यूरोपीय ऑटोमेकर्स की बात करें तो उनकी प्रतिक्रिया अलग रही। शुक्रवार, 19 जून को, इस खबर के सामने आने के बाद BMW और Mercedes-Benz के शेयरों में मामूली बढ़त देखी गई। UBS के विश्लेषक पैट्रिक हम्मेल ने हाइब्रिड टैरिफ की खबर को यूरोपीय प्रीमियम ऑटोमेकर्स के लिए "थोड़ा सकारात्मक" बताया, क्योंकि इससे प्रतिस्पर्धा का मैदान समतल होता है ।
30 अक्टूबर, 2024 से, EU ने चीन में निर्मित BEVs पर मानक 10% कार आयात शुल्क के अतिरिक्त निश्चित काउंटरवेलिंग ड्यूटी (countervailing duties) लागू कर दी थी । ये दरें निर्माता के अनुसार अलग-अलग हैं:
हालांकि, प्लग-इन हाइब्रिड इन उपायों के दायरे में नहीं आते थे। चीनी ऑटोमेकर्स ने तुरंत अपना एक्सपोर्ट फोकस PHEVs पर केंद्रित कर दिया, और इस लूपहोल के जरिए उनके शिपमेंट में जबरदस्त उछाल आया । EU का तर्क है कि चीनी PHEVs को भी वही राज्य सब्सिडी (बैटरी सब्सिडी, तरजीही वित्तपोषण, भूमि अनुदान) का लाभ मिलता है जिसके कारण मूल BEV जांच शुरू की गई थी
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जर्मन बिजनेस दैनिक Handelsblatt ने सबसे पहले 19 जून, 2026 को रिपोर्ट दी कि यूरोपीय आयोग ने चीनी प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने की तैयारी पूरी कर ली है । जिन निर्माताओं को निशाना बनाया जाना है, उनमें BYD, Chery और SAIC Motor शामिल होने की उम्मीद है
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टैरिफ दरें: 22 जून तक EU आयोग द्वारा औपचारिक रूप से नई हाइब्रिड ड्यूटी की दरें प्रकाशित नहीं की गई हैं। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ये दरें मौजूदा BEV काउंटरवेलिंग ड्यूटी संरचना को मिरर करने या उसके बहुत करीब होने की संभावना है, जो मूल 10% आयात शुल्क के अतिरिक्त लगाई जाएंगी ।
स्थिति: हाइब्रिड टैरिफ योजना अभी एक रिपोर्टेड प्रस्ताव बनी हुई है — इसे अभी तक EU आयोग द्वारा औपचारिक रूप से अपनाया नहीं गया है, और अंतिम रूप देने से पहले दरों और समयसीमा में बदलाव हो सकता है ।
विश्लेषकों को उम्मीद है कि नई ड्यूटी चीनी ऑटोमेकर्स के यूरोप में विस्तार को धीमा करेगी, लेकिन रोकेगी नहीं, क्योंकि उनमें से कई पहले से ही यूरोप में स्थानीय कारखाने स्थापित कर रहे हैं । 22 जून को हुई सेल-ऑफ ने पिछले हफ्तों की बढ़त को खत्म कर दिया
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जबकि नए उपाय हाइब्रिड लूपहोल को लक्षित करते हैं, लंबी अवधि का व्यापार परिदृश्य अभी भी विकसित हो रहा है। जनवरी 2026 में, EU और चीन ने एक ढांचे पर सहमति व्यक्त की थी जो ऑटोमेकर्स को स्वेच्छा से निर्यात मात्रा को सीमित करने और न्यूनतम मूल्य सीमा निर्धारित करने की अनुमति देता है — यह एक "मूल्य प्रतिबद्धता" (price undertaking) है जो अनुपालन करने वाले निर्माताओं के लिए टैरिफ की जगह ले सकती है । हालांकि, यह समझौता हाइब्रिड मुद्दे को कवर नहीं करता है।
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