8 जून 2026 को पेंटागन ने अपनी सेक्शन 1260H लिस्ट का अपडेट जारी किया, जिसमें चीनी संस्थाओं की संख्या बढ़ाकर 188 कर दी गई, जो जनवरी 2025 में 134 थी । इस सूची में अलीबाबा, बाइडू, बीवाईडी, निओ, यूनिट्री रोबोटिक्स और वूशी एपटेक जैसी प्रमुख कंपनियों को शामिल किया गया
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ब्लैकलिस्ट का क्या मतलब है: वित्तीय वर्ष 2024 के राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (NDAA) की धारा 805 के तहत, 30 जून 2026 से पेंटागन इन नामित कंपनियों से सीधे उत्पाद या सेवाएं नहीं खरीद सकेगा । हालांकि यह सूची अपने आप में कोई निवेश प्रतिबंध नहीं लगाती, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कंपनियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है और भविष्य में अमेरिकी निवेश प्रतिबंध लगने की आशंका बढ़ जाती है
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इस सूची का विस्तार ऐसे समय में हुआ जब ट्रंप-शी शिखर वार्ता के बाद द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के प्रयास चल रहे थे, जिससे यह नाजुक कूटनीतिक सुलह के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया ।
अलीबाबा ने अपने मुकदमे में तर्क दिया है कि पेंटागन का यह फैसला "मनमाना", "निराधार" है और इसका "तथ्यों या कानून में कोई आधार नहीं है" । कंपनी का दावा है कि वह एक निजी वाणिज्यिक उद्यम है और उसका चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) से कोई संबंध नहीं है। साथ ही, कंपनी का आरोप है कि पेंटागन ने यह लेबल लगाने से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया
। अलीबाबा ने चेतावनी दी है कि इस ब्लैकलिस्ट से उसके व्यापार और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है
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पेंटागन का तर्क है कि अलीबाबा का चीनी कानूनों, खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा सुरक्षा कानूनों का अनुपालन, उसे बीजिंग की सैन्य-नागरिक संलयन (military-civil fusion) रणनीति का एक उपकरण बनाता है ।
यह पेंटागन की ब्लैकलिस्ट के खिलाफ चीन की अब तक की सबसे व्यापक जवाबी कार्रवाई थी, जिसका निशाना अमेरिकी दुर्लभ मृदा आपूर्ति श्रृंखला और रक्षा औद्योगिक आधार था ।
बाजार की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत नरम रही। मुकदमा दाखिल होने के दिन अलीबाबा के अमेरिकी शेयरों (BABA) में लगभग 0.30% की गिरावट आई । इसके विपरीत, फरवरी 2026 में, जब पेंटागन ने इसी तरह की एक सूची को संक्षिप्त रूप से प्रकाशित और फिर वापस ले लिया था, तब अलीबाबा के हॉन्ग कॉन्ग में सूचीबद्ध शेयरों में एक ही सत्र में 3% से अधिक की गिरावट आई थी, जिससे चीनी टेक शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई थी
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जून में सीमित बिकवाली से पता चलता है कि पिछले दो हफ्तों में निवेशक पहले ही इस ब्लैकलिस्ट के असर को अपने दामों में शामिल कर चुके थे। साथ ही, निवेशक इस मुकदमे को अचानक एक नए सिरे से बढ़े तनाव के बजाय एक प्रक्रियात्मक चुनौती के रूप में देख रहे हैं । हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस ब्लैकलिस्ट से भविष्य में अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत निवेश प्रतिबंध लगने का खतरा बना हुआ है, जो लंबी अवधि में अलीबाबा के मूल्यांकन पर भारी पड़ सकता है
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