सिक्योरिटी रिसर्चर जस्टिन ओ'लेरी ने Google Cloud Config Connector में एक गंभीर IAM ऑथराइज़ेशन बाईपास की खोज की, जिसे ConfigConfusion नाम दिया गया तथा CVSS 10.0 रेटिंग दी गई। [4] गूगल ने पहले इस बग को 'Nice Catch' बताते हुए P1/S1 रैंक दी, लेकिन 11 दिन बाद इसे 'Working as Intended' कहकर बाउंटी देने से मना कर दिया। [4]...

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यह वर्ष की सबसे हैरान करने वाली सुरक्षा नीति का उलटफेर है। गूगल ने अपने क्लाउड कॉन्फिग कनेक्टर में पाए गए एक गंभीर और अब तक अनफिक्स्ड बग (ConfigConfusion) के लिए सिक्योरिटी रिसर्चर को बग बाउंटी देने से इनकार कर दिया है - जबकि पहले कंपनी ने खुद इस फ्लॉ को सबसे गंभीर श्रेणी में रखा था। यह घटना सिक्योरिटी रिसर्चर जस्टिन ओ'लेरी द्वारा रिपोर्ट की गई है और इसने गूगल की रिसर्चर ट्रस्ट के प्रति प्रतिबद्धता और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर बग को संभालने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। The Register की रिपोर्ट पर आधारित इस कहानी में कई विरोधाभास हैं।
जस्टिन ओ'लेरी ने Config Connector (एक ओपन-सोर्स Kubernetes ऐड-ऑन) में एक गंभीर खामी खोजी। यह टूल कंपनियों को अपना पूरा Google Cloud एनवायरनमेंट Kubernetes से मैनेज करने देता है। ओ'लेरी ने इस बग का नाम ConfigConfusion रखा।
तकनीकी पहलू: Config Connector में ऑथराइज़ेशन चेक नहीं होता। इसका मतलब है कि कोई भी Kubernetes नेमस्पेस यूज़र GCP IAM कंट्रोल्स को बायपास करके roles/owner (सर्वोच्च नियंत्रण) तक पहुंच सकता है। इससे कंपनी के पूरे Google Cloud डेटा पर पूरी तरह कब्ज़ा संभव है। ओ'लेरी इसे CVSS 10.0 (अधिकतम खतरा) मानते हैं क्योंकि बेसिक एक्सेस वाला कोई भी हमलावर पूरे संगठन के क्लाउड एनवायरनमेंट पर कब्ज़ा कर सकता है।
गूगल की प्रतिक्रिया भी कम अजीब नहीं थी।
पहला चरण - 'Nice Catch!':
दूसरा चरण - 'Working as Intended':
विरोधाभास: जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल का अपना इंटरनल बग ट्रैकर ConfigConfusion को अब भी P1/S1 और 'इन प्रोग्रेस (एक्सेप्टेड)' दिखाता है - जो सार्वजनिक बयान 'कोई वल्नरेबिलिटी नहीं' से सीधा उलट है।
मध्य जून 2026 तक - रिपोर्ट के तीन महीने बाद - यह खामी न तो ठीक हुई और न ही इसका कोई हल निकला। ओ'लेरी ने अपनी पूरी रिसर्च olearysec.com पर पब्लिश कर दी है।
मई 2026 की शुरुआत में, गूगल ने अपने Chrome और Android वल्नरेबिलिटी रिवॉर्ड प्रोग्राम (VRP) में बड़े बदलाव किए। इसका सीधा कारण AI टूल्स से बग ढूंढने की बढ़ती प्रवृत्ति बताया गया।
मुख्य बदलाव:
आलोचकों का कहना है कि गूगल एक तरफ AI के शोर के चलते Chrome के बाउंटी काट रहा है, और दूसरी तरफ एक मानव रिसर्चर द्वारा बारीकी से रिपोर्ट किए गए CVSS 10.0 के क्लाउड बग को 'Working as Intended' बताकर नकार रहा है। यह फैसला सिक्योरिटी कम्युनिटी में गूगल की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है।
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सिक्योरिटी रिसर्चर जस्टिन ओ'लेरी ने Google Cloud Config Connector में एक गंभीर IAM ऑथराइज़ेशन बाईपास की खोज की, जिसे ConfigConfusion नाम दिया गया तथा CVSS 10.0 रेटिंग दी गई। [4]
सिक्योरिटी रिसर्चर जस्टिन ओ'लेरी ने Google Cloud Config Connector में एक गंभीर IAM ऑथराइज़ेशन बाईपास की खोज की, जिसे ConfigConfusion नाम दिया गया तथा CVSS 10.0 रेटिंग दी गई। [4] गूगल ने पहले इस बग को 'Nice Catch' बताते हुए P1/S1 रैंक दी, लेकिन 11 दिन बाद इसे 'Working as Intended' कहकर बाउंटी देने से मना कर दिया। [4]
तीन महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी यह क्लाउड सिक्योरिटी फ्लॉ अनसॉल्व्ड है और गूगल का इंटरनल ट्रैकर अब भी इसे P1/S1 के 'इन प्रोग्रेस' में दिखाता है। [4][20]