यूसी बर्कले के शोधकर्ताओं ने 4.4 लाख ईकेजी पर AI को प्रशिक्षित कर लीड aVL में एक नई R तरंग असामान्यता (स्लर्ड वेव) की पहचान की, जो अचानक हृदयाघात का संकेत देती है [1][11]। यह AI मॉडल सस्ते और आसानी से उपलब्ध 12 लीड ईकेजी पर काम करता है और इसका परीक्षण अमेरिका और ताइवान के मरीजों पर भी सफलतापूर्वक किया जा चुका है [1]...

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हर साल दुनिया भर में लाखों लोग अचानक हृदयगति रुकने (सडन कार्डियक अरेस्ट) से मर जाते हैं। इनमें से कई ऐसे होते हैं जिन्हें पहले से कोई दिल की बीमारी नहीं होती और न ही कोई चेतावनी मिलती है। डॉक्टरों के पास अब तक यह पता लगाने का कोई भरोसेमंद तरीका नहीं था कि आखिर किसे यह खतरा है। लेकिन अब यूसी बर्कले (UC Berkeley) के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एक ऐसा नया संकेत खोज निकाला है जो साधारण ईसीजी (EKG/ECG) में छिपा होता है और जो मौजूदा सभी मानक जांचों से कहीं बेहतर तरीके से इस खतरे को भांप सकता है।
यूसी बर्कले स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के ज़ियाद ओबेरमेयर (Ziad Obermeyer) के नेतृत्व में टीम ने स्वीडन के 4.4 लाख से अधिक 12-लीड ईकेजी पर एक डीप कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क (AI) को प्रशिक्षित किया। इन ईकेजी को मृत्यु प्रमाणपत्रों से जोड़ा गया था ताकि AI यह सीख सके कि हृदय की कौन सी विद्युत गतिविधि अचानक मौत से पहले होती है ।
AI ने एक ऐसा पैटर्न पहचाना जिसे मानव आंखें और हर मानक क्लिनिकल टेस्ट देखने में नाकाम रहे हैं। यह है लीड aVL में R तरंग के अंतिम भाग का धुंधला या अस्पष्ट (slurred) होना। यह एक ऐसी सूक्ष्म विकृति है जिसका चिकित्सा साहित्य में पहले कभी वर्णन नहीं किया गया था ।
यह मॉडल सिर्फ एक नया संकेत ही नहीं ढूंढता, बल्कि वह संकेत मायने भी रखता है। AI द्वारा पहचाने गए उच्च जोखिम वाले समूह में अचानक हृदयाघात से मृत्यु दर सालाना 7.0% थी, जबकि मौजूदा सबसे अच्छे परीक्षण (LVEF) से पहचाने गए उच्च जोखिम वाले मरीजों में यह दर 4.6% थी ।
शोध दल ने एक कठोर प्रक्रिया अपनाई:
हार्ट अटैक (दिल का दौरा) और अचानक हृदयाघात (सडन कार्डियक अरेस्ट) में बड़ा अंतर है। हार्ट अटैक में धमनी ब्लॉक हो जाती है, जिससे हृदय की मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिलती। लेकिन सडन कार्डियक अरेस्ट एक बिजली की खराबी है—दिल का विद्युत प्रवाह बिना किसी चेतावनी के बंद हो जाता है ।
लोग इतनी जल्दी मर जाते हैं कि मौत से ठीक पहले दिल क्या कर रहा था, इसका अध्ययन करना लगभग असंभव है। शव परीक्षण से संरचनात्मक समस्याएं (ब्लॉक नसें, जख्मी ऊतक) तो पता चल सकती हैं, लेकिन जैसा कि शोधकर्ताओं ने कहा, "मौत से पहले का वास्तविक कामकाज एक काला बक्सा (ब्लैक बॉक्स) बना हुआ है" ।
वर्तमान में सबसे भरोसेमंद जोखिम परीक्षण—लेफ्ट वेंट्रिकुलर इजेक्शन फ्रैक्शन (LVEF)—एक बहुत ही मोटा उपकरण है। यह मापता है कि दिल प्रति धड़कन कितने प्रतिशत खून पंप करता है। समस्या यह है कि कई मरीज जिनकी अचानक मौत होती है, उनका LVEF सामान्य होता है, और कई ऐसे भी होते हैं जिनका LVEF बहुत कम है लेकिन वे कभी अरेस्ट का शिकार नहीं होते । मौजूदा तरीका उन लोगों का पता लगाने में विफल रहता है जिन्हें वास्तव में मदद की ज़रूरत है।
| पैमाना | मानक LVEF परीक्षण | AI मॉडल (उच्च जोखिम समूह) |
|---|---|---|
| उच्च जोखिम समूह में वार्षिक मृत्यु दर | 4.6% | 7.0% |
| LVEF के साथ ओवरलैप | — | AI द्वारा चिह्नित अधिकांश मरीजों का इजेक्शन फ्रैक्शन सामान्य था—यानी AI ने एक स्वतंत्र जोखिम संकेत खोजा |
| नई तरंग (वेवफॉर्म) | कोई नहीं | लीड aVL में स्लर्ड टर्मिनल R वेव, जिसका पहले कभी वर्णन नहीं हुआ |
AI ने एक ऐसे उच्च जोखिम समूह की पहचान की जो जांच की गई आबादी का लगभग 2.2% है। इस समूह में 7.0% की वार्षिक मृत्यु दर उस जोखिम स्तर के बराबर या उससे बेहतर है जिसके आधार पर इम्प्लांटेबल डिफिब्रिलेटर (ICD) लगाने के क्लिनिकल ट्रायल चलते हैं। इसका मतलब है कि मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत जिन मरीजों पर ध्यान नहीं जाता, वे जीवन रक्षक डिवाइस के लिए उम्मीदवार हो सकते हैं ।
इस शोध ने आगे के लिए तीन स्पष्ट रास्ते बताए हैं:
डिफिब्रिलेटर निर्णयों में मदद: ईकेजी सस्ता, गैर-आक्रामक और दुनिया भर के लगभग हर क्लिनिक में उपलब्ध है। यह AI मॉडल डॉक्टरों को यह तय करने में मदद कर सकता है कि किस मरीज के सीने में एक इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर-डिफिब्रिलेटर (ICD) लगाने की जरूरत है। ओबेरमेयर ने कहा, "अगर आपको पता होता कि आप उन लोगों में से हैं जो अचानक गिर जाएंगे, तो आप एक कार्डियोलॉजिस्ट के पास जाते और डिफिब्रिलेटर लगवा लेते। समस्या यह है कि डॉक्टर यह पता नहीं लगा पाते कि बहुत देर होने से पहले किसे इसकी ज़रूरत है" ।
नई शारीरिक समझ: AI ने जो नई तरंग खोजी—बिना यह बताए कि क्या देखना है—वह शोध की एक नई दिशा खोलती है। लीड aVL में इस असामान्यता के पीछे के सटीक विद्युत तंत्र को समझना यह बता सकता है कि आखिर कुछ दिल अचानक क्यों फेल हो जाते हैं। ओबेरमेयर ने कहा, "हम न सिर्फ बेहतर निर्णय ले सकते हैं, बल्कि यह भी समझना शुरू कर सकते हैं कि दिल रुकने से पहले इन मरीजों के साथ वास्तव में क्या हो रहा है" ।
व्यापक उपयोग से पहले प्रॉस्पेक्टिव ट्रायल: हालांकि तीन देशों में मॉडल का सफल परीक्षण एक मजबूत सबूत है, लेकिन नियमित क्लिनिकल प्रैक्टिस में आने से पहले इसका संभावित (प्रॉस्पेक्टिव) क्लिनिकल परीक्षणों में परीक्षण किया जाना जरूरी है। शोध दल के काम ने एक ऐसी कठोर और क्रॉस-पॉपुलेशन वैलिडेशन का उदाहरण पेश किया है जो इस खोज को विशेष रूप से आशाजनक बनाता है ।
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यूसी बर्कले के शोधकर्ताओं ने 4.4 लाख ईकेजी पर AI को प्रशिक्षित कर लीड aVL में एक नई R तरंग असामान्यता (स्लर्ड वेव) की पहचान की, जो अचानक हृदयाघात का संकेत देती है [1][11]।
यूसी बर्कले के शोधकर्ताओं ने 4.4 लाख ईकेजी पर AI को प्रशिक्षित कर लीड aVL में एक नई R तरंग असामान्यता (स्लर्ड वेव) की पहचान की, जो अचानक हृदयाघात का संकेत देती है [1][11]। यह AI मॉडल सस्ते और आसानी से उपलब्ध 12 लीड ईकेजी पर काम करता है और इसका परीक्षण अमेरिका और ताइवान के मरीजों पर भी सफलतापूर्वक किया जा चुका है [1]।
AI द्वारा पहचाने गए उच्च जोखिम वाले अधिकांश मरीजों का इजेक्शन फ्रैक्शन (LVEF) सामान्य था, यानी यह मॉडल मौजूदा जांचों से बिल्कुल अलग और स्वतंत्र जोखिम संकेत खोजता है [2]।
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