अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अमेरिका-ईरान शांति समझौता और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का फिर से खुलना महंगाई को तुरंत कम नहीं करेगा, क्योंकि पिछले लगभग चार महीनों के संघर्ष ने ऊर्जा, परिवहन, विनिर्माण और खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं में लागत वृद्धि को पहले ही 'बेक इन' (बेक इन) कर दिया है, जिसे उलटने में महीनों लग सकते हैं। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने पहले ही 2026-2027 के लिए अपने पूर्वानुमानों में तेजी से संशोधन किया है और वे या तो ब्याज दरों में कटौती पर रोक लगा रहे हैं या सक्रिय रूप से दरें बढ़ा रहे हैं।
यह समझौता तुरंत महंगाई को कम क्यों नहीं करता?
- शिपिंग को फिर से शुरू होने में देरी: होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया के लगभग 20% तेल और एलएनजी का परिवहन होता है, वहाँ सामान्य संचालन बहाल होने में समय लगेगा। विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध के प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को "कई महीनों तक" प्रभावित करते रहेंगे
![]()
। आईएमएफ़ (IMF) 'हाई अलर्ट' पर बना हुआ है और चेतावनी देता है कि समझौते के बाद भी ऊर्जा आपूर्ति धीरे-धीरे ही सामान्य होगी
।
- बेक-इन सप्लाई चेन लागत: लगभग चार महीनों के व्यवधान ने तेल, उर्वरक, विनिर्मित वस्तुओं और परिवहन की लागत में भारी वृद्धि की है, जो पहले से ही उत्पादक और उपभोक्ता कीमतों में शामिल हो चुकी है। डलास फेड (Dallas Fed) का अनुमान है कि होर्मुज के बंद रहने से अकेले 2026 में अमेरिकी हेडलाइन पीसीई (PCE) मुद्रास्फीति में 0.35 से 1.47 प्रतिशत अंक तक का इज़ाफा हो सकता है
।
- ऊर्जा बाजार तंग बने रहेंगे: समझौते के बाद भी, ऊर्जा की कीमतें "संभवतः वर्ष के अंत तक युद्ध-पूर्व स्तरों से काफी ऊपर" बने रहने की उम्मीद है, क्योंकि बाजार की संरचनात्मक तंगी फिर से सामने आएगी । जे.पी. मॉर्गन (J.P. Morgan) का कहना है कि होर्मुज के खुलने और तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने पर भी, अमेरिका में कोर मुद्रास्फीति "3% से काफी ऊपर" पहुंच सकती है ।
Comments
0 comments