14 जून 2026 को हुए इस समझौते में 60 दिन का युद्धविराम, हॉरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान पर से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन ने इज़राइल के बार बार अनुरोध के बावजूद समझौते का मसौदा साझा करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसे डर था कि नेतन्याहू इसे लीक कर देंगे। इज़राइल में...
शोध उत्तर

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14 जून, 2026 को, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन (MoU) की घोषणा की, जिसने 28 फरवरी को शुरू हुए साढ़े तीन महीने से अधिक के खुले संघर्ष को रोक दिया । पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ और 19 जून को जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर के लिए तय यह समझौता, रातोंरात मध्य पूर्व के परिदृश्य को बदल चुका है — लेकिन उस तरह से बिल्कुल नहीं जैसी इज़राइली नेतृत्व ने उम्मीद की थी। यह समझौता तनाव कम करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू करने को प्राथमिकता देता है, जबकि अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जंग शुरू करने वाला इज़राइल खुद को बातचीत से बाहर और अपने मुख्य युद्ध उद्देश्यों को अधूरा पाता है।
पाकिस्तान द्वारा दो पन्नों और 14 अलग-अलग धाराओं वाले दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर की पुष्टि । इस समझौता ज्ञापन का फोकस चार तात्कालिक उपायों पर है
:
अतिरिक्त धाराओं में कथित तौर पर दक्षिणी लेबनान से इज़राइली रक्षा बलों (IDF) की वापसी और लगभग 24 अरब डॉलर की प्रतिबंधित ईरानी संपत्तियों को जारी करना शामिल है ।
इज़राइल ने औपचारिक रूप से इस समझौता ज्ञापन के मसौदे तक पहुंच का अनुरोध किया और उसे मना कर दिया गया । सबसे पहले इज़राइली मीडिया आउटलेट N12 ने इस इनकार की खबर दी, और कई अन्य आउटलेट्स ने बाद में पुष्टि की कि ट्रंप प्रशासन ने हस्ताक्षर समारोह से पहले इज़राइल को दस्तावेज की समीक्षा करने से रोक दिया
। सीएनएन को एक सूत्र ने बताया कि प्रशासन को डर था कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समय से पहले ही इसके विवरण लीक कर देंगे
। अमेरिकी अधिकारियों ने इज़राइल को कुछ तत्वों की जानकारी दी, लेकिन खुद नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि जब तक समझौते पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर नहीं हो गए, उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं थी
।
इज़राइल के भीतर प्रतिक्रिया बहुत ही गुस्से वाली और राजनीतिक स्पेक्ट्रम के हर छोर तक फैली हुई रही। इज़राइली विश्लेषकों और विपक्षी हस्तियों ने इस समझौते को एक "तबाही (कैटास्ट्रॉफी)" करार दिया और सीधे तौर पर नेतन्याहू पर अपना गुस्सा निकाला :
आलोचना का केंद्र यह है कि इस समझौते में वह सब नदारद है जिसकी इज़राइल को ज़रूरत थी: यह इस्लामी गणराज्य को बरकरार रखता है, ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या हिजबुल्लाह जैसे क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों की फंडिंग पर कोई रोक नहीं लगाता, और ईरान को प्रतिबंधों से राहत देता है जो उन प्रॉक्सी समूहों को और मजबूत कर सकती है । संक्षेप में, युद्ध उन नतीजों को देने में विफल रहा जिनका नेतन्याहू ने वादा किया था।
24 घंटे से अधिक की चुप्पी के बाद, नेतन्याहू ने 14 जून की शाम एक साहसिक दावे के साथ जनता को संबोधित किया: "हमने इज़राइल राज्य और उसके नागरिकों को परमाणु विनाश से बचा लिया" । उन्होंने तर्क दिया कि सैन्य अभियान ने ईरान को इज़राइल को नष्ट करने से रोक दिया, लेकिन स्वीकार किया कि इसका नतीजा "वह नहीं था जिसकी इज़राइल ने उम्मीद की थी"
। राजनीतिक विरोधियों ने तुरंत उन पर "ऐतिहासिक विफलता" का आरोप लगाया
।
कई आउटलेट्स के विश्लेषकों ने अपने आकलन में कोई नरमी नहीं बरती है । यह युद्ध इज़राइल के दो घोषित उद्देश्यों के साथ शुरू हुआ था, और युद्धविराम दोनों में से किसी को भी पूरा नहीं करता है:
नेतन्याहू के लिए, घरेलू राजनीतिक कीमत बहुत भारी है। उन्होंने आगामी चुनाव में अपनी राजनीतिक किस्मत ट्रंप के साथ अपने रिश्ते पर दांव पर लगा दी थी, लेकिन अब उन्हें एक ऐसे समझौते का सामना करना पड़ रहा है जिसे बड़े पैमाने पर इज़राइल में एक रणनीतिक हार के रूप में देखा जा रहा है । पूर्व सहयोगी और मध्यमार्गी प्रतिद्वंदी, दोनों ही इस डील का उपयोग नेतन्याहू को किनारे लगे, अनभिज्ञ और राजनीतिक रूप से समाप्त दिखाने के लिए कर रहे हैं।
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14 जून 2026 को हुए इस समझौते में 60 दिन का युद्धविराम, हॉरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान पर से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
14 जून 2026 को हुए इस समझौते में 60 दिन का युद्धविराम, हॉरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान पर से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन ने इज़राइल के बार बार अनुरोध के बावजूद समझौते का मसौदा साझा करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसे डर था कि नेतन्याहू इसे लीक कर देंगे।
इज़राइल में राजनीतिक गलियारों से लेकर मीडिया तक, हर तरफ नेतन्याहू को 'विफल', 'झूठा' और ट्रंप द्वारा 'अपमानित' बताकर उनकी जमकर आलोचना हुई।