नासा की चंद्रा एक्स रे वेधशाला के 14 साल के अध्ययन में पाया गया कि M83 आकाशगंगा (1.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर) में 22 सुपरनोवा अवशेषों में से लगभग आधे एक्स रे चमक में नाटकीय रूप से टिमटिमा रहे हैं, जो पारंपरिक मॉडलों का... इस 'जीवित मृत' व्यवहार की सबसे अच्छी व्याख्या यह है कि जीवित बाइनरी साथी तारे विस्फोटों से बचे ब्...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did astronomers discover using NASA's Chandra X-ray Observatory about supernova remnants in the nearby galaxy Messier 83 (M83), what ex. Article summary: Here are the findings, based on two separate studies published in *The Astrophysical Journal* in June 2026.. Topic tags: general, government, education, academic, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "A composite image, Messier 83, or M83, shows a galaxy with a spiral structure, viewed straight on. At the center is a brilliant white and yellow pool of light. From that light, spi" source context "Instagram" Reference image 2: visual subject "At the center is a brilliant white and yellow pool of light. When astronomers pointed NASA’s Chandra at nearby galaxy M83, the last thing they expected to find was a
दशकों से, पाठ्यपुस्तकें सिखाती थीं कि विस्फोटित तारों के अवशेष हज़ारों वर्षों में धीरे-धीरे और पूर्वानुमानित रूप से ठंडे होते जाते हैं। लेकिन नासा की चंद्रा एक्स-रे वेधशाला (Chandra X-ray Observatory) से 14 साल के पुरालेखीय डेटा के एक नए और श्रमसाध्य विश्लेषण ने एक कहीं अधिक अराजक वास्तविकता का खुलासा किया है। पास की सर्पिल आकाशगंगा मेसियर 83 (M83) में, सुपरनोवा अवशेषों की एक पूरी आबादी शांति से धुंधली पड़ने से इनकार कर रही है, और इसके बजाय केवल कुछ वर्षों के समय-मान पर एक्स-रे प्रकाश में नाटकीय रूप से टिमटिमा रही है।
यह जानने के लिए कि सुपरनोवा अवशेष कैसे विकसित होते हैं, एक आधार रेखा बनाने के लिए, खगोलविदों ने चंद्रा को M83 की ओर मोड़ दिया, जो एक शानदार और सीधी दिखने वाली सर्पिल आकाशगंगा है जो लगभग 1.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। इसके लिए 2000 से 2014 तक के अवलोकनों का उपयोग किया गया । टीम ने सुपरनोवा अवशेषों के रूप में पहले पहचाने गए 22 एक्स-रे स्रोतों पर नज़र रखी और एक चौंका देने वाली खोज की: उनमें से लगभग आधे ने अपनी एक्स-रे चमक में महत्वपूर्ण और अप्रत्याशित बदलाव दिखाए
।
"हम जानते हैं कि अलग-अलग एक्स-रे स्रोत नाटकीय रूप से बदल सकते हैं, लेकिन यह पता चलना कि इतने सारे सुपरनोवा अवशेष ऐसा कर रहे हैं, ने वास्तव में हमें चौंका दिया," अमेरिका की कैथोलिक यूनिवर्सिटी के खगोलशास्त्री और द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के सह-लेखक एंड्रिया प्रेस्टविच ने कहा ।
यह उच्च अनुपात—22 में से लगभग 11—ही इस खोज को इतना विघटनकारी बनाता है। यह नियम तोड़ने वाली कोई एक अजीबोगरीब वस्तु नहीं है, बल्कि एक व्यापक व्यवहार है जो तारकीय अवशेषों के लिए मानक विकासवादी मॉडल की फिर से जांच करने के लिए मजबूर करता है ।
टीम ने अनियमित एक्स-रे टिमटिमाहट की व्याख्या करने के लिए दो प्रमुख, और संभावित रूप से समवर्ती, तंत्रों की पहचान की ।
पसंदीदा व्याख्या यह है कि इनमें से कई सुपरनोवा अवशेषों में एक जीवित बचा तारा मौजूद है। अधिकांश विशाल तारे बाइनरी सिस्टम में मौजूद होते हैं। जब अधिक विशाल तारा सुपरनोवा होता है, तो वह अपने पीछे एक ब्लैक होल या न्यूट्रॉन तारा छोड़ सकता है। यदि साथी तारा इस प्रलय से बच जाता है, तो यह नए सघन पिंड के चारों ओर एक तंग कक्षा में बंध सकता है। ब्लैक होल या न्यूट्रॉन तारे का तीव्र गुरुत्वाकर्षण फिर साथी तारे की सतह से सामग्री खींचने लगता है। यह प्रक्रिया, जिसे अभिवृद्धि (accretion) कहा जाता है, गिरती हुई गैस को लाखों डिग्री तक गर्म कर देती है, जिससे शक्तिशाली और परिवर्तनशील एक्स-रे उत्सर्जन उत्पन्न होता है जो पूरी तरह से अभिवृद्धि की दर पर निर्भर करता है ।
एक वैकल्पिक परिदृश्य स्रोत को ही पलट देता है। साथी तारे से गैस चुराने के बजाय, केंद्रीय सघन पिंड अपने स्वयं के मलबे को "रीसायकल" कर रहा हो सकता है। अध्ययन के सह-लेखक खगोलशास्त्री रॉय किलगार्ड ने इस संभावना को विस्फोट के मलबे का उसी पिंड पर वापस गिरने के रूप में वर्णित किया जिसे सुपरनोवा ने बनाया था । यह "फॉलबैक अभिवृद्धि" तब भी देखी गई चमक और धुंधलापन उत्पन्न कर सकती है जब ब्लैक होल या न्यूट्रॉन तारे द्वारा पुनः प्राप्त सामग्री एक्स-रे उत्सर्जित करने वाले तापमान तक गर्म हो जाती है।
नमूने में कम से कम एक अवशेष, SN 1957D, की एक सरल व्याख्या है। लगभग 70 साल पहले पहली बार देखा गया, इसकी एक्स-रे चमक का कारण संभवतः इसके उच्च-वेग वाले उत्सर्जित पदार्थ का आसपास के अंतरतारकीय पदार्थ से टकराना है, जो गतिज ऊर्जा को ऊष्मा में परिवर्तित करता है ।
दीर्घकालिक अवशेष परिवर्तनशीलता की यह घटना M83 तक ही सीमित नहीं हो सकती है। व्हर्लपूल आकाशगंगा (M51) के शुरुआती अनुवर्ती अवलोकनों ने परिवर्तनशील अवशेषों की एक समान आबादी का खुलासा किया है, जो सुझाव देता है कि यह व्यवहार तारा-निर्माण करने वाली आकाशगंगाओं की एक सामान्य, और पहले अनदेखी की गई, विशेषता हो सकती है ।
एक अलग जांच में, खगोलविदों की एक अन्य टीम ने चंद्रा और ईएसए के एक्सएमएम-न्यूटन उपग्रह दोनों को हमारी अपनी आकाशगंगा के अशांत केंद्र की ओर इंगित किया। उनका लक्ष्य था सैजिटेरियस सी (Sgr C), जो पृथ्वी से मात्र 26,000 प्रकाश वर्ष दूर एक सघन तारा-निर्माण क्षेत्र है—ब्रह्मांडीय रूप से कहें तो, विशालकाय ब्लैक होल सैजिटेरियस ए* (Sagittarius A*) के बिल्कुल पड़ोस में ।
Sgr C के भीतर, उन्होंने एक युवा और विशाल तारे के चारों ओर आयनित हाइड्रोजन के एक बड़े बुलबुले के अंदर बसे एक्स-रे उत्सर्जन के एक अलग "धब्बे" की पहचान की । यदि इसकी पुष्टि सुपरनोवा अवशेष के रूप में हो जाती है, तो यह हमारी आकाशगंगा के केंद्रीय ब्लैक होल के सबसे करीब पाए जाने वाले ऐसे पिंडों में से एक होगा
। डेटा इंगित करता है कि उत्सर्जित तारकीय सामग्री लगभग 20 लाख मील प्रति घंटे की गति से फैल रही है और मूल विस्फोट लगभग 1,700 वर्ष पहले ही हुआ था
।
यह खोज चंद्रा और एक्सएमएम-न्यूटन की उच्च-रिज़ॉल्यूशन एक्स-रे दृष्टि को दक्षिण अफ्रीका में मीरकैट (MeerKAT) टेलीस्कोप सरणी से प्राप्त पूरक रेडियो डेटा और पैन-स्टार्स (Pan-STARRS) सर्वेक्षण से प्राप्त ऑप्टिकल डेटा के साथ जोड़कर संभव हुई । यह खोज आकाशगंगा के सबसे चरम वातावरण में तारों के जीवन चक्र का अध्ययन करने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करती है।
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नासा की चंद्रा एक्स रे वेधशाला के 14 साल के अध्ययन में पाया गया कि M83 आकाशगंगा (1.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर) में 22 सुपरनोवा अवशेषों में से लगभग आधे एक्स रे चमक में नाटकीय रूप से टिमटिमा रहे हैं, जो पारंपरिक मॉडलों का...
नासा की चंद्रा एक्स रे वेधशाला के 14 साल के अध्ययन में पाया गया कि M83 आकाशगंगा (1.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर) में 22 सुपरनोवा अवशेषों में से लगभग आधे एक्स रे चमक में नाटकीय रूप से टिमटिमा रहे हैं, जो पारंपरिक मॉडलों का... इस 'जीवित मृत' व्यवहार की सबसे अच्छी व्याख्या यह है कि जीवित बाइनरी साथी तारे विस्फोटों से बचे ब्लैक होल या न्यूट्रॉन तारों को भोजन करा रहे हैं, या ये सघन पिंड अपने स्वयं के उत्सर्जित मलबे को वापस खींच रहे हैं—एक प्रक...
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