गहरे समुद्र की परत में प्लूटोनियम 244 का एक समान वितरण इस बात का संकेत है कि 10 करोड़ साल से भी पहले दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से निकला मलबा आज भी अंतरिक्ष में तैर रहा है और लगातार धरती पर बरस रहा है। यह खोज केवल प्लूटोनियम 244 की मौजूदगी तक सीमित नहीं थी; इसके सहोदर क्यूरियम 247 की पूर्ण अनुपस्थिति ने एक रेडियोधर...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What recent discovery did researchers make about plutonium-244 in a Pacific Ocean crust sample, what method did they use, what did the absen. Article summary: Here is a concise answer based on the newly published (June 2026) study in *Nature Astronomy*:. Topic tags: general, education, academic, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Ferromanganese crust VA13/2-237KD from the Pacific Ocean. This deep-sea crust archived interstellar radionuclides over more than 10 million years. Copyright: Dominik Koll" source context "The missing curium: timing the last r-process event near Earth | Research Communities by Springer Nature" Reference image 2: visual subject "What's more, in this study the researchers were able to detect atoms of distinctive plutonium-244, which d
समुद्र की गहराई में छिपा फर्श ब्रह्मांडीय मलबे का एक विशाल संग्रहालय है। करोड़ों वर्षों में, दूरस्थ तारकीय विस्फोटों में बने परमाणु वायुमंडल से होते हुए समुद्र की तलहटी में जमा होते रहे हैं, और हमारी आकाशगंगा के हिंसक इतिहास का एक परत-दर-परत पुरालेख तैयार करते हैं। जून 2026 में, शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने नेचर एस्ट्रोनॉमी में एक ऐसा अध्ययन प्रकाशित किया जिसने इस इतिहास के एक अध्याय को पहले से कहीं अधिक साफ तरीके से पढ़ा। उन्होंने प्रशांत महासागर की गहराई से निकाली गई एक फेरोमैंगनीज पर्पटी का विश्लेषण किया और न केवल इस बात की पुष्टि की कि अंतरतारकीय प्लूटोनियम-244 आज भी पृथ्वी पर आ रहा है, बल्कि एक चतुर परमाणु फोरेंसिक जांच के द्वारा यह भी पता लगाया कि यह कब और कहाँ बना था।
यह परिणाम ब्रह्मांड के सबसे भारी तत्वों के बारे में हमारी समझ में एक नाटकीय बदलाव है। अब सबूत बताते हैं कि एक अकेली, अकल्पनीय रूप से शक्तिशाली घटना — संभवतः दो न्यूट्रॉन तारों के बीच टक्कर — 10 करोड़ साल से भी पहले हुई थी और इसने अंतरिक्ष के एक विशाल क्षेत्र को रेडियोधर्मी तारे की धूल से भर दिया, जिसके बीच से हमारा ग्रह आज भी गुज़र रहा है।
हेल्महोल्ट्ज़-ज़ेंट्रम ड्रेसडेन-रोसेंडॉर्फ और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के भौतिकविदों के नेतृत्व में टीम ने प्रशांत महासागर की गहराई से एक धीमी गति से बढ़ने वाली फेरोमैंगनीज पर्पटी की जांच की। इसके लिए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की वेगा (VEGA) सुविधा में एक्सीलरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (AMS) का उपयोग किया, जो सूक्ष्म रेडियोआइसोटोप का पता लगाने के लिए दुनिया के सबसे संवेदनशील उपकरणों में से एक है । इस जांच का नतीजा बेहद हैरान करने वाला था: प्रति किलोग्राम पर्पटी सामग्री में अंतरतारकीय प्लूटोनियम-244 के महज़ कुछ सौ परमाणु पाए गए
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प्लूटोनियम-244 एक अनूठा और मूल्यवान ब्रह्मांडीय ट्रेसर है। इसकी अर्ध-आयु लगभग 8.06 करोड़ वर्ष है, और यह प्लूटोनियम का सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाला रेडियोआइसोटोप है जो मानवीय परमाणु गतिविधियों के बाहर पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता । चूँकि यह स्थलीय यूरेनियम अयस्कों में प्राकृतिक न्यूट्रॉन कैप्चर द्वारा उत्पन्न नहीं हो सकता, इसलिए जो भी प्लूटोनियम-244 पाया जाता है, वह किसी विस्फोटक खगोलभौतिकीय घटना में r-प्रक्रिया (तीव्र न्यूट्रॉन-कैप्चर प्रक्रिया) के माध्यम से बना होगा और फिर हमारे ग्रह तक पहुँचाया गया होगा
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2026 की यह खोज पिछले काम की नींव पर टिकी है। 2021 में, इसी शोध समूह ने गहरे समुद्र की पर्पटियों में प्लूटोनियम-244 का पता लगाया था और इसके आगमन को आयरन-60, जो सुपरनोवा में उत्पन्न एक कम उम्र वाला आइसोटोप है, की आमद से जोड़ा था । उस पुराने अध्ययन ने संकेत दिया था कि सामान्य सुपरनोवा, पृथ्वी पर जो पाया जा रहा था, उसकी व्याख्या करने के लिए पर्याप्त मात्रा में भारी r-प्रक्रिया तत्व उत्पन्न नहीं कर सकते। लेकिन नया काम एक निश्चित समयरेखा तय करके इससे कहीं आगे निकल गया है।
प्लूटोनियम के कुछ दर्जन परमाणुओं को ढूँढ़ना अपने आप में एक उपलब्धि है, लेकिन सबसे खुलासा करने वाला परिणाम एक नकारात्मक खोज था। शोधकर्ताओं ने क्यूरियम-247 की तलाश की, जो एक और r-प्रक्रिया आइसोटोप है और ब्रह्मांडीय विस्फोटों में प्लूटोनियम-244 के साथ-साथ उत्पन्न होता है। उन्हें कुछ नहीं मिला — कम से कम, अंतरिक्ष से आया कोई भी क्यूरियम नहीं। जो एकमात्र क्यूरियम-247 मिला, वह परमाणु हथियारों के परीक्षणों से बची हुई एक बेहद सूक्ष्म मात्रा थी, जिसने एक उपयोगी संकेतक का काम किया कि पर्पटी सामग्री, जब क्यूरियम मौजूद था, तब उसे पकड़कर रख सकती थी ।
आइए समझते हैं कि यह अनुपस्थिति इतनी खुलासा करने वाली क्यों है: क्यूरियम-247 की अर्ध-आयु केवल 1.56 करोड़ वर्ष है, जो प्लूटोनियम-244 की तुलना में लगभग पाँचवाँ हिस्सा है। यदि दोनों आइसोटोप एक ही घटना में बने हों और वह घटना अपेक्षाकृत हाल की हो, तो दोनों का आज भी पता लगाया जा सकना चाहिए। तथ्य यह है कि प्लूटोनियम-244 मिला लेकिन क्यूरियम-247 पूरी तरह से गायब था, एक स्पष्ट कहानी कहता है: पर्याप्त समय बीत चुका है — कम से कम क्यूरियम-247 की लगभग 10 अर्ध-आयु — ताकि कम समय तक जीवित रहने वाला आइसोटोप पूरी तरह से क्षय हो जाए ।
यह निष्कर्ष इस उत्पादन घटना की तारीख को लगभग 10 से 15 करोड़ वर्ष पहले के बीच धकेल देता है। पहले की व्याख्याएँ, जो केवल प्लूटोनियम-244 की उपस्थिति पर आधारित थीं, ने एक बहुत अधिक हाल की आपदा की संभावना को खुला छोड़ दिया था, शायद पिछले कुछ मिलियन वर्षों के भीतर । विलुप्त क्यूरियम प्रभावी रूप से इसे खारिज करता है।
प्लूटोनियम सिग्नल की शायद सबसे चौंकाने वाली विशेषता इसकी एकरूपता है। मलबे की एक बार की आमद के अनुरूप एक ही तलछट परत में केंद्रित होने के बजाय, प्लूटोनियम-244 फेरोमैंगनीज पर्पटी की सभी परतों में समान रूप से वितरित पाया गया, जो प्रति मिलियन वर्ष में केवल कुछ मिलीमीटर की दर से बढ़ती है ।
यह एकसमान वितरण इंगित करता है कि प्लूटोनियम किसी मलबे के बादल से एक संक्षिप्त मुठभेड़ का जीवाश्म नहीं है। बल्कि, यह एक सतत प्रक्रिया का सुझाव देता है: पृथ्वी अभी भी अंतरतारकीय धूल के एक फैले हुए क्षेत्र से गुज़र रही है जो प्राचीन विस्फोट द्वारा भारी तत्वों से समृद्ध किया गया था। तारे की धूल हर जगह, हर समय बरसती है, और समुद्र की तलहटी में जमते हुए एक उल्लेखनीय रूप से एकसमान हस्ताक्षर उत्पन्न करती है ।
यह खोज स्रोत घटना की प्रकृति के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखती है। उदाहरण के लिए, एक मानक कोर-कोलैप्स सुपरनोवा, अपेक्षाकृत केंद्रित विस्फोट में सामग्री को बाहर निकालता है। प्लूटोनियम धूल को इतने समान रूप से फैलाने और इतनी लंबी अवधि तक बने रहने के लिए, मूल विस्फोट इतना शक्तिशाली रहा होगा कि भारी तत्वों को अंतरिक्ष के एक विशाल आयतन में फैला सके। इसके लिए सबसे प्रशंसनीय उम्मीदवार एक न्यूट्रॉन-तारा विलय है, जिसे किलोनोवा के रूप में भी जाना जाता है — दो अति-सघन तारकीय अवशेषों के बीच एक दुर्लभ लेकिन असाधारण रूप से ऊर्जावान टक्कर ।
आवर्त सारणी के सबसे भारी सदस्यों — सोना, प्लैटिनम, यूरेनियम, प्लूटोनियम — ने लंबे समय से खगोलभौतिकीविदों को हैरान कर रखा है। तारों के अंदर सामान्य संलयन केवल लोहे तक के ही तत्वों का निर्माण कर सकता है। इससे भारी कुछ भी बनाने के लिए, आपको एक ऐसे वातावरण की आवश्यकता होती है जो न्यूट्रॉन से भरा हो, जहाँ परमाणु नाभिक क्षय होने से पहले एक के बाद एक तेजी से न्यूट्रॉन कैप्चर कर सकें। इस r-प्रक्रिया के बारे में लंबे समय से माना जाता था कि यह कोर-कोलैप्स सुपरनोवा में होती है, लेकिन सैद्धांतिक मॉडल इस तरह से पर्याप्त भारी तत्व उत्पन्न करने के लिए संघर्ष करते रहे हैं।
गहरे समुद्र से प्राप्त नया डेटा इस बढ़ते हुए सबूत में इज़ाफ़ा करता है कि मानक सुपरनोवा प्राथमिक r-प्रक्रिया कारखाने नहीं हैं। जैसा कि अध्ययन के सह-लेखक भौतिक विज्ञानी एंटन वॉलनर ने कहा, सामान्य सुपरनोवा देखे गए सिग्नल से मेल खाने के लिए पर्याप्त भारी r-प्रक्रिया तत्व उत्पन्न नहीं करते । यहाँ तक कि 2021 के अध्ययन ने भी संकेत दिया था कि पृथ्वी पर प्लूटोनियम-244 की मात्रा को केवल सुपरनोवा उत्पादन के साथ समेटना मुश्किल था
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2026 के नतीजे इसे और आगे ले जाते हैं: प्राचीन आयु, एकसमान वितरण, और क्यूरियम-247 की अनुपस्थिति का संयोजन सभी एक दुर्लभ, शक्तिशाली घटना की ओर इशारा करता है — सबसे अधिक संभावना एक न्यूट्रॉन-तारा विलय — स्रोत के रूप में। यह स्वतंत्र अवलोकनों के साथ मेल खाता है, जैसे कि 2017 में खोजा गया किलोनोवा GW170817, जिसने इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण दिया कि टकराने वाले न्यूट्रॉन तारे वास्तव में सोने और प्लैटिनम जैसे भारी r-प्रक्रिया तत्व उत्पन्न करते हैं।
संक्षेप में, प्रशांत महासागर की पर्पटी हमें बता रही है कि हमारे गहनों में जड़ा सोना और हमारे ग्रह की पर्पटी में मौजूद प्लूटोनियम संभवतः किसी सामान्य सुपरनोवा में नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की सबसे हिंसक आतिशबाजी में से एक में पैदा हुए थे — और उस प्राचीन टक्कर की आफ्टरग्लो आज भी हमारे आसमान से धीरे-धीरे गिर रही है।
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गहरे समुद्र की परत में प्लूटोनियम 244 का एक समान वितरण इस बात का संकेत है कि 10 करोड़ साल से भी पहले दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से निकला मलबा आज भी अंतरिक्ष में तैर रहा है और लगातार धरती पर बरस रहा है।
गहरे समुद्र की परत में प्लूटोनियम 244 का एक समान वितरण इस बात का संकेत है कि 10 करोड़ साल से भी पहले दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से निकला मलबा आज भी अंतरिक्ष में तैर रहा है और लगातार धरती पर बरस रहा है। यह खोज केवल प्लूटोनियम 244 की मौजूदगी तक सीमित नहीं थी; इसके सहोदर क्यूरियम 247 की पूर्ण अनुपस्थिति ने एक रेडियोधर्मी घड़ी की तरह काम किया और इस ब्रह्मांडीय विस्फोट की तारीख को करोड़ों साल पीछे धकेल दिया।
शोध के नतीजे बताते हैं कि सामान्य सुपरनोवा विस्फोट सोने और प्लूटोनियम जैसे भारी तत्वों के मुख्य स्रोत नहीं हो सकते; इसके बजाय, दो न्यूट्रॉन तारों का टकराना ब्रह्मांड की वास्तविक भट्टी है।
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