जैसे ही एशियाई रिफाइनरियाँ पीछे हटीं, शेल पीएलसी और मर्क्यूरिया एनर्जी ग्रुप लिमिटेड जैसी बड़ी तेल कंपनियों और ट्रेडिंग हाउसों ने अतिरिक्त तेल खरीदना शुरू कर दिया । इस कदम ने मध्य पूर्वी तेल की कीमतों को गिरने से तो बचाया, लेकिन इसने यह भी साबित कर दिया कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति है।
अमेरिका और ईरान के बीच जून के मध्य में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत शत्रुता समाप्त करने और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बनी। यह जलडमरूमध्य मार्च 2026 से प्रभावी रूप से बंद था । इसके बाद कार्गो शिपमेंट फिर से शुरू हो गए, और फारस की खाड़ी में फंसे 6 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल का एक बड़ा बैकलॉग एशियाई बाजारों की ओर रवाना होने को तैयार हो गया । भौतिक तेल बाजार में तेजी से बदलाव आया - ब्रेंट क्रूड डील से पहले के स्तरों से लगभग 13% गिरकर 22 जून तक लगभग 78.64 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया ।
तेल की कीमतों पर कई आपूर्ति-पक्ष कारकों ने मिलकर दबाव बनाया:
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने, 6 करोड़ बैरल से अधिक के बैकलॉग और ओपेक+ के समन्वित उत्पादन वृद्धि के संयोजन ने क्रूड फ्यूचर्स कर्व को बियरिश कॉन्टैंगो में धकेल दिया - यानी निकट अवधि की कीमतें बाद के अनुबंधों की तुलना में सस्ती हो गईं। यह संरचना तेल के भंडारण को प्रोत्साहित करती है, न कि तत्काल कार्गो खरीदने को। इससे रिफाइनरियों द्वारा स्पॉट खरीद पर और दबाव पड़ा। तेल बाजार के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अचानक आपूर्ति बढ़ गई, जिससे युद्ध के कारण पैदा हुई कमी की भावना बदलकर अधिक आपूर्ति में बदल गई ।
अधिकांश एशियाई खरीदारों ने जून से अगस्त तक आने वाली आपूर्ति के लिए पहले ही कमिटमेंट कर लिए हैं और अब उनके पास पर्याप्त स्टॉक है । ईरानी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट से एशियाई ऑर्डरों में व्यापक वृद्धि की उम्मीद नहीं है - केवल चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियाँ ही ईरानी बैरल की प्रमुख खरीदार होंगी । मिड-2026 तक रिफाइनरी खरीदारी के व्यवहार के सतर्क और अवसरवादी रहने की उम्मीद है। कॉन्टैंगो संरचना प्रतीक्षा को प्रोत्साहित करती है, इसलिए रिफाइनरियाँ टर्म कमिटमेंट के बजाय डिस्काउंटेड डिफरेंशियल पर स्पॉट कार्गो को प्राथमिकता देंगी।
जैसे ही एशियाई रिफाइनरियाँ पीछे हटीं, शेल पीएलसी और मर्क्यूरिया एनर्जी ग्रुप लिमिटेड जैसी बड़ी तेल कंपनियों और ट्रेडिंग हाउसों ने अतिरिक्त तेल खरीदना शुरू कर दिया । इस कदम ने मध्य पूर्वी तेल की कीमतों को गिरने से तो बचाया, लेकिन इसने यह भी साबित कर दिया कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति है।
अमेरिका और ईरान के बीच जून के मध्य में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत शत्रुता समाप्त करने और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बनी। यह जलडमरूमध्य मार्च 2026 से प्रभावी रूप से बंद था । इसके बाद कार्गो शिपमेंट फिर से शुरू हो गए, और फारस की खाड़ी में फंसे 6 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल का एक बड़ा बैकलॉग एशियाई बाजारों की ओर रवाना होने को तैयार हो गया । भौतिक तेल बाजार में तेजी से बदलाव आया - ब्रेंट क्रूड डील से पहले के स्तरों से लगभग 13% गिरकर 22 जून तक लगभग 78.64 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया ।
तेल की कीमतों पर कई आपूर्ति-पक्ष कारकों ने मिलकर दबाव बनाया:
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने, 6 करोड़ बैरल से अधिक के बैकलॉग और ओपेक+ के समन्वित उत्पादन वृद्धि के संयोजन ने क्रूड फ्यूचर्स कर्व को बियरिश कॉन्टैंगो में धकेल दिया - यानी निकट अवधि की कीमतें बाद के अनुबंधों की तुलना में सस्ती हो गईं। यह संरचना तेल के भंडारण को प्रोत्साहित करती है, न कि तत्काल कार्गो खरीदने को। इससे रिफाइनरियों द्वारा स्पॉट खरीद पर और दबाव पड़ा। तेल बाजार के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अचानक आपूर्ति बढ़ गई, जिससे युद्ध के कारण पैदा हुई कमी की भावना बदलकर अधिक आपूर्ति में बदल गई ।
अधिकांश एशियाई खरीदारों ने जून से अगस्त तक आने वाली आपूर्ति के लिए पहले ही कमिटमेंट कर लिए हैं और अब उनके पास पर्याप्त स्टॉक है । ईरानी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट से एशियाई ऑर्डरों में व्यापक वृद्धि की उम्मीद नहीं है - केवल चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियाँ ही ईरानी बैरल की प्रमुख खरीदार होंगी । मिड-2026 तक रिफाइनरी खरीदारी के व्यवहार के सतर्क और अवसरवादी रहने की उम्मीद है। कॉन्टैंगो संरचना प्रतीक्षा को प्रोत्साहित करती है, इसलिए रिफाइनरियाँ टर्म कमिटमेंट के बजाय डिस्काउंटेड डिफरेंशियल पर स्पॉट कार्गो को प्राथमिकता देंगी।