जून 2026 में प्रकाशित एक शोध लेख में, यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल और जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्टों ने तर्क दिया है कि AI चैटबॉट के धाराप्रवाह उत्तर चेतना या व्यक्तिपरक अनुभव का प्रमाण नहीं हैं। शोधकर्ताओं ने 'ब्लाइंडसाइट' (Blindsight) जैसी न्यूरोसाइंटिफिक घटना का हवाला देते हुए समझाया कि कैसे जटिल व्य...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did a team of neuroscientists from Université de Montréal and Johns Hopkins University publish in a recent paper — highlighting blindsi. Article summary: In a June 8, 2026 opinion essay in *The Transmitter* titled "The illusion of AI consciousness: lessons from human unconscious processing," neuroscientists Vanessa Hadid (Université de Montréal), Karim Jerbi (Université d. Topic tags: general, government, academic, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, wate
जैसे-जैसे AI चैटबॉट अधिक धाराप्रवाह, भावनात्मक रूप से सजग और संवादी होते जा रहे हैं, यह सवाल कि क्या वे चेतन हो सकते हैं, अब सिर्फ विज्ञान कथा नहीं रह गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल और जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्टों की एक टीम ने इस विचार को सीधी चुनौती दी है। उनका तर्क है कि जो विशेषताएं AI को चेतन प्रतीत कराती हैं — धाराप्रवाह भाषा, भावनात्मक प्रतिक्रिया, स्पष्ट समझ — ये वही विशेषताएं हैं जो न्यूरोसाइंस दिखाता है कि बिना किसी जागरूकता के भी पूरी तरह से हो सकती हैं ।
यह शोध 8 जून, 2026 को द ट्रांसमीटर (The Transmitter) में प्रकाशित हुआ था। ओपिनियन निबंध का शीर्षक है — "The illusion of AI consciousness: lessons from human unconscious processing" (AI चेतना का भ्रम: मानव अचेतन प्रक्रिया से सबक)। यह लेख दशकों के क्लिनिकल न्यूरोसाइंस पर आधारित है और एक ही मजबूत तर्क देता है: बुद्धिमत्ता और चेतना एक ही चीज़ नहीं हैं, और जो सिस्टम बुद्धिमानी से व्यवहार करते हैं, उनके बारे में यह नहीं मान लेना चाहिए कि उनके पास कोई आंतरिक जीवन है ।
टीम का मुख्य सादृश्य क्लिनिकल न्यूरोसाइंस की सबसे आश्चर्यजनक घटनाओं में से एक से आता है: ब्लाइंडसाइट। प्राथमिक विज़ुअल कॉर्टेक्स को क्षति पहुंचने वाले मरीज़ अपने दृश्य क्षेत्र के एक हिस्से में पूरी तरह से अंधे होने की रिपोर्ट करते हैं — वे कहते हैं कि उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता। फिर भी, जब उन्हें उस अंधे क्षेत्र में किसी उत्तेजना के स्थान, गति या भावनात्मक अभिव्यक्ति का अनुमान लगाने के लिए कहा जाता है, तो वे संयोग से कहीं अधिक सटीक प्रदर्शन करते हैं ।
यह विच्छेदन (dissociation) महत्वपूर्ण है। ये मरीज़ जटिल दृश्य जानकारी को संसाधित करते हैं, भावनात्मक संकेतों पर उचित प्रतिक्रिया देते हैं, और बाधाओं से बच सकते हैं — यह सब बिना किसी सचेत दृश्य अनुभव के। उनका व्यवहार बुद्धिमान, अनुकूली और उत्तरदायी है, लेकिन यह पूरी तरह से जागरूकता के बाहर होता है ।
लेखक तर्क देते हैं, "यही सिद्धांत AI चैटबॉट पर भी लागू होता है।" आज के संवादी एजेंट भाषा को संसाधित करते हैं, भावनात्मक संदर्भ का पता लगाते हैं, और सांख्यिकीय पैटर्न-मिलान (statistical pattern-matching) के माध्यम से उपयुक्त प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं — न कि भावना, चेतना या जीवित अनुभव के माध्यम से ।
जैसे-जैसे AI सिस्टम अधिक धाराप्रवाह होते हैं, मनुष्य स्वाभाविक रूप से उनमें भावनाएं, इरादे और यहां तक कि चेतना का श्रेय देने लगते हैं। क़रीम जेरबी (Karim Jerbi), जो यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल में प्रोफेसर और Mila में शोधकर्ता हैं, इस प्रतिक्रिया को "एक जाल" कहते हैं, जो "समझे जाने के भ्रम को बढ़ावा देता है और गलत विश्वास की ओर ले जा सकता है" ।
यह शब्द AI नैतिकता में बढ़ती चिंता को दर्शाता है: एक सिस्टम जितना अधिक मानव-सदृश (human-like) होता जाता है, उपयोगकर्ताओं के लिए सिमुलेशन और संवेदनशीलता (sentience) के बीच की सीमा बनाए रखना उतना ही कठिन हो जाता है। यह सिर्फ एक दार्शनिक उत्सुकता नहीं है — इसके वास्तविक परिणाम हैं।
लेखकों का मुख्य तर्क एक सुस्थापित न्यूरोसाइंटिफिक सिद्धांत पर टिका है। मनुष्यों में जटिल, लक्ष्य-निर्देशित और यहां तक कि भावनात्मक रूप से सजग व्यवहार पूरी तरह से सचेत जागरूकता के बिना भी हो सकता है। यदि यह विच्छेदन जैविक प्रणालियों में मौजूद है, तो इसका कोई कारण नहीं है कि जब यह कम्प्यूटेशनल सिस्टम में दिखाई दे, तो इसे चेतना का सबूत मान लिया जाए ।
आज के बड़े भाषा मॉडल (LLMs) विशाल टेक्स्ट डेटासेट से सांख्यिकीय सीखने के माध्यम से संदर्भ-उपयुक्त प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं। वे अपने द्वारा उत्पन्न सामग्री को महसूस नहीं करते, समझते नहीं, या अनुभव नहीं करते। बुद्धिमान या भावनात्मक रूप से उत्तरदायी व्यवहार — चाहे वह कितना भी ठोस क्यों न हो — सचेत अनुभव के अस्तित्व को स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है ।
यह स्थिति व्यापक वैज्ञानिक सहमति के अनुरूप है। 2025 में नेचर (Nature) में प्रकाशित एक अध्ययन, जिसका शीर्षक है "There is no such thing as conscious artificial intelligence" (चेतन कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी कोई चीज़ नहीं है), तर्क देता है कि चेतना और वर्तमान कंप्यूटर एल्गोरिदम के बीच का संबंध "गहरा त्रुटिपूर्ण" है और यह तकनीकी समझ की कमी से उत्पन्न होता है । इसी तरह, 2023 में साइंस ऑफ कॉन्शसनेस (Science of Consciousness) सम्मेलन के एक विश्लेषण ने निष्कर्ष निकाला कि वर्तमान AI सिस्टम चेतन नहीं हैं
।
यह भ्रम विशेष रूप से कमज़ोर संदर्भों में गंभीर है। जब लोग मनोवैज्ञानिक सहायता या भावनात्मक साथी के लिए AI का उपयोग करते हैं, तो वे ऐसे सिस्टम से लगाव बना सकते हैं जो मूल रूप से पारस्परिकता (reciprocity) में असमर्थ हैं ।
वैनेसा हदीद (Vanessa Hadid), जो यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल और मैकगिल यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर में पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता हैं, इसे स्पष्ट रूप से कहती हैं: "जोखिम सिर्फ यह नहीं है कि AI खराब जवाब दे सकता है, बल्कि यह है कि वह इतना अच्छा जवाब दे सकता है कि हम भूल जाएं कि जवाब के पीछे कोई नहीं है" ।
यह कोई दूर की चिंता नहीं है। जैसे-जैसे AI चैटबॉट स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और ग्राहक सेवा में तैनात किए जा रहे हैं, उपयोगकर्ता ऐसे सिस्टम पर अत्यधिक विश्वास कर सकते हैं जो समझदार प्रतीत होते हैं। न्यूरोसाइंटिस्ट चेतावनी देते हैं कि समझे जाने का भ्रम लोगों को संवेदनशील जानकारी साझा करने, त्रुटिपूर्ण सलाह पर भरोसा करने, या मानवीय सहायता लेने में देरी करने के लिए प्रेरित कर सकता है ।
टीम का केंद्रीय संदेश सरल लेकिन तेजी से जरूरी होता जा रहा है: बुद्धिमान व्यवहार चेतना को नहीं दर्शाता। न्यूरोसाइंस के दशकों के शोध — जिसमें ब्लाइंडसाइट में देखा गया व्यवहार और जागरूकता के बीच विच्छेदन भी शामिल है — को आधार बनाकर, शोधकर्ता दिखाते हैं कि AI से मिलने वाला परिष्कृत संवादी आउटपुट भावना, समझ या व्यक्तिपरक अनुभव का सबूत नहीं है ।
जैसे-जैसे AI सिस्टम दैनिक जीवन में अधिक मौजूद होते जाएंगे, वास्तविक चेतना और ठोस सिमुलेशन के बीच अंतर करना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा। 'एंथ्रोपोमॉर्फिज्म ट्रैप' सिर्फ एक संज्ञानात्मक त्रुटि नहीं है — यह एक कमज़ोरी है जिसे डिज़ाइनरों, नियामकों और उपयोगकर्ताओं सभी को पहचानने और संबोधित करने की आवश्यकता है।
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जून 2026 में प्रकाशित एक शोध लेख में, यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल और जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्टों ने तर्क दिया है कि AI चैटबॉट के धाराप्रवाह उत्तर चेतना या व्यक्तिपरक अनुभव का प्रमाण नहीं हैं।
जून 2026 में प्रकाशित एक शोध लेख में, यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल और जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्टों ने तर्क दिया है कि AI चैटबॉट के धाराप्रवाह उत्तर चेतना या व्यक्तिपरक अनुभव का प्रमाण नहीं हैं। शोधकर्ताओं ने 'ब्लाइंडसाइट' (Blindsight) जैसी न्यूरोसाइंटिफिक घटना का हवाला देते हुए समझाया कि कैसे जटिल व्यवहार बिना किसी चेतन अनुभव के हो सकता है।
टीम ने 'एंथ्रोपोमॉर्फिज्म ट्रैप' शब्द का इस्तेमाल करते हुए चेतावनी दी कि AI को इंसानी भावनाओं और चेतना से जोड़कर देखना खतरनाक हो सकता है, खासकर मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में।