ट्रंप बोले 'इज़राइल मेरा कहा माने', नेतन्याहू ने किया खारिज; ईरान डील पर क्यों बढ़ी दूरियां?
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच जारी जंग (ऑपरेशन) को खत्म करने के तरीके को लेकर खुला मतभेद: ट्रंप ईरान से समझौता करके रास्ता निकालना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू ईरान और उसके सहयोगियों पर पूरी सैन्य दबाव जारी रखने पर अड़े हैं. ट्रंप का 'इज़राइल मेरा कहा माने' बयान: G7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि इज़राइल उनके निर्देश पर...
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डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हाल ही में जो खुली कलह सामने आई है, उसकी जड़ उस बहुआयामी जंग को खत्म करने के तरीके को लेकर बुनियादी मतभेद में है जिसे दोनों ने साथ मिलकर शुरू किया था। ट्रंप ईरान के साथ एक डिप्लोमैटिक समझौता करके इससे बाहर निकलना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू ईरान और उसके समर्थक गुटों के खिलाफ अधिकतम सैन्य दबाव जारी रखने पर अड़े हैं। नीचे उनके मुख्य मतभेदों को सबूतों के साथ समझाया गया है।
ट्रंप का दावा कि "इज़राइल मेरा कहा मानेगा" और नेतन्याहू का पलटवार
जून 2026 के मध्य में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान, ट्रंप ने कहा कि इज़राइल उनके निर्देशों का पालन करता है और यह रिश्ता एकतरफा है। नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से इसका खंडन करते हुए कहा कि दोनों नेता "स्वतंत्र और गर्वित देशों" का प्रतिनिधित्व करते हैं और "कभी-कभी हम एक-दूसरे की बात से सहमत नहीं होते।" नेतन्याहू ने यह भी कहा कि यह धारणा कि कोई भी नेता दूसरे के निर्देश पर काम करता है, "गलत" है ।
अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (इस्लामाबाद MoU)
17 जून, 2026 को, ट्रंप ने इस्लामाबाद में ईरान के साथ एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य तीन-डेढ़ महीने से चल रहे अमेरिकी-इज़राइली युद्ध को ईरान के साथ रोकना और हॉरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना था । यह समझौता 60-दिन के युद्धविराम विस्तार का प्रावधान करता है, लेकिन परमाणु मुद्दों के समाधान को स्थगित कर देता है ।
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"ट्रंप बोले 'इज़राइल मेरा कहा माने', नेतन्याहू ने किया खारिज; ईरान डील पर क्यों बढ़ी दूरियां?" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच जारी जंग (ऑपरेशन) को खत्म करने के तरीके को लेकर खुला मतभेद: ट्रंप ईरान से समझौता करके रास्ता निकालना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू ईरान और उसके सहयोगियों पर पूरी सैन्य दबाव जारी रखने पर अड़े हैं.
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच जारी जंग (ऑपरेशन) को खत्म करने के तरीके को लेकर खुला मतभेद: ट्रंप ईरान से समझौता करके रास्ता निकालना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू ईरान और उसके सहयोगियों पर पूरी सैन्य दबाव जारी रखने पर अड़े हैं. ट्रंप का 'इज़राइल मेरा कहा माने' बयान: G7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि इज़राइल उनके निर्देश पर चलता है.
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
अमेरिका ईरान समझौता (इस्लामाबाद MoU): 17 जून 2026 को ट्रंप ने ईरान के साथ एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य ईरान के साथ ढाई महीने से चल रहे युद्ध को रोकना और हॉरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना...
इज़राइल को इस पूरी प्रक्रिया से दूर रखा गया। एक इज़राइली अधिकारी ने NBC न्यूज़ को बताया कि इज़राइल को MoU का पाठ भी नहीं दिखाया गया था । नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि किसी भी अंतिम सौदे में समृद्ध सामग्री की निकासी, समृद्धि बुनियादी ढांचे को खत्म करना, मिसाइल उत्पादन पर प्रतिबंध और ईरान के समर्थक गुटों को समर्थन समाप्त करना शामिल होना चाहिए - जो शर्तें मौजूदा MoU में पूरी नहीं होती हैं ।
नेतन्याहू के विरोध से निराश ट्रंप ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया, "कोई भी नेतन्याहू को संभाल नहीं सकता; वह सबको बम से उड़ा देना चाहता है" ।
लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियान
जून 2026 की शुरुआत में, नेतन्याहू ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में एक हिजबुल्लाह गढ़ पर हमला करने का आदेश दिया, ठीक उस समय जब अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले थे । ट्रंप ने कथित तौर पर नेतन्याहू को फोन करके चिल्लाते हुए कहा, "तुम क्या कर रहे हो?" ।
ट्रंप ने बाद में कहा कि नेतन्याहू को "अधिक जिम्मेदार" होना चाहिए और बेरूत हमले को "अत्यधिक" बताया । उन्होंने शिकायत की कि इज़राइल का सैन्य अभियान बहुत अधिक नागरिकों को मार रहा है: "आपको हर बार जब कोई आप पर गोली चलाता है तो एक अपार्टमेंट बिल्डिंग को गिराना ज़रूरी नहीं है" ।
सीरिया से हिजबुल्लाह से निपटने का ट्रंप का सुझाव
16 जून, 2026 को G7 शिखर सम्मेलन में, ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से प्रस्ताव रखा कि सीरिया को अपने नए नेतृत्व के तहत इज़राइल के बजाय हिजबुल्लाह से निपटना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू को "सीरिया को हिजबुल्लाह से निपटने देना चाहिए" ।
उन्होंने तर्क दिया कि लेबनान संघर्ष एक "छोटा मुद्दा" है और सीरिया इससे निपटने में अधिक सक्षम है ।
इस प्रस्ताव को दमिश्क ने तुरंत खारिज कर दिया। सीरियाई अधिकारियों ने कहा कि सीरिया के पास हिजबुल्लाह का सामना करने की सैन्य क्षमता नहीं है ।
व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव
ट्रंप के प्रोत्साहन: वह ईरान के साथ महंगे युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं, हॉरमुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वैश्विक तेल शिपिंग लेन को फिर से खोलना चाहते हैं, और घरेलू राजनीति से पहले एक कूटनीतिक जीत का दावा करना चाहते हैं । उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अगर नेतन्याहू अपना दृष्टिकोण नरम नहीं करते हैं तो वह इज़राइल के आगामी चुनावों में नेतन्याहू के समर्थन को रोक सकते हैं ।
नेतन्याहू के प्रोत्साहन: उन्हें अपने कट्टरपंथी घरेलू गठबंधन का सामना करना पड़ता है, जो ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे के विनाश और हिजबुल्लाह को एक सैन्य खतरे के रूप में खत्म करने की मांग करता है। वह कमजोर दिखने का जोखिम नहीं उठा सकते। इज़राइली मीडिया ने अमेरिका-ईरान MoU को विश्वासघात बताया है, और ट्रंप पर "इज़राइल को छोड़ने" का आरोप लगाया है ।
यह दरार उस मजबूत साझेदारी से एक नाटकीय उलटफेर है जो युद्ध की शुरुआत में थी, जब ट्रंप और नेतन्याहू ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ अभियान शुरू करने में एकजुट थे । उनके अलग-अलग अंतिम लक्ष्य - ट्रंप बाहर निकलने के रास्ते चाहते हैं, नेतन्याहू निर्णायक सैन्य जीत चाहते हैं - अब उन्हें खुले संघर्ष में ला चुके हैं ।
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