दिलचस्प बात यह है कि डील के बाद सोना सुरक्षित निवेश के तौर पर नहीं, बल्कि कमज़ोर डॉलर और घटती ब्याज दर की उम्मीद में उछला। स्पॉट गोल्ड 2.7% चढ़कर $4,334 प्रति औंस पर पहुंच गया, जो 9 जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। भारतीय बाज़ार में 24 कैरेट सोना 1,600 रुपये से ज़्यादा उछलकर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया।
तर्क क्या है? बाज़ार को लगा कि शांति समझौते से तेल सस्ता होगा → महंगाई कम होगी → अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज़ दरें बढ़ाने की ज़ल्दी नहीं होगी। और जब ब्याज़ दरें नहीं बढ़तीं, तो सोना और चमकता है।
डील का सबसे सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ा। अमेरिकी क्रूड ऑयल 4% से अधिक टूट गया। ब्रेंट क्रूड भी 4% लुढ़ककर करीब $83.70 प्रति बैरल पर आ गया। होर्मुज जलडमरूमध्य को 'टोल-फ्री' खोलने की ट्रंप की घोषणा ने बाज़ार से सप्लाई डिसरप्शन का सबसे बड़ा डर हटा दिया। हालांकि, UAE की कंपनी ADNOC ने आगाह किया कि पूरी तरह से तेल ढुलाई बहाल होने में 2027 की पहली-दूसरी तिमाही तक लग सकती है।
रविवार, 14 जून—जिस दिन US-Iran शांति समझौते की घोषणा हुई—उसी दिन इज़राइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई हमला किया। इज़राइली PM नेतन्याहू के कार्यालय ने इसे हिज़्बुल्लाह के ड्रोन हमलों का जवाब बताया, जिसमें 3 लोग मारे गए और 15 घायल हुए।
यह घटना समझौते की बुनियाद हिला सकती है। 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' में "लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद करने" की बात कही गई है। लेकिन इज़राइल, जो समझौते का हिस्सा नहीं है, ईरान के करीबी मिलिशिया पर हमले जारी रख सकता है, जिससे नाज़ुक शांति प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है।
यह समझौता कोई अंतिम संधि नहीं, बल्कि एक अंतरिम 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (MoU) है। 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने हैं। इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए 60 दिन की खिड़की खुलेगी। अगर यह बातचीत विफल रही, तो यह पूरा ढांचा ध्वस्त हो सकता है—यही बाज़ारों के लिए सबसे बड़ा अनिश्चितता भरा जोखिम है।
16-17 जून को फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक शुरू हो रही है। तेल की गिरती कीमतों से फेड को ब्याज़ दरों में बढ़ोतरी पर ब्रेक लगाने की ज़्यादा गुंजाइश मिल गई है, क्योंकि इससे ऊर्जा-जनित महंगाई अपने आप कम होगी। अगर फेड का रुख नरम (Dovish) रहता है, तो बाज़ार की यह तेज़ी और बढ़ सकती है।
एक नज़र में मुख्य जोखिम: