एशियाई तेल रिफाइनरियों ने जून 2026 के अंत में तीन सप्ताह की खरीदारी के बाद अचानक मध्य पूर्वी कच्चे तेल की खरीद रोक दी। इसकी वजह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने, अमेरिका ईरान शांति समझौते और ओपेक+ के उत्पादन बढ़ाने... शेल और मर्क्यूरिया जैसी बड़ी तेल कंपनियों ने एशियाई खरीदारों के पीछे हटने पर अतिरिक्त तेल खरीदा,...

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एशियाई तेल रिफाइनरियों ने, जिन्होंने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हटने के बाद तीन सप्ताह तक मध्य पूर्वी कच्चे तेल की जमकर खरीदारी की थी, जून 2026 के अंत में अचानक अपनी खरीदारी रोक दी। यह उलटफेर युद्ध के कारण पैदा हुई कमी से तेजी से सप्लाई ग्लूट की ओर बढ़ने के कारण हुआ, जो अमेरिका-ईरान शांति समझौते, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने और ओपेक+ के उत्पादन में वृद्धि के बाद संभव हो पाया। आइए, स्रोतों के साथ इस पूरी कहानी को समझते हैं।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हटने के बाद, एशियाई रिफाइनरियों ने अपने स्टॉक को फिर से भरने के लिए तीन सप्ताह तक मध्य पूर्वी कच्चे तेल की जमकर खरीदारी की। लेकिन जून के अंत तक, उन्होंने अपनी निकट भविष्य की ज़रूरतों को पूरा कर लिया था और बाजार से पीछे हट गए । अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) से खरीदारी तीन टेंडर के बाद कम हो गई, और चौथे टेंडर में भी इसी तरह की नरमी देखने को मिल सकती है। खरीदारी में कमी की एक बड़ी वजह यह भी थी कि बाजार में आपूर्ति की एक और लहर आने वाली थी, इसलिए ऊंचे प्रीमियम पर खरीदारी जारी रखने की कोई जल्दी नहीं थी
।
जैसे ही एशियाई रिफाइनरियाँ पीछे हटीं, शेल पीएलसी और मर्क्यूरिया एनर्जी ग्रुप लिमिटेड जैसी बड़ी तेल कंपनियों और ट्रेडिंग हाउसों ने अतिरिक्त तेल खरीदना शुरू कर दिया । इस कदम ने मध्य पूर्वी तेल की कीमतों को गिरने से तो बचाया, लेकिन इसने यह भी साबित कर दिया कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति है।
अमेरिका और ईरान के बीच जून के मध्य में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत शत्रुता समाप्त करने और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बनी। यह जलडमरूमध्य मार्च 2026 से प्रभावी रूप से बंद था । इसके बाद कार्गो शिपमेंट फिर से शुरू हो गए, और फारस की खाड़ी में फंसे 6 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल का एक बड़ा बैकलॉग एशियाई बाजारों की ओर रवाना होने को तैयार हो गया
। भौतिक तेल बाजार में तेजी से बदलाव आया - ब्रेंट क्रूड डील से पहले के स्तरों से लगभग 13% गिरकर 22 जून तक लगभग 78.64 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया
।
तेल की कीमतों पर कई आपूर्ति-पक्ष कारकों ने मिलकर दबाव बनाया:
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने, 6 करोड़ बैरल से अधिक के बैकलॉग और ओपेक+ के समन्वित उत्पादन वृद्धि के संयोजन ने क्रूड फ्यूचर्स कर्व को बियरिश कॉन्टैंगो में धकेल दिया - यानी निकट अवधि की कीमतें बाद के अनुबंधों की तुलना में सस्ती हो गईं। यह संरचना तेल के भंडारण को प्रोत्साहित करती है, न कि तत्काल कार्गो खरीदने को। इससे रिफाइनरियों द्वारा स्पॉट खरीद पर और दबाव पड़ा। तेल बाजार के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अचानक आपूर्ति बढ़ गई, जिससे युद्ध के कारण पैदा हुई कमी की भावना बदलकर अधिक आपूर्ति में बदल गई ।
अधिकांश एशियाई खरीदारों ने जून से अगस्त तक आने वाली आपूर्ति के लिए पहले ही कमिटमेंट कर लिए हैं और अब उनके पास पर्याप्त स्टॉक है । ईरानी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट से एशियाई ऑर्डरों में व्यापक वृद्धि की उम्मीद नहीं है - केवल चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियाँ ही ईरानी बैरल की प्रमुख खरीदार होंगी
। मिड-2026 तक रिफाइनरी खरीदारी के व्यवहार के सतर्क और अवसरवादी रहने की उम्मीद है। कॉन्टैंगो संरचना प्रतीक्षा को प्रोत्साहित करती है, इसलिए रिफाइनरियाँ टर्म कमिटमेंट के बजाय डिस्काउंटेड डिफरेंशियल पर स्पॉट कार्गो को प्राथमिकता देंगी।
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एशियाई तेल रिफाइनरियों ने जून 2026 के अंत में तीन सप्ताह की खरीदारी के बाद अचानक मध्य पूर्वी कच्चे तेल की खरीद रोक दी। इसकी वजह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने, अमेरिका ईरान शांति समझौते और ओपेक+ के उत्पादन बढ़ाने...
एशियाई तेल रिफाइनरियों ने जून 2026 के अंत में तीन सप्ताह की खरीदारी के बाद अचानक मध्य पूर्वी कच्चे तेल की खरीद रोक दी। इसकी वजह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने, अमेरिका ईरान शांति समझौते और ओपेक+ के उत्पादन बढ़ाने... शेल और मर्क्यूरिया जैसी बड़ी तेल कंपनियों ने एशियाई खरीदारों के पीछे हटने पर अतिरिक्त तेल खरीदा, जबकि कुवैत और ओपेक+ के उत्पादन वृद्धि और 'बियरिश कॉन्टैंगो' ने स्पॉट खरीद को और कम कर दिया।
मिड 2026 तक रिफाइनरी खरीदारी सतर्क और अवसरवादी रहने की उम्मीद है, जिसमें टर्म कॉमिटमेंट की तुलना में डिस्काउंटेड स्पॉट कार्गो को प्राथमिकता दी जाएगी, और केवल चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियाँ ही ईरानी तेल खरीद सकती हैं।
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