शोधकर्ताओं की परिकल्पना है कि ये घूमती तरंगें एक स्थानिक-कालिक घड़ी के रूप में कार्य करती हैं, जो पहले संवेदना और फिर क्रिया के अनुक्रम को व्यवस्थित करती हैं । विशिष्ट साक्ष्य:
शोधकर्ताओं ने अभी तक यह निर्धारित नहीं किया है कि क्या घूर्णनशील यात्रा करने वाली तरंगें अन्य प्रजातियों, जिनमें मनुष्य भी शामिल हैं, में चूहों की तरह वैश्विक रूप से समन्वित होती हैं । हालांकि, पिछले स्वतंत्र कार्यों ने एफएमआरआई (नेचर ह्यूमन बिहेवियर, 2023) और मानव स्मृति कार्यों (नेचर कम्युनिकेशंस, 2026) में मानव कॉर्टेक्स में सर्पिल जैसे तरंग पैटर्न का पता लगाया है, इसलिए यह घटना संभवतः केवल कृन्तकों तक ही सीमित नहीं है—लेकिन क्या मनुष्यों में सोमैटोसेंसरी कॉर्टेक्स में वही गोलाकार शारीरिक सर्किट इसे संचालित करता है, यह अज्ञात है
।
निष्कर्ष: UW का अध्ययन इस बात का पहला यांत्रिक विवरण प्रदान करता है कि कैसे सर्पिल मस्तिष्क तरंगें एक गोलाकार तंत्रिका संरचना से उभरती हैं, वे पूरे मस्तिष्क में कैसे सिंक्रोनाइज़ होती हैं, और वे संवेदना को क्रिया से जोड़ने वाले समय तंत्र के रूप में कैसे कार्य कर सकती हैं। क्या यह विशिष्ट सर्किट संरचना मनुष्यों में मौजूद है, यह मुख्य खुला प्रश्न है।
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