जून 2026 के आखिर में कॉपर की कीमतें गिरकर करीब 6 डॉलर प्रति पाउंड (13,200 डॉलर प्रति मीट्रिक टन) पर आ गईं, जो सात हफ्तों का निचला स्तर है [32][47][50]। गिरावट के पीछे चार प्रमुख कारण हैं: फेड का सख्त रुख और मजबूत डॉलर, चीन में कमजोर मांग, ईरान संघर्ष से पैदा भू राजनीतिक अनिश्चितता, और अमेरिकी टैरिफ को लेकर बाजार में...

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जून 2026 के आखिरी हफ्ते में कॉपर की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। 25 जून तक कॉपर वायदा (फ्यूचर्स) 6 डॉलर प्रति पाउंड (लगभग 13,200 डॉलर प्रति मीट्रिक टन) के आसपास आ गया, जो सात हफ्तों का सबसे निचला स्तर है । इस गिरावट के पीछे कई बड़ी वजहें हैं।
1. फेड का हॉकिश रुख और मजबूत डॉलर
डॉलर इंडेक्स 24 जून को खत्म हुए हफ्ते में करीब 1% बढ़ा । फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन आगे और सख्ती (टाइटनिंग) के संकेत दिए
। इसके चलते लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर की कीमत एक ही दिन में 2.1% तक गिर गई
। 23 जून को भी LME पर कॉपर 1.36% गिरकर 13,463 डॉलर प्रति टन पर आ गया
। मजबूत डॉलर का मतलब है कि दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए कॉपर महंगा हो जाता है, और ऊंची ब्याज दरें वैश्विक विकास की चिंता बढ़ा देती हैं।
2. चीन में कमजोर मांग
चीनी खरीदारों ने सस्ता होने पर कॉपर खरीदा जरूर, लेकिन बड़ी तस्वीर यह है कि दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता चीन में सुस्ती के आसार हैं । ईरान संघर्ष ने मांग को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। J.P. मॉर्गन को उम्मीद है कि सबसे खराब स्थिति में कॉपर 11,100-11,200 डॉलर प्रति टन तक गिर सकता है
।
3. भू-राजनीतिक अनिश्चितता
अमेरिका-ईरान संघर्ष और शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता ने मंदी के खतरे को बढ़ा दिया है, जिससे कॉपर की मांग पर बुरा असर पड़ रहा है । इस युद्ध ने सल्फर की वैश्विक आपूर्ति को भी बाधित किया है, जो कॉपर उत्पादन के लिए जरूरी है
।
4. टैरिफ को लेकर अनिश्चितता
2025 में अमेरिकी आयात शुल्क (टैरिफ) की उम्मीद से जो CME प्रीमियम बना था, वह 2026 की शुरुआत में कम हो गया क्योंकि बाजार ने टैरिफ की संभावना का पुनर्मूल्यांकन किया । इस अनिश्चितता ने व्यापारियों के लिए जोखिम का सही आकलन करना मुश्किल बना दिया है।
मौजूदा 50% टैरिफ
6 अप्रैल 2026 से रिफाइंड कॉपर, कॉपर कैथोड और उससे बने उत्पादों पर 50% का राष्ट्रीय सुरक्षा टैरिफ लागू है । इससे पहले 1 जून के एक आदेश में नियमों में बदलाव किया गया था
।
अहम मोड़
30 जून 2026 वह तारीख है जब अमेरिकी वाणिज्य सचिव को बाजार का आकलन और टैरिफ पर अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को देनी है । उम्मीद है कि समीक्षा में रिफाइंड कॉपर कैथोड पर चरणबद्ध टैरिफ बढ़ोतरी का प्रस्ताव होगा — जो 1 जनवरी 2027 से 15% से शुरू होकर जनवरी 2028 तक 30% तक पहुंच सकता है
। यह कॉपर बाजार के लिए सबसे अहम उत्प्रेरक है
।
क्यों है यह इतना अहम?
जुलाई 2025 में लगाए गए टैरिफ में रिफाइंड कॉपर को जानबूझकर बाहर रखा गया था । यह समीक्षा तय करेगी कि उसे शामिल किया जाए या नहीं और कैसे किया जाए। इस फैसले से अमेरिकी आयात प्रवाह, वैश्विक कॉपर मूल्य अंतर और CME व LME के बीच प्रीमियम में बड़ा बदलाव आ सकता है।
कीमतों में गिरावट के बावजूद, आपूर्ति की स्थिति तंग बनी हुई है। खदानों में उत्पादन बाधित है और AI व डेटा सेंटरों से मांग बढ़ रही है — यही वजह है कि जून के मध्य में कॉपर एक साल पहले की तुलना में 40% ऊपर था । लेकिन अभी बाजार में मैक्रो डर (आर्थिक अनिश्चितता) का भार इन मूलभूत कारकों पर भारी है
।
CME पर LME के मुकाबले प्रीमियम कम हो गया है क्योंकि बाजार अमेरिकी आयात शुल्क की संभावना पर पुनर्विचार कर रहा है। अमेरिका के पास अब काफी भंडार होने के कारण आयात पर निर्भरता का तर्क कमजोर लगता है ।
ह्यूस्टन प्लांट अपनी क्षमता के करीब
चीनी कंपनी झेजियांग हाईलियांग (Zhejiang Hailiang) का ह्यूस्टन में कॉपर ट्यूब और बार का प्लांट अब अपनी अधिकतम उत्पादन क्षमता के करीब पहुंच रहा है । कंपनी ने 2020 में यहां 30,000 टन प्रति वर्ष की क्षमता के साथ उत्पादन शुरू किया था और इसे 2025 तक बढ़ाकर 100,000 टन करने की योजना है
।
सीली, टेक्सास में विस्तार
ह्यूस्टन से 50 मील पश्चिम में सीली, टेक्सास में 150 मिलियन डॉलर की एक अलग सुविधा का दूसरा चरण चल रहा है, जहां और उत्पादन लाइनें जोड़ी जा रही हैं । पूरा होने पर यह 44,000 वर्ग मीटर का औद्योगिक परिसर सालाना 100,000 टन कॉपर का उत्पादन करेगा
।
रणनीति क्या है?
अमेरिका के अंदर उत्पादन करके, हाईलियांग 50% सेक्शन 232 टैरिफ से पूरी तरह बच जाती है। इससे उसे प्रीमियम कीमतें मिलती हैं और वह चीनी निर्यातकों और अमेरिकी प्रतिस्पर्धियों दोनों पर बाजार में बढ़त बना लेती है । यह कंपनी की उस वैश्विक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह इंडोनेशिया से लेकर मोरक्को तक फैली हुई है, जिसका मकसद व्यापार बाधाओं को पार करना है
।
मतलब यह कि
हाईलियांग अमेरिकी टैरिफ नीति से अप्रत्याशित लाभ उठाने वाली कंपनी बन गई है: जो बाधाएं चीनी आयात को नुकसान पहुंचाती हैं, वे चीनी स्वामित्व वाली अमेरिकी उत्पादन क्षमता की प्रतिस्पर्धी स्थिति को मजबूत करती हैं ।
कॉपर बाजार एक तरफ बुलिश (तेजी वाले) आपूर्ति कारकों (खदानों में रुकावट, AI/ग्रिड डिमांड) और दूसरी तरफ बियरिश (मंदी वाले) मैक्रो कारकों (मजबूत डॉलर, फेड की सख्ती, चीन में सुस्ती, टैरिफ अनिश्चितता) के बीच फंसा हुआ है। 30 जून को वाणिज्य विभाग की समीक्षा अगली बड़ी घटना है — रिफाइंड कॉपर पर चरणबद्ध टैरिफ की सिफारिश वैश्विक व्यापार प्रवाह को बदल सकती है और CME-LME के बीच का अंतर फिर से बढ़ा सकती है। हाईलियांग जैसी कंपनियों के कदम बताते हैं कि टैरिफ बाधाएं सिर्फ आयात कम नहीं कर रही हैं, बल्कि विदेशी उत्पादकों को अमेरिका में ही उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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जून 2026 के आखिर में कॉपर की कीमतें गिरकर करीब 6 डॉलर प्रति पाउंड (13,200 डॉलर प्रति मीट्रिक टन) पर आ गईं, जो सात हफ्तों का निचला स्तर है [32][47][50]।
जून 2026 के आखिर में कॉपर की कीमतें गिरकर करीब 6 डॉलर प्रति पाउंड (13,200 डॉलर प्रति मीट्रिक टन) पर आ गईं, जो सात हफ्तों का निचला स्तर है [32][47][50]। गिरावट के पीछे चार प्रमुख कारण हैं: फेड का सख्त रुख और मजबूत डॉलर, चीन में कमजोर मांग, ईरान संघर्ष से पैदा भू राजनीतिक अनिश्चितता, और अमेरिकी टैरिफ को लेकर बाजार में फैली उलझन [32][33][49]।
अब अहम मोड़ 30 जून 2026 का है, जब अमेरिकी वाणिज्य विभाग को रिफाइंड कॉपर पर टैरिफ को लेकर अपनी सिफारिश पेश करनी है। इस फैसले से वैश्विक कॉपर की कीमतों और व्यापार में बड़ा बदलाव आ सकता है [4][7]।
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