कतर और पाकिस्तानी मध्यस्थों के हस्तक्षेप के बाद, ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता में वापस लौटने पर सहमत हो गया और बातचीत फिर से शुरू हो गई । एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने पुष्टि की कि प्रतिनिधिमंडल "पूरी रात काम कर रहे हैं" ताकि नाजुक समझौता ज्ञापन (MOU) को एक व्यापक राजनीतिक समझौते में बदला जा सके । वार्ता में चार मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई: होर्मुज जलडमरूमध्य, लेबनान में संघर्ष (हिजबुल्लाह-इज़राइल), ईरान का परमाणु कार्यक्रम, और प्रतिबंधों में राहत ।
वार्ता के दौरान ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने वॉशिंगटन से आक्रामक बयान जारी किए । उन्होंने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा, "तुम इसे बंद करोगे, तो तुम्हारा कोई देश नहीं बचेगा। तुम वापस अपने देश भी नहीं पहुंच पाओगे" । उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर ईरान ने जलडमरूमध्य नहीं खोला तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर देगा । इसके विपरीत, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जो बर्गनस्टॉक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे, ने बातचीत के दौरान एक कूटनीतिक और सुलहपूर्ण लहजा अपनाया । यह दोहरी रणनीति - वेंस का कूटनीति पर जोर और ट्रंप का आक्रामक रुख - वार्ता के पहले दिन स्पष्ट रूप से देखी गई ।
वार्ता के दौरान ही, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार, 20 जून को घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य "सभी जहाजों के लिए बंद" है । IRGC ने इज़राइल के लेबनान पर हमलों और अमेरिका द्वारा युद्ध विराम शर्तों के उल्लंघन को इसका कारण बताया । हालांकि, अमेरिकी सेना ने इस दावे को सीधे तौर पर खारिज कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि शनिवार को 55 व्यापारिक जहाज लगभग 17 मिलियन बैरल तेल लेकर जलडमरूमध्य से गुज़रे । शिपिंग ट्रैकिंग डेटा प्रदान करने वाली कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस ने भी पुष्टि की कि जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही जारी थी । उपराष्ट्रपति वेंस ने भी कहा कि जलडमरूमध्य बंद होने का कोई सबूत नहीं है ।
कतर और पाकिस्तान ने वार्ता में मध्यस्थों की भूमिका निभाई और दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई । स्विट्जरलैंड ने बर्गनस्टॉक में वार्ता स्थल उपलब्ध कराया । वार्ता एक समझौता ज्ञापन (MOU) के ढांचे के तहत हुई, जिसमें दोनों पक्ष "एक-दूसरे के खिलाफ धमकी या बल प्रयोग से परहेज करने" पर सहमत हुए । एक व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई । वार्ता के बाद, कतर और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वार्ता में अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति बनी है ।
बर्गनस्टॉक में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का पहला दिन साबित करता है कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित करना कितना जटिल और चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ ट्रंप की धमकियाँ और ईरान का सख्त रुख, दूसरी तरफ वेंस की कूटनीति और मध्यस्थों के प्रयास - यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहां किसी भी पल बातचीत बिखर सकती है। सवाल यह है कि क्या ये बातचीत अपने 60-दिवसीय लक्ष्य को प्राप्त कर पाएगी या यह सिर्फ एक और शुरुआत होगी जो बीच में ही दम तोड़ देगी?
कतर और पाकिस्तानी मध्यस्थों के हस्तक्षेप के बाद, ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता में वापस लौटने पर सहमत हो गया और बातचीत फिर से शुरू हो गई । एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने पुष्टि की कि प्रतिनिधिमंडल "पूरी रात काम कर रहे हैं" ताकि नाजुक समझौता ज्ञापन (MOU) को एक व्यापक राजनीतिक समझौते में बदला जा सके । वार्ता में चार मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई: होर्मुज जलडमरूमध्य, लेबनान में संघर्ष (हिजबुल्लाह-इज़राइल), ईरान का परमाणु कार्यक्रम, और प्रतिबंधों में राहत ।
वार्ता के दौरान ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने वॉशिंगटन से आक्रामक बयान जारी किए । उन्होंने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा, "तुम इसे बंद करोगे, तो तुम्हारा कोई देश नहीं बचेगा। तुम वापस अपने देश भी नहीं पहुंच पाओगे" । उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर ईरान ने जलडमरूमध्य नहीं खोला तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर देगा । इसके विपरीत, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जो बर्गनस्टॉक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे, ने बातचीत के दौरान एक कूटनीतिक और सुलहपूर्ण लहजा अपनाया । यह दोहरी रणनीति - वेंस का कूटनीति पर जोर और ट्रंप का आक्रामक रुख - वार्ता के पहले दिन स्पष्ट रूप से देखी गई ।
वार्ता के दौरान ही, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार, 20 जून को घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य "सभी जहाजों के लिए बंद" है । IRGC ने इज़राइल के लेबनान पर हमलों और अमेरिका द्वारा युद्ध विराम शर्तों के उल्लंघन को इसका कारण बताया । हालांकि, अमेरिकी सेना ने इस दावे को सीधे तौर पर खारिज कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि शनिवार को 55 व्यापारिक जहाज लगभग 17 मिलियन बैरल तेल लेकर जलडमरूमध्य से गुज़रे । शिपिंग ट्रैकिंग डेटा प्रदान करने वाली कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस ने भी पुष्टि की कि जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही जारी थी । उपराष्ट्रपति वेंस ने भी कहा कि जलडमरूमध्य बंद होने का कोई सबूत नहीं है ।
कतर और पाकिस्तान ने वार्ता में मध्यस्थों की भूमिका निभाई और दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई । स्विट्जरलैंड ने बर्गनस्टॉक में वार्ता स्थल उपलब्ध कराया । वार्ता एक समझौता ज्ञापन (MOU) के ढांचे के तहत हुई, जिसमें दोनों पक्ष "एक-दूसरे के खिलाफ धमकी या बल प्रयोग से परहेज करने" पर सहमत हुए । एक व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई । वार्ता के बाद, कतर और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वार्ता में अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति बनी है ।
बर्गनस्टॉक में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का पहला दिन साबित करता है कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित करना कितना जटिल और चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ ट्रंप की धमकियाँ और ईरान का सख्त रुख, दूसरी तरफ वेंस की कूटनीति और मध्यस्थों के प्रयास - यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहां किसी भी पल बातचीत बिखर सकती है। सवाल यह है कि क्या ये बातचीत अपने 60-दिवसीय लक्ष्य को प्राप्त कर पाएगी या यह सिर्फ एक और शुरुआत होगी जो बीच में ही दम तोड़ देगी?