गूगल की प्रतिक्रिया भी कम अजीब नहीं थी।
पहला चरण - 'Nice Catch!':
दूसरा चरण - 'Working as Intended':
विरोधाभास: जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल का अपना इंटरनल बग ट्रैकर ConfigConfusion को अब भी P1/S1 और 'इन प्रोग्रेस (एक्सेप्टेड)' दिखाता है - जो सार्वजनिक बयान 'कोई वल्नरेबिलिटी नहीं' से सीधा उलट है।
मध्य जून 2026 तक - रिपोर्ट के तीन महीने बाद - यह खामी न तो ठीक हुई और न ही इसका कोई हल निकला। ओ'लेरी ने अपनी पूरी रिसर्च olearysec.com पर पब्लिश कर दी है।
मई 2026 की शुरुआत में, गूगल ने अपने Chrome और Android वल्नरेबिलिटी रिवॉर्ड प्रोग्राम (VRP) में बड़े बदलाव किए। इसका सीधा कारण AI टूल्स से बग ढूंढने की बढ़ती प्रवृत्ति बताया गया।
मुख्य बदलाव:
आलोचकों का कहना है कि गूगल एक तरफ AI के शोर के चलते Chrome के बाउंटी काट रहा है, और दूसरी तरफ एक मानव रिसर्चर द्वारा बारीकी से रिपोर्ट किए गए CVSS 10.0 के क्लाउड बग को 'Working as Intended' बताकर नकार रहा है। यह फैसला सिक्योरिटी कम्युनिटी में गूगल की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है।
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