यह कैसे काम करता है? रीटक्सिमैब एक 'काइमेरिक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी' है जो B कोशिकाओं पर पाए जाने वाले CD20 प्रोटीन को निशाना बनाता है। ऐसा करके यह B कोशिकाओं को अस्थायी रूप से खत्म कर देता है, जिससे अंडाशय पर होने वाला ऑटोइम्यून हमला (जहां शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही अंडाशय पर हमला करती है) दब जाता है। इससे बचे हुए follicles फिर से हार्मोनल उत्तेजना (gonadotropin stimulation) पर प्रतिक्रिया करने में सक्षम हो जाते हैं ।
नहीं, फिलहाल नहीं। यह एक 'प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट' (प्रमाण-अवधारणा) अध्ययन था। इसका मतलब है कि इसका उद्देश्य केवल यह दिखाना था कि यह विचार काम कर सकता है या नहीं। इस अध्ययन की कुछ महत्वपूर्ण सीमाएं हैं:
इन्हीं सीमाओं को दूर करने के लिए, एक बड़ा और सख्त फेज़ 3 क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो चुका है। इस ट्रायल का नाम है "इम्यूनोमॉड्यूलेटरी थेरेपी टू रिस्टोर ओवेरियन फंक्शन एंड इम्प्रूव फर्टिलिटी इन वीमेन विद ऑटोइम्यून प्रीमेच्योर ओवेरियन इन्सफिशिएंसी" (NCT07509840) ।
यह रैंडमाइज़्ड, डबल-ब्लाइंड, प्लेसीबो-कंट्रोल्ड ट्रायल है, जिसमें 40 महिलाओं को शामिल किया जाएगा। यह इस बात का अधिक निर्णायक प्रमाण देगा कि क्या रीटक्सिमैब वास्तव में ऑटोइम्यून POI के लिए एक प्रभावी उपचार है ।
यह पायलट अध्ययन पहला ऐसा सबूत पेश करता है जो बताता है कि रीटक्सिमैब-आधारित इम्यूनोथेरेपी ऑटोइम्यून POI से पीड़ित कुछ महिलाओं में अस्थायी रूप से प्रजनन क्षमता बहाल कर सकती है। हालांकि, ये परिणाम बेहद प्रारंभिक हैं, और चिकित्सकीय रूप से इसकी सिफारिश करने से पहले चल रहे प्लेसीबो-नियंत्रित परीक्षण के नतीजों का इंतजार करना ज़रूरी है ।
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