish) नेता माना जाता है जो फिएट करेंसी की मजबूती और वित्तीय अनुशासन पर जोर देंगे। इसने सीधे तौर पर "नोट छापने" वाली उस थीसिस पर वार कर दिया, जिस पर डीबेसमेंट ट्रेड टिका हुआ था
।
इसके बाद कई कारकों ने मिलकर गिरावट को और तेज कर दिया:
कुल नुकसान: मध्य जून के 24 घंटों में $1.7 ट्रिलियन और 24 जून के 30 घंटों में $1.5 ट्रिलियन का नुकसान
।
इस गिरावट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि निवेशक एक हार्ड एसेट से दूसरे में नहीं जा रहे, बल्कि सभी से बाहर निकल रहे हैं। यह पैसा मजबूत डॉलर, बढ़ती ब्याज दरों और अमेरिकी शेयर बाजार (Dow Jones ने रिकॉर्ड बनाया) की ओर जा रहा है ।
सोने, चांदी और बिटकॉइन में यह एक साथ गिरावट कोई संयोग नहीं है। यह 'डीबेसमेंट ट्रेड' के चले जाने और ब्याज दरों के नए माहौल का नतीजा है। फिलहाल निवेशक इन एसेट्स की सप्लाई की बजाय डॉलर की दिशा पर ध्यान दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या बिटकॉइन $54,000–$56,000 और सोना $4,000 के स्तर को वापस पा पाता है या नहीं ।
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