17 जून 2026 को, इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने पहली बार यह प्रदर्शित किया कि एक 'डिफरेंशियल एटम इंटरफेरोमीटर' वास्तविक परिस्थितियों में लेज़र फेज़ शोर को खत्म कर सकता है — यह अगली पीढ़ी के क्वांटम सेंसरों के लि... 'नेचर' में प्रकाशित इस शोध में दिखाया गया कि जब जानबूझकर इतना शोर डाला गया कि हर इंटरफेरोमीटर बे...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What recent milestone did researchers at Imperial College London achieve with a prototype quantum sensor for dark matter and gravitational w. Article summary: ## Recent Milestone. Topic tags: general, government, education, academic, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Researchers have built an ultra-sensitive sensor capable of detecting unimaginably small amounts of energy — below one zeptojoule." source context "New quantum sensor could count individual photons and hunt dark matter | ScienceDaily" Reference image 2: visual subject "A prototype quantum sensor developed by researchers at Imperial has demonstrated for the first time that a key principle behind next-generation" source context "Quantum sensor overcomes major obstacle in search for dark matter a
17 जून 2026 को, इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने पहली बार यह प्रदर्शित किया कि एक डिफरेंशियल एटम इंटरफेरोमीटर वास्तविक परिस्थितियों में लेज़र फेज़ शोर को रद्द कर सकता है — यह अगली पीढ़ी के क्वांटम सेंसरों के लिए एक महत्वपूर्ण सिद्धांत का सबूत (proof-of-principle) है ।
प्रतिष्ठित जर्नल नेचर में प्रकाशित इस कार्य ने दिखाया कि जब जानबूझकर इतना अधिक शोर डाला गया कि हर अकेला इंटरफेरोमीटर पूरी तरह से बेकार हो गया, तब भी दो अलग-अलग इंटरफेरोमीटरों के आउटपुट की आपस में तुलना करके, मूल क्वांटम सीमा (Standard Quantum Limit) पर एक शुद्ध सिग्नल प्राप्त किया जा सका ।
यह सफलता उस मुख्य शोर-निरस्तीकरण तंत्र को मान्य करती है जिस पर डार्क मैटर और गुरुत्व तरंगों (ग्रैविटेशनल वेव्स) की खोज के लिए बनने वाले बड़े पैमाने के क्वांटम डिटेक्टर निर्भर करते हैं।
यह प्रोटोटाइप एक एटम ग्रेडियोमीटर की तरह काम करता है, जो एक अकेली अति-स्थिर 'क्लॉक लेज़र' से जांचे गए अत्यधिक ठंडे स्ट्रॉन्शियम-87 (⁸⁷Sr) परमाणुओं का उपयोग करता है ।
यह ग्रेडियोमीटर विन्यास (कॉन्फ़िगरेशन) ही सभी लंबी-आधार रेखा वाले एटम इंटरफेरोमीटरों के लिए प्रस्तावित बुनियाद है, लेकिन इस परिणाम से पहले तक वास्तविक शोर की परिस्थितियों में इसे प्रयोगात्मक रूप से कभी मान्य नहीं किया गया था ।
यह कार्य एटम इंटरफेरोमीटर ऑब्ज़र्वेटरी एंड नेटवर्क (AION) सहयोग का एक हिस्सा है, जिसका नेतृत्व इंपीरियल कॉलेज लंदन कर रहा है और जिसमें ब्रिटेन की सात साझेदार संस्थाएं शामिल हैं ।
AION एक 4-चरणीय कार्यक्रम है :
अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियाँ:
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17 जून 2026 को, इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने पहली बार यह प्रदर्शित किया कि एक 'डिफरेंशियल एटम इंटरफेरोमीटर' वास्तविक परिस्थितियों में लेज़र फेज़ शोर को खत्म कर सकता है — यह अगली पीढ़ी के क्वांटम सेंसरों के लि...
17 जून 2026 को, इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने पहली बार यह प्रदर्शित किया कि एक 'डिफरेंशियल एटम इंटरफेरोमीटर' वास्तविक परिस्थितियों में लेज़र फेज़ शोर को खत्म कर सकता है — यह अगली पीढ़ी के क्वांटम सेंसरों के लि... 'नेचर' में प्रकाशित इस शोध में दिखाया गया कि जब जानबूझकर इतना शोर डाला गया कि हर इंटरफेरोमीटर बेकार हो गया, तब भी दो अलग अलग इंटरफेरोमीटर के आउटपुट की तुलना करके शुद्ध सिग्नल प्राप्त किया जा सका।
यह उस मुख्य शोर निरस्तीकरण तंत्र को सत्यापित करता है जिस पर डार्क मैटर और गुरुत्व तरंगों के लिए बड़े पैमाने के क्वांटम डिटेक्टर निर्भर हैं।
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