1. सशर्त प्रतिबंध राहत:
चारों देशों ने कहा कि वे "ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्पष्ट, सत्यापन योग्य कदमों के जवाब में प्रासंगिक प्रतिबंध हटाने के लिए तैयार हैं" । यह एक बड़ा कूटनीतिक संकेत है, लेकिन इसके साथ सख्त शर्त भी जुड़ी है – पहले ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस कार्रवाई करनी होगी, फिर राहत मिलेगी।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना शर्त नौवहन:
E4 ने इस बात पर ज़ोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को "तत्काल फिर से खोलना" और "बिना शर्त तथा अप्रतिबंधित नौवहन स्वतंत्रता" सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी है । इसका मतलब है कि यूरोपीय देश चाहते हैं कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बिना किसी शर्त या टोल के सभी वाणिज्यिक जहाज़ों के लिए खुला रहे, चाहे समझौता ज्ञापन का क्रियान्वयन कैसे भी हो।
यह रुख़ मार्च 2026 में बने पहले के नज़रिए से मेल खाता है, जब ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने ईरान द्वारा जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज़ों, तेल व गैस प्रतिष्ठानों पर हमलों और जलडमरूमध्य को बंद करने की कड़ी निंदा की थी । तब इन देशों ने जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयासों में शामिल होने की इच्छा जताई थी ।
ध्यान देने वाली बात यह है कि E4 का "बिना शर्त नौवहन" का आग्रह और समझौता ज्ञापन का मूल पाठ आपस में टकरा सकते हैं, क्योंकि ईरानी मीडिया के अनुसार जलडमरूमध्य को "ईरान की व्यवस्था के तहत" खोलने की बात कही गई है ।
हालांकि समझौते का अंतिम पाठ आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है, लेकिन वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों और ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी ने इसके मुख्य प्रावधानों की जानकारी दी है । यह समझौता दो चरणों में बंटा है:
चरण 1 (तत्काल, 60 दिन का ढांचा)
चरण 2 (60 दिनों के भीतर बातचीत)
यह भी बताया गया है कि ईरान को अनुपालन के बदले में आर्थिक लाभ मिलेगा – यानी पहले परमाणु सामग्री सौंपने और कार्यक्रम को खत्म करने जैसे कदम उठाने होंगे, तब राहत मिलेगी ।
पूरी वार्ता प्रक्रिया में ओमान मुख्य मध्यस्थ रहा। 2025-2026 के दौरान हुए कई दौर के अप्रत्यक्ष वार्ता सत्रों – जिनमें जिनेवा और रोम की बैठकें भी शामिल हैं – में ओमानी अधिकारियों ने अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच शटल डिप्लोमेसी की ।
ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी इस प्रक्रिया के अगुआ रहे। फरवरी 2026 के अंत में उन्होंने सार्वजनिक रूप से वार्ता में "बड़ी सफलता" (ब्रेकथ्रू) की घोषणा की थी । उन्होंने यहां तक कहा कि "एक शांति समझौता हमारी पहुंच में है" और यह कि ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह "कभी भी ऐसी परमाणु सामग्री का भंडारण नहीं करेगा जिससे बम बनाया जा सके" ।
ओमान इस भूमिका के लिए बेहद उपयुक्त था, क्योंकि उसके ऐतिहासिक रूप से वाशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ मज़बूत राजनयिक संबंध रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र का सुन्नी बहुल देश होने के बावजूद, ओमान ने ईरान के शिया धर्मगुरुओं और यमन के हूतियों के साथ भी मज़बूत रिश्ते बनाए रखे हैं ।
इस समझौते का दुनिया भर के नेताओं ने स्वागत किया है। 19 जून 2026 को स्विट्ज़रलैंड में एक हस्ताक्षर समारोह प्रस्तावित है, जिसके बाद 60 दिनों की और विस्तृत बातचीत होगी । E4 देशों ने साफ किया है कि वे अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय भागीदारों के साथ मिलकर "इस क्षण का लाभ उठाने, गति बनाए रखने और दीर्घकालिक राजनयिक समाधान हासिल करने" के लिए गहनता से काम करेंगे ।
हालांकि, असली परीक्षा अब शुरू होगी – विश्वास की कमी, जलडमरूमध्य खोलने की शर्तों पर मतभेद, और परमाणु वार्ता की जटिलताएं आगे की राह मुश्किल बना सकती हैं ।