हालांकि, एक दिलचस्प पहलू यह है कि भले ही सामान्य तौर पर खबरों पर भरोसा कम हुआ है, कई प्रमुख समाचार ब्रांडों पर लोगों का विश्वास अपेक्षाकृत मज़बूत बना हुआ है ।
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक प्रवृत्ति उभरकर सामने आई है—लोगों की खबरों में रुचि कम हो रही है। कई देशों में बड़ी संख्या में लोग जानकारी से दूरी बना रहे हैं या केवल एल्गोरिदम-संचालित फीड के माध्यम से चुनिंदा खबरें देख रहे हैं। इस ‘न्यूज़ अवॉयडेंस’ (खबरों से बचाव) की प्रवृत्ति में यूके सबसे आगे रहा ।
युवा पीढ़ी के लिए खबरों का चेहरा अब कोई पारंपरिक एंकर नहीं, बल्कि कोई कंटेंट क्रिएटर है। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों के अनुसार:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी अब धीरे-धीरे न्यूज़रूम का विकल्प बनने लगा है।
रॉयटर्स की यह रिपोर्ट पारंपरिक पत्रकारिता के लिए एक चेतावनी है। जब हमारी स्क्रीन पर खबरों का स्रोत कोई अखबार नहीं, बल्कि एक एल्गोरिदम या कोई प्रभावशाली शख्सियत है, तो सूचना की गुणवत्ता और सच्चाई एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन जाती है । यह रिपोर्ट साफ करती है कि मीडिया संस्थानों को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए इन नए डिजिटल माध्यमों के साथ तालमेल बिठाने की सख्त जरूरत है।
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