| GABA-A, GABA-B |
| दिमाग की उत्तेजना कम करता है, शांत रखता है |
| ग्लूटामेट | उत्तेजक (Excitatory) | NMDA, AMPA, Kainate | दिमागी सिग्नल बढ़ाता है, याददाश्त से जुड़ा है |
| ग्लाइसिन | निरोधी (Inhibitory) | क्लोराइड चैनल खोलता है | मुख्य रूप से स्पाइनल कॉर्ड और ब्रेनस्टेम में काम करता है |
| सेरोटोनिन (5-HT) | मूड नियामक | 5-HT रिसेप्टर परिवार | मूड, नींद और व्यवहार को नियंत्रित करता है |
| डोपामाइन | मूड/गति नियामक | डोपामाइन रिसेप्टर परिवार | मूवमेंट, इनाम और व्यवहार से जुड़ा है |
उदाहरण के लिए, अगर पूछा जाए कि “GABA का CNS में क्या रोल है?” तो जवाब होगा: “GABA मुख्य निरोधी न्यूरोट्रांसमीटर है। यह GABA-A रिसेप्टर पर काम करता है और क्लोराइड चैनल खोलकर CNS की उत्तेजना को कम करता है ।”
दूसरे अहम टॉपिक्स के लिए शॉर्ट जवाब:
यूनिट 5 में आपको दवाओं के समूह, उनकी कार्यप्रणाली (mechanism of action) और साइड इफेक्ट्स के बारे में विस्तार से लिखना होता है।
📊 साइकोट्रोपिक दवाओं का बड़ा टेबल:
| श्रेणी | उदाहरण | मुख्य कार्यप्रणाली | खास साइड इफेक्ट |
|---|---|---|---|
| टिपिकल एंटीसाइकोटिक्स | क्लोरप्रोमाज़िन, हैलोपेरिडोल | D₂ रिसेप्टर को ब्लॉक करना | EPS (पार्किंसनिज़्म जैसे लक्षण), प्रोलैक्टिन बढ़ना |
| एटिपिकल एंटीसाइकोटिक्स | क्लोज़ापाइन, रिसपेरीडोन | D₂ और 5-HT₂A रिसेप्टर ब्लॉकेड | वज़न बढ़ना, मेटाबोलिक दिक्कतें, क्लोज़ापाइन से अग्रानुलोसाइटोसिस का खतरा |
| TCA एंटीडिप्रेसेंट्स | एमिट्रिप्टीलीन, इमिप्रैमीन | NE और 5-HT के रीअपटेक को ब्लॉक करना | मुँह सूखना, कब्ज, कार्डियोटॉक्सिसिटी |
| SSRI एंटीडिप्रेसेंट्स | फ्लूओक्सेटीन, सर्ट्रालीन | सिर्फ 5-HT रीअपटेक ब्लॉक करना | जी मिचलाना, यौन रोग, नींद न आना |
| बेंज़ोडायज़ेपींस | डायज़ेपाम, लोराज़ेपाम | GABA-A की गतिविधि बढ़ाना | |
| मूड स्टेबलाइज़र | लीथियम | इंट्रासेल्युलर सिग्नलिंग बदलना | सीरम लेवल की निगरानी बहुत ज़रूरी |
पार्किंसंस और अल्ज़ाइमर को फ्लोचार्ट से समझें:
पार्किंसंस रोग में दिमाग का सब्सटैंशिया नाइग्रा हिस्सा खराब हो जाता है, जिससे डोपामाइन की कमी हो जाती है। इसका संतुलन बिगड़ने से एसिटाइलकोलीन हावी हो जाता है और कंपन, जकड़न जैसे लक्षण दिखते हैं । इसके इलाज के लिए लीवोडोपा और डोपामाइन एगोनिस्ट जैसी दवाएं दी जाती हैं।
वहीं, अल्ज़ाइमर में दिमाग में एसिटाइलकोलीन की कमी हो जाती है। इसलिए डोनेपेज़िल जैसी दवाएँ दी जाती हैं जो इसकी मात्रा बढ़ाती हैं, और मेमेंटाइन जैसी दवाएँ ग्लूटामेट की अधिकता से होने वाले नुकसान को रोकती हैं ।
ओपिओइड एनाल्जेसिक्स और ज़हर का इलाज:
मॉर्फिन जैसी ताकतवर दर्द निवारक दवाएँ मुख्य रूप से म्यू (μ) रिसेप्टर पर काम करती हैं । इनके ओवरडोज़ के तीन बड़े लक्षण हैं: पिन-पॉइंट पुतली, साँस का रुकना और बेहोशी। इस स्थिति में IV नालोक्सोन दिया जाता है, जो तुरंत असर करने वाला एंटीडोट है ।
नशे की लत का चक्र:
यह प्लान इस तरह से बनाया गया है कि आपका कमज़ोर से कमज़ोर टॉपिक भी छूटे नहीं।
| समय | क्या पढ़ना है |
|---|---|
| 0 - 30 मिनट | यूनिट 4 के सिर्फ 2 अंकों वाले सवाल। न्यूरोट्रांसमीटर और एनेस्थेटिक्स की टेबल पर फोकस करें। |
| 30 - 60 मिनट | यूनिट 5 के साइकोफार्माकोलॉजिकल एजेंट्स – एंटीसाइकोटिक्स, एंटीडिप्रेसेंट्स और एंटी-एंग्जायटी ड्रग्स का टेबल और फ्लोचार्ट। |
| 60 - 80 मिनट | पार्किंसंस और अल्ज़ाइमर की दवाओं की टेबल। इसके बाद ओपिओइड एनाल्जेसिक्स और उनके ज़हर का इलाज। |
| 80 - 100 मिनट | CNS स्टिमुलेंट्स और नशे की लत वाला टॉपिक। 10 नंबर वाले सवालों की रणनीति को एक बार ज़रूर पढ़ें। |
| 100 - 120 मिनट | आखिरी रिवीज़न। सभी टेबल और फ्लोचार्ट को एक बार जल्दी-जल्दी स्कैन करें। |
यह पूरा गाइड पैटर्न और चार्ट पर आधारित है ताकि आप इसे एक फॉर्मूले की तरह याद रखें। जब आप किसी चीज़ को एक सिस्टम के रूप में समझ लेते हैं, तो वह आपके दिमाग में लंबे समय तक टिकती है। आपकी ताकत यही है। शुभकामनाएँ! 🎯
दी गई जानकारी B.Pharm पाठ्यक्रम के विभिन्न शैक्षणिक स्रोतों पर आधारित है।
| निर्भरता (Dependence) का खतरा |