यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि ये हमले युद्ध को समाप्त करने और बातचीत के लिए दबाव बनाने के लिए किए गए, और चेतावनी दी कि "यदि पुतिन युद्ध जारी रखते हैं, तो मास्को जल जाएगा" । दिलचस्प बात यह है कि पुतिन ने इस विशिष्ट हमले पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की, क्योंकि वह उस समय कज़ान शहर में दक्षिण-पूर्व एशियाई नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे थे
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पांच दिन बाद, 23 जून 2026 को, पुतिन ने सैन्य स्नातकों के साथ एक अनौपचारिक बैठक में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि यूरोपीय देशों की धरती से रूसी सुविधाओं को निशाना बनाने वाले ड्रोन लॉन्च किए गए, तो रूस इन देशों के खिलाफ जवाबी हमले करेगा ।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुतिन ने कहा, "वे समझते हैं कि एक जवाबी हमला होगा। मुझे लगता है कि हर कोई इसे समझता है, या समझना चाहिए। इसलिए वे हर संभव तरीके से इससे दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं" । यह चेतावनी रूस के रुख में एक महत्वपूर्ण बदलाव था, जो सामान्य परमाणु आक्रामकता की बात से हटकर एक विशेष शर्त के तहत यूरोपीय धरती पर हमले की धमकी देने लगा था।
पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने 24 जून 2026 को तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुतिन की रणनीति की तुलना 1939 की ग्लीविट्ज़ घटना से की - यह नाज़ी जर्मनी का एक कुख्यात झूठा झंडा (फॉल्स फ्लैग) ऑपरेशन था, जिसमें एसएस सैनिकों ने पोलिश वर्दी पहनकर जर्मन रेडियो स्टेशन पर हमला करने का नाटक किया था। इस नाटकीय घटना का इस्तेमाल हिटलर ने पोलैंड पर आक्रमण करने और द्वितीय विश्व युद्ध शुरू करने के बहाने के रूप में किया था ।
सिकोरस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि उन्हें "रूसी धरती पर एक झूठे झंडे के हमले" की उम्मीद है, जो रूस को पश्चिम के खिलाफ और अधिक आक्रामकता का बहाना दे सकता है । उन्होंने पुतिन की चेतावनी को "एक उकसावे की घोषणा" कहा और इसे द्वितीय विश्व युद्ध से पहले नाज़ियों की उसी रणनीति के समान बताया, जिसमें एक मंचित घटना को युद्ध का कारण बनाया गया था
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ग्लीविट्ज़ घटना, जिसे नूर्नबर्ग अंतर्राष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण ने एक मंचित एसएस ऑपरेशन पाया था, का उल्लेख करके सिकोरस्की यह संदेश देना चाहते थे कि पुतिन की जवाबी कार्रवाई की धमकी वास्तव में नाटो सदस्य पर हमला करने के लिए रूस द्वारा उकसाए गए किसी घटना का बहाना हो सकती है।
पुतिन की यूरोप को शर्त-आधारित चेतावनी रूसी सैन्य सिद्धांत में एक बदलाव का संकेत है, जो सामान्य परमाणु चेतावनियों से हटकर विशिष्ट परिचालन धमकियों की ओर बढ़ रहा है। वहीं, पोलैंड का ग्लीविट्ज़ घटना का उदाहरण यह दर्शाता है कि वारसॉ क्रेमलिन के रुख को एक मंचित उकसावे की तैयारी के रूप में देखता है - एक ऐसा दांवपेंच जो सीधे नाज़ी प्लेबुक से लिया गया लगता है। रूस और नाटो के बीच सीधे टकराव का जोखिम, भले ही यह किसी नकली घटना से शुरू हो, यूरोपीय सुरक्षा के लिए एक केंद्रीय चिंता बन गया है।
जून 2026 तक, यूक्रेन में युद्ध एक ऐसे चरण में प्रवेश कर चुका है जहां रूसी धरती पर ड्रोन हमले और यूरोपीय देशों के खिलाफ जवाबी धमकियां अब केवल काल्पनिक नहीं, बल्कि वास्तविकता हैं। आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक और सैन्य प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि यह बढ़ता तनाव एक बड़े संघर्ष में बदलता है या प्रतिरोध के माध्यम से स्थिर होता है।