लिबर इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन डेवलपमेंट के शोधकर्ताओं ने एक नई कंप्यूटेशनल विधि विकसित की, जिससे सिज़ोफ्रेनिया से जुड़े 641 पहले से अनदेखे जीनों की पहचान हुई। यह अध्ययन 22 जून 2026 को नेचर जेनेटिक्स में प्रकाशित हुआ। इस अध्ययन में 1,02,000 से अधिक व्यक्तियों के आनुवंशिक डेटा और सैकड़ों दानदाताओं के मस्तिष्क ऊतकों के नम...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for What did researchers discover about schizophrenia genetics by using a new gene-network approach,. Article summary: Here are the key findings from the latest research, published in *Nature Genetics* on June 22, 2026.. Topic tags: general, government, academic, general web, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thumbnails, icons, and tiny thumbnail layouts. Make it useful as an illustrative v
दशकों तक, सिज़ोफ्रेनिया आनुवंशिकी का अध्ययन एक सीमित दायरे में ही होता रहा—जहाँ पहले से ज्ञात डीएनए निशानों के आसपास ही जोखिम जीनों की तलाश की जाती थी। 22 जून, 2026 को नेचर जेनेटिक्स में प्रकाशित एक क्रांतिकारी अध्ययन ने इस सीमा को तोड़ते हुए सिज़ोफ्रेनिया से जुड़े 641 पहले से अज्ञात जीनों की खोज की, जो लंबी दूरी पर जीनों के बीच होने वाले संचार को मैप करके किया गया ।
लिबर इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन डेवलपमेंट के नेतृत्व में, बारी विश्वविद्यालय (इटली) और दुनिया भर के 60 से अधिक मनोरोग अस्पतालों के सहयोग से, एक नई कंप्यूटेशनल विधि विकसित की गई है जो अलग-अलग जीनों से परे देखकर यह मैप करती है कि जीनों के नेटवर्क पूरे मस्तिष्क में कैसे संवाद करते हैं । पारंपरिक जीनोम-वाइड असोसिएशन स्टडीज (GWAS) केवल उन आनुवंशिक वेरिएंट्स की जांच करती हैं जो ज्ञात जीनों के तत्काल आसपास होते हैं। नई विधि लॉन्ग-रेंज को-एक्सप्रेशन नेटवर्किंग का उपयोग करके दूर स्थित आनुवंशिक तत्वों के बीच नियामक संबंधों को पकड़ती है—ठीक वैसे ही जैसे सोशल नेटवर्क उन लोगों को जोड़ते हैं जो एक-दूसरे के पड़ोसी नहीं होते
।
इस विश्लेषण का पैमाना बहुत बड़ा था: टीम ने 1,02,000 से अधिक व्यक्तियों के आनुवंशिक डेटा और छह अलग-अलग मस्तिष्क क्षेत्रों के सैकड़ों दानदाताओं के मस्तिष्क ऊतकों के नमूनों का विश्लेषण किया । यह मैप बनाकर कि कौन से जीन इन क्षेत्रों में एक साथ अभिव्यक्त होते हैं (को-एक्सप्रेस होते हैं), यह विधि उन संकेतों को भी पकड़ सकी जो मानक दृष्टिकोण पूरी तरह से चूक गए थे
।
शोधकर्ताओं ने पिछले दृष्टिकोण को "लैम्पपोस्ट के नीचे रोशनी ढूंढना" बताया । एक जीन का अधिकांश नियामक प्रभाव गुणसूत्र पर उससे दूर स्थित लॉन्ग-डिस्टेंस वेरिएंट से आता है। मानक GWAS उपकरण केवल ज्ञात जीनों के तत्काल पड़ोस को स्कैन करते हैं, इन दूरस्थ लेकिन महत्वपूर्ण नियामक कनेक्शनों को अनदेखा करते हैं
।
नई विधि इन लंबी दूरी के नियामक संबंधों को पकड़ती है, जिससे 641 नए उम्मीदवार जीनों का पता लगाना संभव हुआ, जो मानक विश्लेषणों में अदृश्य थे ।
यह समझने के लिए कि यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है, यह देखना ज़रूरी है कि यह क्षेत्र कैसे विकसित हुआ:
GWAS युग (2000-2020): साइकियाट्रिक जीनोमिक्स कंसोर्टियम जैसे बड़े संगठनों ने सिज़ोफ्रेनिया से जुड़े 108 विशिष्ट आनुवंशिक लोकी (loci) की पहचान की और इसे एक अत्यधिक पॉलीजेनिक विकार के रूप में स्थापित किया जिसमें छोटे प्रभाव वाले सामान्य वेरिएंट और दुर्लभ कॉपी नंबर वेरिएंट दोनों शामिल हैं । ये निष्कर्ष एक महत्वपूर्ण पहला कदम थे, लेकिन ये सांख्यिकीय संकेत थे—न कि कारण जीन या यह स्पष्टीकरण कि जीन एक साथ कैसे काम करते हैं
।
प्रारंभिक नेटवर्क दृष्टिकोण (2010-2024): पिछले शोध में सिज़ोफ्रेनिया से जुड़े जीन मॉड्यूल खोजने के लिए को-एक्सप्रेशन नेटवर्क और प्रोटीन-इंटरैक्शन नेटवर्क का उपयोग किया गया था । लिबर इंस्टीट्यूट ने स्वयं पहले दिखाया था कि सिज़ोफ्रेनिया के जोखिम जीनों को बीमारी पैदा करने के लिए लगभग 20 अन्य जीनों के साथ साझेदारी करनी होती है
, और यह कि आस-पास के जीन गिल्ट-बाय-एसोसिएशन प्रभावों के माध्यम से अपना स्वयं का जोखिम वहन करते हैं
। लेकिन ये पिछले प्रयास काफी हद तक छोटी दूरी के जीनोमिक इंटरैक्शन तक ही सीमित थे
।
नई प्रगति: कई मस्तिष्क क्षेत्रों में लॉन्ग-रेंज को-एक्सप्रेशन नेटवर्क को मॉडल करके, नई विधि ने सांख्यिकीय GWAS "हिट्स" को समन्वित जीन कार्यक्रमों के एक कार्यात्मक मानचित्र में बदल दिया । इससे 641 नए उम्मीदवार जीन और विशिष्ट जैविक मार्ग सामने आए: ग्लूटामेट सिग्नलिंग, सिनैप्टिक संचार, प्रतिरक्षा प्रक्रियाएं और मस्तिष्क विकास
।
ये निष्कर्ष क्षेत्र को निर्णायक रूप से नेटवर्क-आधारित सटीक चिकित्सा की ओर ले जाते हैं। सिज़ोफ्रेनिया को एक या कुछ जीनों के कारण होने वाली एक ही बीमारी के रूप में मानने के बजाय, परिणाम बताते हैं कि अलग-अलग रोगियों में अलग-अलग जीन-नेटवर्क उप-कार्यक्रमों में व्यवधान हो सकता है। उपचारों को अंततः किसी व्यक्ति के विशिष्ट नेटवर्क प्रोफ़ाइल के अनुरूप बनाया जा सकता है ।
जैसा कि लिबर इंस्टीट्यूट के सीईओ डॉ. डैनियल वेनबर्गर ने कहा: "इन समन्वित आनुवंशिक कार्यक्रमों को समझना हमें सटीक मनोचिकित्सा के करीब लाता है, जहाँ उपचारों को किसी व्यक्ति के विशिष्ट जैविक प्रोफ़ाइल के अनुरूप बनाया जा सकता है" ।
पहचाने गए मार्ग—विशेष रूप से ग्लूटामेट सिग्नलिंग और सिनैप्टिक फ़ंक्शन—दवाओं के नए वर्गों को विकसित करने के लिए ठोस आणविक लक्ष्यों की ओर भी इशारा करते हैं । यह क्षेत्र में समानांतर खोजों के अनुरूप है, जिसमें कमजोर सांख्यिकीय संकेतों से जोखिम जीन की पहचान करने की नई तकनीकें
और ZNF136 और STAG1 जैसे दुर्लभ जीन उत्परिवर्तन सिज़ोफ्रेनिया जोखिम को कैसे बढ़ाते हैं, की खोज शामिल है
।
यह नेटवर्क-आधारित दृष्टिकोण मनोरोग आनुवंशिकी में एक व्यापक बदलाव का हिस्सा है। साथ ही, शोधकर्ता यह समझने के लिए 3D क्रोमैटिन मैपिंग का उपयोग कर रहे हैं कि दूर के नियामक तत्व जीन अभिव्यक्ति को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक रूप से कैसे जुड़ते हैं । लिबर इंस्टीट्यूट की यह सफलता एक रोड मैप प्रदान करती है: आनुवंशिक जोखिम कारकों की एक सूची को रोग के एक कार्यात्मक सर्किट आरेख में बदलना—और अंततः, व्यक्तिगत रोगियों के लिए वैयक्तिकृत उपचारों में बदलना।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
लिबर इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन डेवलपमेंट के शोधकर्ताओं ने एक नई कंप्यूटेशनल विधि विकसित की, जिससे सिज़ोफ्रेनिया से जुड़े 641 पहले से अनदेखे जीनों की पहचान हुई। यह अध्ययन 22 जून 2026 को नेचर जेनेटिक्स में प्रकाशित हुआ।
लिबर इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन डेवलपमेंट के शोधकर्ताओं ने एक नई कंप्यूटेशनल विधि विकसित की, जिससे सिज़ोफ्रेनिया से जुड़े 641 पहले से अनदेखे जीनों की पहचान हुई। यह अध्ययन 22 जून 2026 को नेचर जेनेटिक्स में प्रकाशित हुआ। इस अध्ययन में 1,02,000 से अधिक व्यक्तियों के आनुवंशिक डेटा और सैकड़ों दानदाताओं के मस्तिष्क ऊतकों के नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिससे ग्लूटामेट सिग्नलिंग, सिनैप्टिक संचार और मस्तिष्क विकास जैसे विशिष्ट जैविक मार्गों...
यह खोज पिछले आनुवंशिक अध्ययनों पर आधारित है, जिन्होंने 108 आनुवंशिक लोकी (loci) की पहचान तो की थी, लेकिन यह नहीं बता पाए थे कि जीन आपस में कैसे काम करते हैं। नई विधि ने इन सांख्यिकीय संकेतों को एक कार्यात्मक जीन नेटवर...