रैपिडस-यूकेएससी समझौता इसी विशाल ढांचे का एक हिस्सा है, जो 'जापान-यूके सरकारी प्रौद्योगिकी सहयोग ढांचे' के अंतर्गत आता है। इसके समानांतर, दोनों देशों ने स्थिर ऊर्जा और खनिज आपूर्ति की सुरक्षा के लिए आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर भी एक संयुक्त घोषणा की ।
इस समझौते को समझने के लिए महज छह दिन पहले, 8 जून 2026 को हुई एक और बड़ी घोषणा पर नज़र डालनी होगी। ब्रिटेन सरकार ने 'AI हार्डवेयर प्लान' प्रकाशित किया, जिसके लिए £1.1 बिलियन के सार्वजनिक और निजी निवेश का लक्ष्य रखा गया ।
इस योजना के साफ लक्ष्य हैं:
रैपिडस के साथ एमओयू सीधे इस योजना के 'अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और निवेश' वाले स्तंभ को साकार करता है। यह ब्रिटिश चिप डिजाइनरों को दुनिया की सबसे उन्नत फाउंड्री क्षमताओं (TSMC और सैमसंग के बाहर) तक पहुंच का एक ठोस रास्ता देता है ।
रैपिडस जिस 2nm तकनीक पर काम कर रही है, वह कोसों दूर का सपना नहीं, बल्कि तेजी से आकार लेती एक वास्तविकता है। आइए इसकी अब तक की यात्रा पर नज़र डालते हैं:
रैपिडस ने सिर्फ जापान तक सीमित रहने के बजाय, एक सोची-समझी बहु-महाद्वीपीय रणनीति अपनाई है:
ब्रिटेन की एक बड़ी ताकत है: चिप डिजाइनिंग। देश में कई प्रतिभाशाली स्टार्टअप और स्थापित कंपनियां हैं जो दुनिया की कुछ सबसे क्रांतिकारी चिप्स डिजाइन करती हैं। लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी यही है: उसके पास इन डिजाइनों को भौतिक रूप देने के लिए अत्याधुनिक विनिर्माण (फैब्रिकेशन) क्षमता नहीं है। ब्रिटेन की कोई भी फैक्ट्री 7nm से छोटी चिप्स नहीं बना सकती।
यूकेएससी इसी को एक गंभीर कमी मानता है । रैपिडस के साथ यह एमओयू ब्रिटेन की 'डिजाइन-टू-फैब' की इस खाई को पाटने का प्राथमिक तंत्र है। अब ब्रिटेन की AI चिप स्टार्टअप कंपनियां और फैबलेस डिजाइनर अपने डिजाइनों को होक्काइडो में रैपिडस की आगामी 2nm CMOS प्रक्रिया पर बनवाने का रास्ता हासिल कर सकेंगी
।
यह सीधे AI हार्डवेयर प्लान के उस लक्ष्य से मेल खाता है, जिसमें 'AI सेमीकंडक्टरों के अधिकतम उपयोग' की बात कही गई है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि ब्रिटेन में डिजाइन की गई चिप्स वास्तव में निर्मित भी हो सकें । यह एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय योजना को एक वैश्विक विनिर्माण वास्तविकता से जोड़ने जैसा है।
यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा है। जापान, रैपिडस के माध्यम से, अपनी 2nm तकनीक के लिए एक बड़े और रचनात्मक बाजार तक पहुंच बना रहा है, जो उसकी भारी निवेश वाली परियोजना के लिए ग्राहक आधार सुनिश्चित करेगा। वहीं, ब्रिटेन को अपनी चिप डिजाइन प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक अत्याधुनिक विनिर्माण भागीदार मिल गया है।
14 जून, 2026 का यह समझौता सिर्फ कागजों पर हस्ताक्षर नहीं है; यह भविष्य की AI और सेमीकंडक्टर दुनिया में एक महत्वपूर्ण गठबंधन की नींव है, जो एशिया की विनिर्माण शक्ति को यूरोप की डिजाइन प्रतिभा से जोड़ता है।
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