रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि लगभग 90% सामान्य कार्यों के लिए, ओपन-वेट मॉडल्स का प्रदर्शन प्रॉपराइटरी फ्रंटियर मॉडल्स के बराबर है । प्रॉपराइटरी मॉडल्स की असली बढ़त केवल सबसे कठिन और अत्याधुनिक बेंचमार्क पर ही दिखती है — यानी, उन कार्यों पर जो रोज़मर्रा के उपयोग में बहुत कम आते हैं
।
उदाहरण के लिए, कोड जनरेशन जैसे विशिष्ट कार्यों पर बेंचमार्क गैप 10-15% होता है, लेकिन वास्तविक उत्पादन में यह गैप सिर्फ 2-5% रह जाता है । यानी, असल ज़िंदगी में ओपन-वेट मॉडल्स का प्रदर्शन लगभग उतना ही अच्छा है।
एक और बड़ी खोज यह है कि ओपन-वेट मॉडल्स और प्रॉपराइटरी फ्रंटियर मॉडल्स के बीच क्षमता का अंतर नाटकीय रूप से कम हो गया है। 2023 में यह अंतर 6 से 12 महीने का था, लेकिन 2026 के मध्य तक यह घटकर सिर्फ 3-4 महीने रह गया है । एपॉकएआइ (EpochAI) के विश्लेषण के अनुसार, क्षमता सूचकांक पर यह अंतर लगभग 7 अंकों का है, जो कि o3 और GPT-5 के बीच के अंतर के बराबर है
। इसकी वजह AI मॉडलों के रिलीज़ की रफ्तार में आया बदलाव है: 2024 में जहाँ हर 6 महीने में एक नया मॉडल आता था, वहीं 2026 की पहली तिमाही में यह रफ्तार हर 72 घंटे तक पहुँच गई
।
डॉयचे बैंक स्पष्ट करता है कि यह विभाजन भौगोलिक नहीं है (जैसे अमेरिका बनाम चीन), बल्कि यह एक वैश्विक और संरचनात्मक घटना है । इस प्रतिस्पर्धा में चीन के DeepSeek और Zhipu AI, अमेरिका का मेटा (Llama), और कई अन्य क्षेत्रीय कंपनियाँ शामिल हैं
। असली लड़ाई 'पूर्व बनाम पश्चिम' नहीं, बल्कि 'खुला बनाम बंद' है। बैंक के अनुसार, 2025 की शुरुआत में DeepSeek की सफलता ने इस पुराने भौगोलिक ढाँचे को तोड़ दिया
।
डॉयचे बैंक का मानना है कि यह बदलाव AI बाजार में एक बड़े पुनर्मूल्यांकन (मार्केट रीअसेसमेंट) को ट्रिगर कर सकता है । इसके मुख्य निहितार्थ इस प्रकार हैं:
इन सबका नतीजा यह है कि प्रॉपराइटरी मॉडल्स के मुनाफे का आधार, यानी प्रीमियम प्राइसिंग, खतरे में पड़ सकता है, जिससे AI सेक्टर के वर्तमान वैल्यूएशन पर गंभीर दबाव पड़ेगा ।
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