राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान 23 जून को एक दिवसीय राजकीय यात्रा पर इस्लामाबाद पहुंचे - 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल हमलों के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा थी । उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और वरिष्ठ सैन्य नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की । इस यात्रा को पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका के लिए आभार व्यक्त करने के रूप में देखा गया। पेज़ेश्कियान ने सार्वजनिक रूप से शरीफ को पाकिस्तान की "ताकत और समर्थन" के लिए धन्यवाद दिया और इस्लामाबाद को अपने प्रयासों में "ईमानदार और अडिग" बताया ।
पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट किया कि ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम किसी भी बातचीत का विषय नहीं होगा। संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा: "अगर हमारे पास अपनी रक्षा के लिए मिसाइलें नहीं होतीं, तो इज़राइल और अमेरिका ईरान को एक और गाज़ा बना देते" । उन्होंने और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ दोनों ने पुष्टि की कि मिसाइल कार्यक्रम कभी भी इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का हिस्सा नहीं था । शरीफ ने कहा कि दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए: "कुछ देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं, लेकिन ईरान के पास नहीं?" ।
पाकिस्तान ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने स्विट्जरलैंड में व्यक्तिगत रूप से बातचीत करवाई । समझौता ज्ञापन को औपचारिक रूप से इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (Islamabad Memorandum of Understanding) नाम दिया गया, जो पाकिस्तान की भूमिका को मान्यता देता है । पेज़ेश्कियान ने इस्लामाबाद की ईमानदारी और निरंतरता की सराहना की, और शरीफ ने वादा किया कि पाकिस्तान "शाश्वत शांति" प्राप्त होने तक मध्यस्थता जारी रखेगा ।
इस समझौता ज्ञापन पर 17 जून, 2026 को फ्रांस के वर्साय में राष्ट्रपति ट्रंप और पेज़ेश्कियान ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए । यह एक स्थायी शांति संधि की दिशा में 60 दिनों की अंतरिम रूपरेखा तैयार करता है । मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद यह एक बड़ा विवाद बन गया। अमेरिकी पक्ष (उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और दूत स्टीव विटकॉफ द्वारा) का कहना था कि ईरान IAEA निरीक्षकों को पूर्ण पहुंच देने पर सहमत हुआ है, जिसमें अमेरिका और इज़राइल द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थल भी शामिल हैं । हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान बमबारी वाले स्थलों पर निरीक्षकों को जाने की अनुमति नहीं देगा, सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए । 23 जून तक, यह एक खुला विवाद था जो पूरी शांति प्रक्रिया पर बादल बन गया था, और राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जोर दिया कि ईरान दीर्घकालिक निरीक्षण के लिए सहमत हुआ था ।
समझौता ज्ञापन अंतरिम रूपरेखा को अंतिम, स्थायी शांति संधि में बदलने के लिए वार्ताकारों को 60 दिनों की समयसीमा (17 जून से शुरू) देता है । दोनों पक्षों की तकनीकी टीमों ने तुरंत स्विट्जरलैंड में काम शुरू कर दिया । अंतिम समझौते के लिए मुख्य विषयों में प्रतिबंधों में राहत, परमाणु कार्यक्रम की निगरानी और सामान्यीकरण शामिल हैं । ट्रंप ने बातचीत के विफल होने पर सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने का विकल्प खुला रखा है ।
23-24 जून तक, कई चुनौतियों ने इस प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया था:
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान की पाकिस्तान यात्रा ने कूटनीतिक सफलता और समझौते की नाजुक स्थिति दोनों को रेखांकित किया। 60 दिनों की घड़ी टिक रही है और मूलभूत मतभेद पहले से ही खुले हैं, ऐसे में स्थायी शांति का रास्ता अनिश्चित बना हुआ है।
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान 23 जून को एक दिवसीय राजकीय यात्रा पर इस्लामाबाद पहुंचे - 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल हमलों के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा थी । उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और वरिष्ठ सैन्य नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की । इस यात्रा को पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका के लिए आभार व्यक्त करने के रूप में देखा गया। पेज़ेश्कियान ने सार्वजनिक रूप से शरीफ को पाकिस्तान की "ताकत और समर्थन" के लिए धन्यवाद दिया और इस्लामाबाद को अपने प्रयासों में "ईमानदार और अडिग" बताया ।
पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट किया कि ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम किसी भी बातचीत का विषय नहीं होगा। संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा: "अगर हमारे पास अपनी रक्षा के लिए मिसाइलें नहीं होतीं, तो इज़राइल और अमेरिका ईरान को एक और गाज़ा बना देते" । उन्होंने और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ दोनों ने पुष्टि की कि मिसाइल कार्यक्रम कभी भी इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का हिस्सा नहीं था । शरीफ ने कहा कि दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए: "कुछ देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं, लेकिन ईरान के पास नहीं?" ।
पाकिस्तान ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने स्विट्जरलैंड में व्यक्तिगत रूप से बातचीत करवाई । समझौता ज्ञापन को औपचारिक रूप से इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (Islamabad Memorandum of Understanding) नाम दिया गया, जो पाकिस्तान की भूमिका को मान्यता देता है । पेज़ेश्कियान ने इस्लामाबाद की ईमानदारी और निरंतरता की सराहना की, और शरीफ ने वादा किया कि पाकिस्तान "शाश्वत शांति" प्राप्त होने तक मध्यस्थता जारी रखेगा ।
इस समझौता ज्ञापन पर 17 जून, 2026 को फ्रांस के वर्साय में राष्ट्रपति ट्रंप और पेज़ेश्कियान ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए । यह एक स्थायी शांति संधि की दिशा में 60 दिनों की अंतरिम रूपरेखा तैयार करता है । मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद यह एक बड़ा विवाद बन गया। अमेरिकी पक्ष (उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और दूत स्टीव विटकॉफ द्वारा) का कहना था कि ईरान IAEA निरीक्षकों को पूर्ण पहुंच देने पर सहमत हुआ है, जिसमें अमेरिका और इज़राइल द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थल भी शामिल हैं । हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान बमबारी वाले स्थलों पर निरीक्षकों को जाने की अनुमति नहीं देगा, सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए । 23 जून तक, यह एक खुला विवाद था जो पूरी शांति प्रक्रिया पर बादल बन गया था, और राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जोर दिया कि ईरान दीर्घकालिक निरीक्षण के लिए सहमत हुआ था ।
समझौता ज्ञापन अंतरिम रूपरेखा को अंतिम, स्थायी शांति संधि में बदलने के लिए वार्ताकारों को 60 दिनों की समयसीमा (17 जून से शुरू) देता है । दोनों पक्षों की तकनीकी टीमों ने तुरंत स्विट्जरलैंड में काम शुरू कर दिया । अंतिम समझौते के लिए मुख्य विषयों में प्रतिबंधों में राहत, परमाणु कार्यक्रम की निगरानी और सामान्यीकरण शामिल हैं । ट्रंप ने बातचीत के विफल होने पर सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने का विकल्प खुला रखा है ।
23-24 जून तक, कई चुनौतियों ने इस प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया था:
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान की पाकिस्तान यात्रा ने कूटनीतिक सफलता और समझौते की नाजुक स्थिति दोनों को रेखांकित किया। 60 दिनों की घड़ी टिक रही है और मूलभूत मतभेद पहले से ही खुले हैं, ऐसे में स्थायी शांति का रास्ता अनिश्चित बना हुआ है।