मेलबर्न विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाले बेले प्रयोग ने पांच दुर्लभ B मेसन क्षय चैनलों में कोई छिपा हुआ कण नहीं पाया, जिससे 90% विश्वास स्तर पर शाखा अंश (ब्रांचिंग फ्रैक्शन) की ऊपरी सीमा दस हज़ार में एक से लेकर दस लाख मे... इस खोज ने तीन बिल्कुल नए क्षय चैनलों (B⁺ → π⁺ X, B⁺ → Dₛ⁺ X, और B⁺ → p X) की पड़ताल की, जिसमें ब...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What new constraints did the University of Melbourne-led Belle experiment study, published in Physical Review Letters in June 2026, place on. Article summary: In a paper published in *Physical Review Letters* on June 12, 2026 (Phys. Rev. Lett. 136, 231802), Dr. Daniel Marcantonio of the University of Melbourne and the Belle Collaboration placed the strongest constraints to dat. Topic tags: general, government, academic, general web, education. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "As no new particles were identified from the data, the analysis suggests there is an upper limit to how often these decays can occur. This does" source context "B meson decay study one step close to finding new hidden particles" Reference image 2: visual subject "A University of Melbourne researc
मेलबर्न विश्वविद्यालय के डॉ. डैनियल मार्कानटोनियो के नेतृत्व में बेले सहयोग (Belle Collaboration) के एक नए विश्लेषण ने उन काल्पनिक अदृश्य कणों पर अब तक का सबसे कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है, जो दुर्लभ B मेसन क्षयों में छिपे हो सकते हैं। 12 जून, 2026 को फिजिकल रिव्यू लेटर्स (Physical Review Letters) में प्रकाशित इस अध्ययन में किसी भी नई भौतिकी का कोई संकेत नहीं मिला, जिसने डार्क मैटर और ब्रह्मांड के पदार्थ-एंटीमैटर असंतुलन की व्याख्या करने वाले कई प्रमुख सैद्धांतिक मॉडलों को सीधे चुनौती दी है ।
भौतिक विज्ञानी लंबे समय से 'फीबली इंटरैक्टिंग पार्टिकल्स' (FIPs) की खोज कर रहे हैं, जिन्हें मानक मॉडल (स्टैंडर्ड मॉडल) से परे एक 'छिपे हुए क्षेत्र' (हिडन सेक्टर) का प्रवेश द्वार माना जाता है। ये कण, यदि मौजूद हैं, तो B मेसन जैसे भारी कणों के क्षय में उत्पन्न होंगे लेकिन इनका पता नहीं चल पाएगा, जिससे एक 'गायब ऊर्जा' (मिसिंग एनर्जी) का संकेत मिलेगा। बेले टीम ने पांच अलग-अलग B मेसन क्षय चैनलों में इस अदृश्य ऊर्जा की सटीक खोज करके, ऐसी घटनाओं के घटित होने की आवृत्ति पर अब तक की सबसे मजबूत सीमाएं तय की हैं।
इस विश्लेषण ने B → h + Xinv क्षय की जांच की, जहां ज्ञात कण h एक पायोन (π±), काओन (K±), Dₛ मेसन (Dₛ±), प्रोटोन (p±), या न्यूट्रल D मेसन (D̅⁰) हो सकता है, और Xinv अदृश्य, फीबली-इंटरैक्टिंग कण है । इस खोज में जापान के KEKB कोलाइडर में रिकॉर्ड किए गए बेले के पूरे डेटासेट—711 fb⁻¹ इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन टक्कर डेटा, जो लगभग 770 मिलियन B मेसन जोड़ों के बराबर है—का उपयोग किया गया
।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अध्ययन से पहले पांच में से तीन क्षय चैनलों (B⁺ → π⁺ X, B⁺ → Dₛ⁺ X, और B⁺ → p X) की कभी भी प्रत्यक्ष रूप से खोज नहीं की गई थी । अदृश्य पुनरावृत्ति (रिकॉइल) की पहचान करने के लिए, टीम ने एक 'B-टैगिंग' तकनीक का उपयोग किया, जिसमें जोड़े के एक B मेसन का पूरी तरह से पुनर्निर्माण किया गया ताकि दूसरे के गुणों का सटीक अनुमान लगाया जा सके, जो एक ज्ञात ट्रैक और गायब ऊर्जा में क्षय हुआ था
।
किसी भी चैनल में अपेक्षित पृष्ठभूमि (बैकग्राउंड) से अधिक कोई महत्वपूर्ण संकेत नहीं देखा गया। परिणामस्वरूप, सहयोग ने शाखा अंश (ब्रांचिंग फ्रैक्शन) पर 90% विश्वास स्तर (CL) की ऊपरी सीमाएं निर्धारित कीं, जो 10⁻⁴ से 10⁻⁶ के बीच हैं—अर्थात काल्पनिक कण के द्रव्यमान के आधार पर, इन क्षयों की संभावना अधिकतम दस हज़ार में एक से लेकर दस लाख में एक तक है ।
यह शून्य परिणाम सैद्धांतिक मॉडलों के एक व्यापक वर्ग के लिए तत्काल प्रभाव डालता है। अदृश्य फीबली इंटरैक्टिंग कण, जिनमें एक्सियन-जैसे कण (ALPs) और डार्क स्केलर शामिल हैं, डार्क मैटर की व्याख्या करने वाले सिद्धांतों की एक आम भविष्यवाणी हैं। मानक मॉडल के कणों के साथ उनकी अंतःक्रिया की ताकत सीधे तय करती है कि वे B क्षयों में कितनी बार दिखाई देंगे। कोई संकेत न मिलने पर, बेले का विश्लेषण सीधे इन कणों के युग्मन स्थिरांक (कपलिंग कॉन्सटेंट) पर कड़ी सीमाओं में तब्दील हो जाता है ।
ये नई सीमाएं ALPs या डार्क स्केलर को पूरी तरह से खारिज नहीं करती हैं—वे अभी भी इतनी कमजोर अंतःक्रियाओं के साथ मौजूद हो सकते हैं कि उन्हें देखा न जा सके—लेकिन ये अनुमत पैरामीटर स्पेस को काफी हद तक सीमित कर देती हैं, जो भविष्य के प्रायोगिक प्रयासों को सबसे आशाजनक सैद्धांतिक लक्ष्यों की ओर मार्गदर्शन करती हैं ।
इस अध्ययन का एक सबसे प्रभावशाली परिणाम प्रोटोन से जुड़े चैनल: B⁺ → p X से आया है। यह 'B-मीसोजेनेसिस' (B-mesogenesis) तंत्र पर पहला प्रत्यक्ष प्रायोगिक प्रतिबंध प्रदान करता है, एक सैद्धांतिक परिदृश्य जिसमें प्रारंभिक ब्रह्मांड में B मेसन के क्षयों ने एक डार्क सेक्टर में एंटीमैटर की अधिकता उत्पन्न की, जिससे यह समझाने में मदद मिलती है कि हमारे ब्रह्मांड में पदार्थ का वर्चस्व क्यों है ।
बेले सहयोग की इस क्षय पर ऊपरी सीमाएं, डार्क-सेक्टर कणों के द्रव्यमान की एक सीमा के लिए इस तंत्र को खारिज करती हैं, जो मॉडल पर महत्वपूर्ण दबाव डालती हैं। हालांकि, एक हालिया सैद्धांतिक पेपर नोट करता है कि B-mesogenesis का एक निर्णायक परीक्षण प्रदान करने के लिए B⁺ → p + गायब ऊर्जा के शाखा अंश पर प्रायोगिक सीमाओं को 10⁻⁷ या 10⁻⁸ के स्तर तक नीचे धकेलने की आवश्यकता होगी ।
ये प्रतिबंध अभूतपूर्व हैं, लेकिन ये मोटे तौर पर सांख्यिकीय रूप से सीमित हैं—जिसका अर्थ है कि बेले का डेटा नमूना अत्यंत दुर्लभ क्षयों की जांच करने के लिए पर्याप्त बड़ा नहीं है। सुपरकेकेबी कोलाइडर पर संचालित उन्नत बेले II प्रयोग ने पहले ही बेले की तुलना में कई गुना बड़ा डेटा नमूना जमा कर लिया है और अंततः 50 गुना अधिक डेटा एकत्र करने की उम्मीद है ।
इस बहुत बड़े डेटासेट के साथ, बेले II इन अदृश्य क्षय चैनलों पर संवेदनशीलता को परिमाण के क्रमों से बेहतर करने में सक्षम होगा, इस खोज द्वारा कवर किए गए सभी मॉडलों के लिए अनुमत पैरामीटर स्पेस में और अधिक गहराई से जांच करेगा। इसलिए बेले के परिणाम अगली पीढ़ी की खोजों के लिए एक महत्वपूर्ण बेंचमार्क और लॉन्चपैड के रूप में काम करते हैं, जो बेले II को उन द्रव्यमान सीमाओं और सैद्धांतिक मॉडलों की ओर इशारा करते हैं जहां कोई खोज छिपी हो सकती है ।
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मेलबर्न विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाले बेले प्रयोग ने पांच दुर्लभ B मेसन क्षय चैनलों में कोई छिपा हुआ कण नहीं पाया, जिससे 90% विश्वास स्तर पर शाखा अंश (ब्रांचिंग फ्रैक्शन) की ऊपरी सीमा दस हज़ार में एक से लेकर दस लाख मे...
मेलबर्न विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाले बेले प्रयोग ने पांच दुर्लभ B मेसन क्षय चैनलों में कोई छिपा हुआ कण नहीं पाया, जिससे 90% विश्वास स्तर पर शाखा अंश (ब्रांचिंग फ्रैक्शन) की ऊपरी सीमा दस हज़ार में एक से लेकर दस लाख मे... इस खोज ने तीन बिल्कुल नए क्षय चैनलों (B⁺ → π⁺ X, B⁺ → Dₛ⁺ X, और B⁺ → p X) की पड़ताल की, जिसमें बेले के पूरे 711 fb⁻¹ डेटासेट का उपयोग किया गया।
ये सांख्यिकीय रूप से सीमित परिणाम उन्नत बेले II प्रयोग के लिए एक स्पष्ट बेंचमार्क स्थापित करते हैं, जिससे संवेदनशीलता में कई गुना सुधार होने की उम्मीद है।