ट्रम्प पहले भी कई बार कूटनीतिक रूप से नेतन्याहू को दरकिनार कर चुके थे - हमास और ईरान के साथ सीधे बातचीत करके, बिना इज़राइल की राय लिए - जिससे यरूशलम में गहरी निराशा थी । वाशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि ट्रम्प 'नेतन्याहू को तेज़ी से हाशिए पर धकेल रहे थे, जिससे एक ऐसे देश में चिंता बढ़ रही थी जो पिछले अमेरिकी प्रशासनों से परामर्श लेने का आदी था'
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जून 2026 में अंतिम रूप दिया गया अमेरिका-ईरान समझौता (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) वह उत्प्रेरक था जिसने सुलगते तनाव को खुले संकट में बदल दिया। यह समझौता - एक छोटी सी रूपरेखा जो नाज़ुक युद्धविराम को बढ़ाने, लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को रोकने, ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर केंद्रित था - वह सब कुछ था जिसके खिलाफ नेतन्याहू ने लड़ाई लड़ी थी ।
एनपीआर (NPR) ने बताया कि यह ज्ञापन 'उन मूलभूत मुद्दों का समाधान नहीं करता जिनके कारण अमेरिका और इज़राइल ईरान के साथ संघर्ष में उतरे' और यह व्यापक वार्ता के लिए 60 दिनों की अवधि तय करता है ।
घर्षण के मुख्य बिंदु:
अमेरिका-ईरान समझौते और ट्रम्प-नेतन्याहू दरार ने इज़राइल के प्रधानमंत्री के लिए गंभीर घरेलू परिणाम पैदा किए:
गठबंधन में दरारें। नेतन्याहू के अति-दक्षिणपंथी गठबंधन सहयोगी - जिन्होंने उन्हें सत्ता में बनाए रखने की शर्त के रूप में पूर्ण युद्ध की मांग की थी - किसी भी युद्धविराम या कूटनीतिक ढांचे के खिलाफ खुले तौर पर विद्रोह कर रहे थे जो ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को बरकरार रखता । 2025-2026 के दौरान दरारें और बढ़ गईं जब ट्रम्प ने शांति योजनाओं पर जोर दिया, जिन्हें नेतन्याहू ने अनिच्छा से समर्थन दिया लेकिन उनकी अपनी कैबिनेट ने खारिज कर दिया
। दिसंबर 2025 में, नेतन्याहू और उनके गठबंधन सदस्यों ने ट्रम्प की गाजा योजना के समर्थन में नेसेट (इज़राइली संसद) में एक मतदान का बहिष्कार किया
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सार्वजनिक गुस्सा और दोषारोपण। ईरान के साथ अस्थायी समझौते ने इज़राइलियों में गुस्सा पैदा कर दिया, आलोचकों ने नेतन्याहू पर ट्रम्प को एक अजेय संघर्ष में धकेलने और फिर बातचीत की मेज पर इज़राइल के हितों को सुरक्षित करने में विफल रहने का आरोप लगाया । ब्रैंडिस यूनिवर्सिटी के मिर्स्की ने कहा कि 'इज़राइल में व्यापक सहमति है कि नेतन्याहू ने राजनीतिक कारणों से युद्ध को लंबा खींचा'
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'बीबी-सिटिंग' का अपमान। ट्रम्प बार-बार प्रशासन के अधिकारियों को यरूशलम भेजते थे ताकि नेतन्याहू द्वारा युद्धविराम के पालन की निगरानी की जा सके - इज़राइली मीडिया ने इस प्रथा को 'बीबी-सिटिंग' नाम दिया। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे 'अमेरिका-इज़राइल की गतिशीलता में एक उल्लेखनीय बदलाव' और नेतन्याहू के निर्णय पर सार्वजनिक अविश्वास का वोट बताया ।
सरकारी अस्थिरता। नेतन्याहू एक तरफ ट्रम्प के शांति के आग्रह और दूसरी तरफ अपने अति-दक्षिणपंथी सहयोगियों के युद्ध फिर से शुरू करने के आग्रह के बीच फंस गए थे - यह दबाव 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में गठबंधन के पतन का खतरा पैदा कर रहा था । रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया कि 'नेतन्याहू के एक दक्षिणपंथी सहयोगी ने पहले ही गाजा युद्धविराम पर सरकार छोड़ दी है'
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चुनावी जोखिम। इज़राइल में चुनाव नजदीक आने के साथ, नेतन्याहू एक बेहद कमजोर स्थिति से अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए लड़ते नजर आ रहे थे। उनके समर्थकों का मानना था कि उन्होंने अमेरिकी संरक्षक का विश्वास खो दिया है, जबकि केंद्र-वाम उनकी युद्ध रणनीति को एक विनाशकारी विफलता मानते थे ।
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