जब तेल का सिकंदर बना मांगने वाला: रूस में ईंधन संकट की कहानी
रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन निर्यातकों में से एक है, जून 2026 में अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए सालों बाद पहली बार समुद्र के रास्ते गैसोलीन की खेप प्राप्त करने की तैयारी में है [8][9][10]। इस कदम का सीधा कारण यूक्रेनी ड्रोन हमलों से उत्पन्न भीषण पेट्रोल की कमी है। केवल अगस्त से अक्टूबर 2025...
प्रकाशितकर्ताDeepSeek-V4-Flash से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन निर्यातकों में से एक है, जून 2026 में अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए सालों बाद पहली बार समुद्र के रास्ते गैसोलीन की खेप प्राप्त करने की तैयारी में है [8][9][10]।
इस कदम का सीधा कारण यूक्रेनी ड्रोन हमलों से उत्पन्न भीषण पेट्रोल की कमी है। केवल अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच यूक्रेन ने कम से कम 28 हमले किए, जिससे रूस की लगभग 40% रिफाइनिंग क्षमता ठप हो गई [5][12][14]।
इसके चलते थोक पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, 20 से अधिक क्षेत्रों में ईंधन की कमी हो गई, पंपों पर पेट्रोल राशनिंग शुरू करनी पड़ी और क्रेमलिन को ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा [11][19][23]।
एक विरोधाभासी स्थिति बनी: रूस का कच्चे तेल का निर्यात युद्ध के समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया (3.46 मिलियन बैरल प्रतिदिन), जबकि रिफाइंड उत्पादों का निर्यात (जैसे पेट्रोल और डीजल) रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया [1][4]।
What has caused Russia, historically a major oil exporter, to begin importing gasoline by sea for the first time, and what are the key develA visual representation of Russia's unprecedented fuel crisis: Ukrainian drone strikes on refineries forced the energy superpower to import gasoline by sea for the first time in years.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What has caused Russia, historically a major oil exporter, to begin importing gasoline by sea for the first time, and what are the key devel. Article summary: Here is a full breakdown of the crisis.. Topic tags: general, news, general web, user generated, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thumbnails, icons, and tiny thumbnail layouts. Make it useful as an illustrative visual, not as factual evidence.
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जब तेल का सिकंदर मांगने लगा पेट्रोल
रूस, जो दुनिया भर में एक ऊर्जा महाशक्ति के रूप में जाना जाता है और कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन का सबसे बड़ा निर्यातक है, जून 2026 में एक अभूतपूर्व कदम उठाने जा रहा है। वह अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए समुद्र के रास्ते पेट्रोल (गैसोलीन) की एक खेप प्राप्त करेगा। यह सालों बाद पहली बार होगा जब रूस ऐसा करने जा रहा है । उद्योग के चार सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि यह फैसला यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण उत्पन्न भीषण पेट्रोल की कमी का सीधा परिणाम है। इन हमलों ने रूस की रिफाइनरियों, पाइपलाइनों और ईंधन भंडारण सुविधाओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है ।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"जब तेल का सिकंदर बना मांगने वाला: रूस में ईंधन संकट की कहानी" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन निर्यातकों में से एक है, जून 2026 में अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए सालों बाद पहली बार समुद्र के रास्ते गैसोलीन की खेप प्राप्त करने की तैयारी में है [8][9][10]।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन निर्यातकों में से एक है, जून 2026 में अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए सालों बाद पहली बार समुद्र के रास्ते गैसोलीन की खेप प्राप्त करने की तैयारी में है [8][9][10]। इस कदम का सीधा कारण यूक्रेनी ड्रोन हमलों से उत्पन्न भीषण पेट्रोल की कमी है। केवल अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच यूक्रेन ने कम से कम 28 हमले किए, जिससे रूस की लगभग 40% रिफाइनिंग क्षमता ठप हो गई [5][12][14]।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
इसके चलते थोक पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, 20 से अधिक क्षेत्रों में ईंधन की कमी हो गई, पंपों पर पेट्रोल राशनिंग शुरू करनी पड़ी और क्रेमलिन को ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा [11][19][23]।
जब तेल का सिकंदर बना मांगने वाला: रूस में ईंधन संकट की कहानी
रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन निर्यातकों में से एक है, जून 2026 में अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए सालों बाद पहली बार समुद्र के रास्ते गैसोलीन की खेप प्राप्त करने की तैयारी में है [8][9][10]। इस कदम का सीधा कारण यूक्रेनी ड्रोन हमलों से उत्पन्न भीषण पेट्रोल की कमी है। केवल अगस्त से अक्टूबर 2025...
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रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन निर्यातकों में से एक है, जून 2026 में अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए सालों बाद पहली बार समुद्र के रास्ते गैसोलीन की खेप प्राप्त करने की तैयारी में है [8][9][10]।
इस कदम का सीधा कारण यूक्रेनी ड्रोन हमलों से उत्पन्न भीषण पेट्रोल की कमी है। केवल अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच यूक्रेन ने कम से कम 28 हमले किए, जिससे रूस की लगभग 40% रिफाइनिंग क्षमता ठप हो गई [5][12][14]।
इसके चलते थोक पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, 20 से अधिक क्षेत्रों में ईंधन की कमी हो गई, पंपों पर पेट्रोल राशनिंग शुरू करनी पड़ी और क्रेमलिन को ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा [11][19][23]।
एक विरोधाभासी स्थिति बनी: रूस का कच्चे तेल का निर्यात युद्ध के समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया (3.46 मिलियन बैरल प्रतिदिन), जबकि रिफाइंड उत्पादों का निर्यात (जैसे पेट्रोल और डीजल) रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया [1][4]।
What has caused Russia, historically a major oil exporter, to begin importing gasoline by sea for the first time, and what are the key develA visual representation of Russia's unprecedented fuel crisis: Ukrainian drone strikes on refineries forced the energy superpower to import gasoline by sea for the first time in years.
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जब तेल का सिकंदर मांगने लगा पेट्रोल
रूस, जो दुनिया भर में एक ऊर्जा महाशक्ति के रूप में जाना जाता है और कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन का सबसे बड़ा निर्यातक है, जून 2026 में एक अभूतपूर्व कदम उठाने जा रहा है। वह अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए समुद्र के रास्ते पेट्रोल (गैसोलीन) की एक खेप प्राप्त करेगा। यह सालों बाद पहली बार होगा जब रूस ऐसा करने जा रहा है । उद्योग के चार सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि यह फैसला यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण उत्पन्न भीषण पेट्रोल की कमी का सीधा परिणाम है। इन हमलों ने रूस की रिफाइनरियों, पाइपलाइनों और ईंधन भंडारण सुविधाओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है ।
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"जब तेल का सिकंदर बना मांगने वाला: रूस में ईंधन संकट की कहानी" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन निर्यातकों में से एक है, जून 2026 में अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए सालों बाद पहली बार समुद्र के रास्ते गैसोलीन की खेप प्राप्त करने की तैयारी में है [8][9][10]।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
रूस, जो दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन निर्यातकों में से एक है, जून 2026 में अपने पश्चिमी बंदरगाह के जरिए सालों बाद पहली बार समुद्र के रास्ते गैसोलीन की खेप प्राप्त करने की तैयारी में है [8][9][10]। इस कदम का सीधा कारण यूक्रेनी ड्रोन हमलों से उत्पन्न भीषण पेट्रोल की कमी है। केवल अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच यूक्रेन ने कम से कम 28 हमले किए, जिससे रूस की लगभग 40% रिफाइनिंग क्षमता ठप हो गई [5][12][14]।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
इसके चलते थोक पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, 20 से अधिक क्षेत्रों में ईंधन की कमी हो गई, पंपों पर पेट्रोल राशनिंग शुरू करनी पड़ी और क्रेमलिन को ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा [11][19][23]।
ड्रोनों का वो कहर जिसने रूस की रिफाइनरियों को तोड़ दिया
यूक्रेन ने अगस्त 2025 से रूस के तेल बुनियादी ढांचे पर अपने हमले काफी बढ़ा दिए थे। यह हमले अपने पैमाने में अभूतपूर्व थे।
अकेले 1 अगस्त से अक्टूबर 2025 की शुरुआत के बीच, यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों पर कम से कम 28 हमले किए। यह संख्या पूरे साल के पहले सात महीनों में किए गए हमलों (21) से भी अधिक है ।
अगस्त 2025 की शुरुआत से, यूक्रेन ने रूस के यूरोपीय भाग में स्थित कम से कम 15 रिफाइनरियों को निशाना बनाया, जिनमें से कई को भारी नुकसान पहुंचने के कारण बंद करना पड़ा ।
अक्टूबर 2025 तक, इन हमलों ने रूस की लगभग 40% रिफाइनिंग क्षमता को निष्क्रिय कर दिया था, जैसा कि वाशिंगटन पोस्ट के विश्लेषण में बताया गया । एक रूसी ऊर्जा विश्लेषक ने आरबीसी को बताया कि रिफाइनरियों के बंद होने का लगभग 70% कारण यूक्रेनी ड्रोन हमले ही थे ।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अक्टूबर 2025 में चेतावनी दी थी कि इसका प्रभाव कम से कम 2026 के मध्य तक रूस की रिफाइनरी प्रोसेसिंग दरों को दबाए रखेगा ।
ये हमले 2026 में भी जारी रहे। ब्लूमबर्ग ने जून 2026 में रिपोर्ट दी कि रिफाइनरियों पर "रिकॉर्ड हमले" अभी भी अधिक कच्चे तेल को वैश्विक बाजार में धकेल रहे हैं ।
यूक्रेन की यह रणनीति जानबूझकर थी। जैसा कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा, सबसे प्रभावी प्रतिबंध वे हैं जो रूस के तेल रिफाइनरियों, टर्मिनलों और डिपो को निशाना बनाते हैं । इस रणनीति का उद्देश्य रूसी सेना को ईंधन की आपूर्ति को बाधित करना, ऊर्जा निर्यात से होने वाले राजस्व को कम करना और घरेलू अशांति पैदा करना था ।
ईंधन संकट: पंप पर लगे ताले, रिकॉर्ड कीमतें और राशनिंग
रिफाइनरियों के बंद होने के कारण रूस में गहरा ईंधन संकट पैदा हो गया, जो तेजी से पूरे देश में फैल गया।
थोक कीमतों ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। अगस्त 2025 में, सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल मर्केंटाइल एक्सचेंज पर AI-92 गैसोलीन की बेंचमार्क कीमत ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई, जब प्रमुख रिफाइनरियों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा । 18 अगस्त को AI-92 की कीमत 71,500 रूबल ($890) प्रति टन और AI-95 की कीमत 80,430 रूबल ($1,000) प्रति टन तक पहुंच गई, जो जनवरी की तुलना में 38% अधिक थी ।
20 से अधिक क्षेत्रों में खुदरा कमी। कब्जे वाले क्रीमिया से लेकर रूस के सुदूर पूर्व तक, 20 से अधिक क्षेत्रों में ईंधन की कमी देखी गई । कुछ पेट्रोल पंप पूरी तरह से सूख गए । सितंबर 2025 में, क्रेमलिन समर्थक दैनिक इज़वेस्टिया की रिपोर्ट के अनुसार, पंपों ने ईंधन की बिक्री पर राशनिंग शुरू कर दी ।
छोटे स्वतंत्र पंप सबसे ज्यादा प्रभावित। बढ़ती थोक लागत और उच्च ब्याज दरों ने कई निजी फिलिंग स्टेशनों के लिए पर्याप्त ईंधन इन्वेंट्री बनाए रखना असंभव बना दिया ।
क्रेमलिन ने लगाया निर्यात प्रतिबंध। सितंबर 2025 के अंत में, घरेलू बाजार के लिए आपूर्ति को संरक्षित करने के प्रयास में, रूस ने वर्ष के अंत तक ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया । यह प्रतिबंध बाद में 2026 तक बढ़ा दिया गया ।
जून 2026 तक, कमी इतनी गंभीर हो गई कि रूस को एक ऊर्जा महाशक्ति के लिए एक असामान्य कदम उठाना पड़ा: एशियाई आपूर्तिकर्ताओं से समुद्र के रास्ते पेट्रोल आयात करना । मॉस्को ने यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन के माध्यम से ईंधन आयात पर टैरिफ भी समाप्त कर दिया और जुलाई के बाद से बेलारूस से आयात में 36% की वृद्धि की ।
विरोधाभास: कच्चे तेल का निर्यात बढ़ा, रिफाइंड उत्पादों का निर्यात गिरा
ड्रोन अभियान ने एक चौंकाने वाला बाजार विरोधाभास पैदा किया, जो रूस की प्रोसेसिंग क्षमता की कमी की गहराई को दर्शाता है।
कच्चे तेल का निर्यात युद्ध के समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। चूंकि रिफाइनरियां उतना कच्चा तेल प्रोसेस नहीं कर पा रही थीं, इसलिए अधिशेष बैरल को निर्यात टर्मिनलों पर भेज दिया गया। अक्टूबर 2025 की शुरुआत में रूस का समुद्री कच्चे तेल का शिपमेंट 16 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो औसतन 3.57 मिलियन बैरल प्रतिदिन था । सितंबर 2025 में अकेले पश्चिमी बंदरगाहों से तेल निर्यात में अगस्त की तुलना में 25% की वृद्धि हुई, जो सीधे तौर पर रिफाइनरी बंद होने के कारण हुई । जून 2026 तक, वर्ष-दर-तारीख कच्चे तेल का निर्यात 3.46 मिलियन बैरल प्रतिदिन चल रहा था, जो 2025 से लगभग 120,000 बैरल प्रतिदिन अधिक और 2022 में रूस के आक्रमण के बाद से सबसे अधिक था ।
रिफाइंड उत्पादों का निर्यात ध्वस्त हो गया। अक्टूबर 2025 के पहले 10 दिनों में रूस के रिफाइंड ईंधन का औसत समुद्री शिपमेंट केवल 1.88 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो कम से कम युद्ध की शुरुआत के बाद से सबसे कम था ।
शुद्ध प्रभाव गहराई से अक्षम और आर्थिक रूप से हानिकारक है: रूस विदेशों में अधिक कच्चा तेल बेच रहा है, जबकि साथ ही उसे एशिया से पेट्रोल वापस खरीदना पड़ रहा है । रूस के उप प्रधान मंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने जून 2026 में स्वीकार किया कि अनिर्धारित मरम्मत के तहत रिफाइनरियों के कारण वर्ष की शुरुआत से तेल उत्पादन में गिरावट आई है ।
वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए इसका क्या मतलब है?
यह विरोधाभास महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है। रूस के कच्चे तेल के निर्यात में उछाल ने वैश्विक तेल बाजारों को आपूर्ति बनाए रखने में मदद की है, भले ही ओपेक+ कोटा में ढील दी गई हो , लेकिन देश की कच्चे तेल को निर्यात टर्मिनलों पर डायवर्ट करने की क्षमता भौतिक सीमाओं से जूझ रही है। काला सागर पर नोवोरोस्सिय्स्क जैसे बंदरगाह अपनी अधिकतम निर्यात क्षमता पर पहुंच गए हैं, जिससे व्यापारियों को असंसाधित कच्चे तेल को पुनर्निर्देशित करने में कठिनाई हो रही है ।
इस बीच, रूस के रिफाइंड उत्पादों के निर्यात का लगातार नुकसान - विशेष रूप से डीजल, नेफ्था और पेट्रोल - उन ईंधनों के लिए वैश्विक बाजारों को कड़ा कर रहा है। IEA का अनुमान है कि दबी हुई रिफाइनरी क्षमता कम से कम 2026 के मध्य तक बनी रहेगी , जिसका अर्थ है कि रूस का रिफाइंड ईंधन निर्यातक से पेट्रोल आयातक में परिवर्तन एक अस्थायी घटना नहीं हो सकती है।
एक ऐसे देश के लिए जिसने लंबे समय से खुद को एक ऊर्जा महाशक्ति के रूप में परिभाषित किया है, एशिया से पेट्रोल टैंकरों का रूसी बंदरगाहों पर आना एक नाटकीय उलटफेर का प्रतिनिधित्व करता है - जो बाजार की ताकतों से नहीं, बल्कि रूस की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था के केंद्र को निशाना बनाने वाले ड्रोनों के रणनीतिक उपयोग से प्रेरित है।
aljazeera.com
Ukraine strikes choke off Russian oil exports and fuel supplies
ड्रोनों का वो कहर जिसने रूस की रिफाइनरियों को तोड़ दिया
यूक्रेन ने अगस्त 2025 से रूस के तेल बुनियादी ढांचे पर अपने हमले काफी बढ़ा दिए थे। यह हमले अपने पैमाने में अभूतपूर्व थे।
अकेले 1 अगस्त से अक्टूबर 2025 की शुरुआत के बीच, यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों पर कम से कम 28 हमले किए। यह संख्या पूरे साल के पहले सात महीनों में किए गए हमलों (21) से भी अधिक है ।
अगस्त 2025 की शुरुआत से, यूक्रेन ने रूस के यूरोपीय भाग में स्थित कम से कम 15 रिफाइनरियों को निशाना बनाया, जिनमें से कई को भारी नुकसान पहुंचने के कारण बंद करना पड़ा ।
अक्टूबर 2025 तक, इन हमलों ने रूस की लगभग 40% रिफाइनिंग क्षमता को निष्क्रिय कर दिया था, जैसा कि वाशिंगटन पोस्ट के विश्लेषण में बताया गया । एक रूसी ऊर्जा विश्लेषक ने आरबीसी को बताया कि रिफाइनरियों के बंद होने का लगभग 70% कारण यूक्रेनी ड्रोन हमले ही थे ।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अक्टूबर 2025 में चेतावनी दी थी कि इसका प्रभाव कम से कम 2026 के मध्य तक रूस की रिफाइनरी प्रोसेसिंग दरों को दबाए रखेगा ।
ये हमले 2026 में भी जारी रहे। ब्लूमबर्ग ने जून 2026 में रिपोर्ट दी कि रिफाइनरियों पर "रिकॉर्ड हमले" अभी भी अधिक कच्चे तेल को वैश्विक बाजार में धकेल रहे हैं ।
यूक्रेन की यह रणनीति जानबूझकर थी। जैसा कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा, सबसे प्रभावी प्रतिबंध वे हैं जो रूस के तेल रिफाइनरियों, टर्मिनलों और डिपो को निशाना बनाते हैं । इस रणनीति का उद्देश्य रूसी सेना को ईंधन की आपूर्ति को बाधित करना, ऊर्जा निर्यात से होने वाले राजस्व को कम करना और घरेलू अशांति पैदा करना था ।
ईंधन संकट: पंप पर लगे ताले, रिकॉर्ड कीमतें और राशनिंग
रिफाइनरियों के बंद होने के कारण रूस में गहरा ईंधन संकट पैदा हो गया, जो तेजी से पूरे देश में फैल गया।
थोक कीमतों ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। अगस्त 2025 में, सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल मर्केंटाइल एक्सचेंज पर AI-92 गैसोलीन की बेंचमार्क कीमत ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई, जब प्रमुख रिफाइनरियों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा । 18 अगस्त को AI-92 की कीमत 71,500 रूबल ($890) प्रति टन और AI-95 की कीमत 80,430 रूबल ($1,000) प्रति टन तक पहुंच गई, जो जनवरी की तुलना में 38% अधिक थी ।
20 से अधिक क्षेत्रों में खुदरा कमी। कब्जे वाले क्रीमिया से लेकर रूस के सुदूर पूर्व तक, 20 से अधिक क्षेत्रों में ईंधन की कमी देखी गई । कुछ पेट्रोल पंप पूरी तरह से सूख गए । सितंबर 2025 में, क्रेमलिन समर्थक दैनिक इज़वेस्टिया की रिपोर्ट के अनुसार, पंपों ने ईंधन की बिक्री पर राशनिंग शुरू कर दी ।
छोटे स्वतंत्र पंप सबसे ज्यादा प्रभावित। बढ़ती थोक लागत और उच्च ब्याज दरों ने कई निजी फिलिंग स्टेशनों के लिए पर्याप्त ईंधन इन्वेंट्री बनाए रखना असंभव बना दिया ।
क्रेमलिन ने लगाया निर्यात प्रतिबंध। सितंबर 2025 के अंत में, घरेलू बाजार के लिए आपूर्ति को संरक्षित करने के प्रयास में, रूस ने वर्ष के अंत तक ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया । यह प्रतिबंध बाद में 2026 तक बढ़ा दिया गया ।
जून 2026 तक, कमी इतनी गंभीर हो गई कि रूस को एक ऊर्जा महाशक्ति के लिए एक असामान्य कदम उठाना पड़ा: एशियाई आपूर्तिकर्ताओं से समुद्र के रास्ते पेट्रोल आयात करना । मॉस्को ने यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन के माध्यम से ईंधन आयात पर टैरिफ भी समाप्त कर दिया और जुलाई के बाद से बेलारूस से आयात में 36% की वृद्धि की ।
विरोधाभास: कच्चे तेल का निर्यात बढ़ा, रिफाइंड उत्पादों का निर्यात गिरा
ड्रोन अभियान ने एक चौंकाने वाला बाजार विरोधाभास पैदा किया, जो रूस की प्रोसेसिंग क्षमता की कमी की गहराई को दर्शाता है।
कच्चे तेल का निर्यात युद्ध के समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। चूंकि रिफाइनरियां उतना कच्चा तेल प्रोसेस नहीं कर पा रही थीं, इसलिए अधिशेष बैरल को निर्यात टर्मिनलों पर भेज दिया गया। अक्टूबर 2025 की शुरुआत में रूस का समुद्री कच्चे तेल का शिपमेंट 16 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो औसतन 3.57 मिलियन बैरल प्रतिदिन था । सितंबर 2025 में अकेले पश्चिमी बंदरगाहों से तेल निर्यात में अगस्त की तुलना में 25% की वृद्धि हुई, जो सीधे तौर पर रिफाइनरी बंद होने के कारण हुई । जून 2026 तक, वर्ष-दर-तारीख कच्चे तेल का निर्यात 3.46 मिलियन बैरल प्रतिदिन चल रहा था, जो 2025 से लगभग 120,000 बैरल प्रतिदिन अधिक और 2022 में रूस के आक्रमण के बाद से सबसे अधिक था ।
रिफाइंड उत्पादों का निर्यात ध्वस्त हो गया। अक्टूबर 2025 के पहले 10 दिनों में रूस के रिफाइंड ईंधन का औसत समुद्री शिपमेंट केवल 1.88 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो कम से कम युद्ध की शुरुआत के बाद से सबसे कम था ।
शुद्ध प्रभाव गहराई से अक्षम और आर्थिक रूप से हानिकारक है: रूस विदेशों में अधिक कच्चा तेल बेच रहा है, जबकि साथ ही उसे एशिया से पेट्रोल वापस खरीदना पड़ रहा है । रूस के उप प्रधान मंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने जून 2026 में स्वीकार किया कि अनिर्धारित मरम्मत के तहत रिफाइनरियों के कारण वर्ष की शुरुआत से तेल उत्पादन में गिरावट आई है ।
वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए इसका क्या मतलब है?
यह विरोधाभास महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है। रूस के कच्चे तेल के निर्यात में उछाल ने वैश्विक तेल बाजारों को आपूर्ति बनाए रखने में मदद की है, भले ही ओपेक+ कोटा में ढील दी गई हो , लेकिन देश की कच्चे तेल को निर्यात टर्मिनलों पर डायवर्ट करने की क्षमता भौतिक सीमाओं से जूझ रही है। काला सागर पर नोवोरोस्सिय्स्क जैसे बंदरगाह अपनी अधिकतम निर्यात क्षमता पर पहुंच गए हैं, जिससे व्यापारियों को असंसाधित कच्चे तेल को पुनर्निर्देशित करने में कठिनाई हो रही है ।
इस बीच, रूस के रिफाइंड उत्पादों के निर्यात का लगातार नुकसान - विशेष रूप से डीजल, नेफ्था और पेट्रोल - उन ईंधनों के लिए वैश्विक बाजारों को कड़ा कर रहा है। IEA का अनुमान है कि दबी हुई रिफाइनरी क्षमता कम से कम 2026 के मध्य तक बनी रहेगी , जिसका अर्थ है कि रूस का रिफाइंड ईंधन निर्यातक से पेट्रोल आयातक में परिवर्तन एक अस्थायी घटना नहीं हो सकती है।
एक ऐसे देश के लिए जिसने लंबे समय से खुद को एक ऊर्जा महाशक्ति के रूप में परिभाषित किया है, एशिया से पेट्रोल टैंकरों का रूसी बंदरगाहों पर आना एक नाटकीय उलटफेर का प्रतिनिधित्व करता है - जो बाजार की ताकतों से नहीं, बल्कि रूस की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था के केंद्र को निशाना बनाने वाले ड्रोनों के रणनीतिक उपयोग से प्रेरित है।
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