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द गार्जियन (The Guardian) की 21 जून 2026 को प्रकाशित एक चौंकाने वाली जांच से पता चला है कि बड़े-बड़े ब्रांड सोशल मीडिया पर अपने प्रोडक्ट्स के प्रचार के लिए AI जनरेटेड इन्फ्लुएंसर्स (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बने प्रभावशाली लोगों) का इस्तेमाल कर रहे हैं, बिना इस बात का कोई स्पष्ट संकेत दिए कि ये लोग असली नहीं हैं । यह रिपोर्ट एक बड़ी पारदर्शिता (transparency) की कमी को उजागर करती है, जो ब्रिटेन में बिल्कुल भी नियम न होने से लेकर अमेरिका में सख्त कार्रवाई और यूरोपीय संघ (EU) में आने वाले नए कानून तक फैली हुई है — जबकि दूसरी तरफ बाजार फिर से असली मानवीय क्रिएटर्स (रचनाकारों) की ओर लौट रहा है।
ब्रिटेन (UK): यहां AI-जनरेटेड विज्ञापन सामग्री के खुलासे के लिए कोई विशेष नियम नहीं हैं, और आने वाला EU AI एक्ट यहां लागू नहीं होगा । ब्रिटेन की विज्ञापन मानक प्राधिकरण (ASA) ने पुष्टि की है कि उसके नियमों में ब्रांड्स को AI इन्फ्लुएंसर्स पर लेबल लगाने के लिए मजबूर करने वाला कुछ भी नहीं है
।
यूरोपीय संघ (EU): EU आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्ट, विशेष रूप से इसका आर्टिकल 50, 2 अगस्त 2026 से पूरी तरह लागू हो जाएगा । यह कानून AI से बनी या बदली गई सामग्री (जैसे डीपफेक) पर मशीन-पठनीय और मानव-पठनीय दोनों रूपों में स्पष्ट लेबल लगाने को अनिवार्य करता है। AI सिस्टम प्रदाताओं को सिंथेटिक आउटपुट को चिह्नित करना होगा, और ब्रांड एवं एजेंसियों सहित तैनात करने वालों को इसका अनुपालन सुनिश्चित करना होगा
।
अमेरिका (US): FTC (फेडरल ट्रेड कमीशन) 2024 से लगातार कार्रवाई तेज कर रहा है । मुख्य बिंदु:
राज्य स्तर पर, न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और टेक्सास ने संघीय मानकों से परे खुलासे की आवश्यकताएं जोड़ी हैं। न्यूयॉर्क का सिंथेटिक-परफॉर्मर डिस्क्लोज़र कानून 9 जून 2026 से लागू हुआ; कैलिफोर्निया का SB 942 और टेनेसी का ELVIS एक्ट वॉयस-क्लोनिंग और उत्पत्ति (provenance) के नियम जोड़ते हैं ।
FTC अब गैर-खुलासा किए गए AI-जनरेटेड कंटेंट को भौतिक गलत बयानी (material misrepresentation) का एक रूप मानता है जब उपभोक्ता सामान्य रूप से कंटेंट को मानव-निर्मित होने की उम्मीद करते हैं ।
जहां ब्रांड चुपके से सिंथेटिक इन्फ्लुएंसर्स के साथ प्रयोग कर रहे हैं, वहीं बड़ा बाजार विपरीत दिशा में आगे बढ़ रहा है:
यह पैटर्न स्पष्ट है: जहां कुछ ब्रांड गैर-प्रकटीकरण समझौतों के तहत AI-जनरेटेड इन्फ्लुएंसर्स की लागत बचत का पीछा कर रहे हैं, वहीं नियामक जमीन उनके नीचे से खिसक रही है, और बाजार का भरोसे का प्रीमियम मानवीय प्रामाणिकता की ओर वापस बह रहा है।
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द गार्जियन की जांच में पाया गया कि ब्रांड सोशल मीडिया पर प्रोडक्ट प्रमोशन के लिए AI जनरेटेड इन्फ्लुएंसर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह बताने की कोई कानूनी मजबूरी नहीं है कि वे असली इंसान नहीं हैं। कुछ क्रिए...
द गार्जियन की जांच में पाया गया कि ब्रांड सोशल मीडिया पर प्रोडक्ट प्रमोशन के लिए AI जनरेटेड इन्फ्लुएंसर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह बताने की कोई कानूनी मजबूरी नहीं है कि वे असली इंसान नहीं हैं। कुछ क्रिए... अगस्त 2026 से EU AI एक्ट के आर्टिकल 50 के तहत AI कंटेंट पर लेबल (लेबल) लगाना अनिवार्य हो जाएगा, जबकि US में FTC (फेडरल ट्रेड कमीशन) हर उल्लंघन पर $53,088 (लगभग 44 लाख रुपये) का जुर्माना लगा रहा है। [2][5][6]
इस AI ट्रेंड के बावजूद, 2026 में क्रिएटर कंटेंट पर खर्च 44 बिलियन डॉलर (करीब 3.7 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है और ब्रांड अब 'गड़बड़' और प्रामाणिक (authentic) मानवीय क्रिएटर्स की तरफ लौट रहे हैं, क्योंकि AI कंटेंट प...
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