इज़राइल के विपक्षी नेता याइर लैपिड ने उभरते अमेरिका ईरान परमाणु समझौते को 'पूर्ण विफलता' करार दिया है, जो ईरान के नेतृत्व, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु क्षमता को बरकरार रखता है। उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी सीधे प्रधानमंत्... प्रस्तावित ढाँचे में 15 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन पर रोक, समृद्ध यूरेनियम को हटाना, होर्मुज जल...

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जैसे-जैसे अमेरिका और ईरान एक ऐतिहासिक परमाणु समझौते की ओर बढ़ रहे हैं, इज़राइल में एक राजनीतिक भूचाल मचा हुआ है। 14 जून की लक्षित तारीख़ के साथ, इस समझौते की कथित शर्तों पर इज़राइली विपक्षी नेता याइर लैपिड ने तीखे हमले किए हैं, जबकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका के प्रति सार्वजनिक एकजुटता और समझौते की सुरक्षा ख़ामियों को लेकर अंदरूनी चिंता के बीच एक मुश्किल रास्ता तय कर रहे हैं।
विपक्षी नेता याइर लैपिड ने उभरते समझौते पर ज़बरदस्त हमला बोला है और इसे "पूर्ण विफलता" और "इज़राइली विदेश और सुरक्षा नीति की सबसे चौंकाने वाली विफलताओं में से एक" बताया है । उनकी आलोचना के चार मुख्य बिंदु हैं:
इज़राइल के युद्ध लक्ष्यों को हासिल करने में विफलता। लैपिड का तर्क है कि यह समझौता ईरान के नेतृत्व को सत्ता में बने रहने, उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को अछूता छोड़ने और परमाणु कार्यक्रम को फिर से खड़ा करने की उसकी क्षमता को पूरी तरह बरकरार रखता है । जैसा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "शासन बचा रहता है, मिसाइल कार्यक्रम अपनी जगह पर है, और ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का पुनर्निर्माण कर सकता है"
।
नेतन्याहू पर व्यक्तिगत ठीकरा। विपक्षी नेता ने राजनीतिक पहलू को साफ़ करते हुए कहा कि यह विफलता "पूरी तरह से नेतन्याहू के खाते में" है और प्रधानमंत्री पर "बूढ़े" और "थके हुए" होने का आरोप लगाया, जो इससे बेहतर नतीजा हासिल नहीं कर पाए । लैपिड का दावा है कि नेतन्याहू ने "अमेरिकियों को जोखिमों को पूरी तरह प्रस्तुत किए बिना एक अति-आशावादी परिदृश्य बेच दिया, और युद्ध के बीच में ही उनका भरोसा खो बैठे"
।
एक ख़तरनाक मिसाल। लैपिड ने बार-बार इस समझौते को "इज़राइल के लिए बुरा, क्षेत्र के लिए बुरा, ईरान के नागरिकों के लिए बुरा" बताया है और चेतावनी दी है कि इससे यह सुनिश्चित होता है कि "यह युद्ध का आख़िरी दौर नहीं होगा" । वे इस समझौते को शांति के मार्ग के रूप में नहीं, बल्कि एक अस्थायी विराम के रूप में देखते हैं जो भविष्य के संघर्ष की गारंटी है।
सैन्य स्वतंत्रता पर ज़ोर। वाशिंगटन और तेहरान के बीच जो भी सहमति बने, लैपिड ने माँग की है कि इज़राइल को सैन्य रूप से स्वतंत्र कार्रवाई का अपना अधिकार बरकरार रखना चाहिए । यह एक गहरी आशंका को दर्शाता है कि कोई भी कूटनीतिक ढाँचा ईरान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं कर सकता।
न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन की रिपोर्टिंग के अनुसार, जो ढाँचा आकार ले रहा है, उसमें कई आपस में जुड़े घटक शामिल हैं :
परमाणु निलंबन और संवर्धन पर रोक। संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन पर 20 साल की रोक की माँग की है, जबकि ईरान ने 10 साल की पेशकश की है। लगभग 15 साल का समझौता सबसे संभावित परिणाम के रूप में उभर रहा है । यह बीच का रास्ता बातचीत का एक केंद्रीय बिंदु बना हुआ है।
समृद्ध यूरेनियम को हटाना। इस सौदे के तहत ईरान के मौजूदा समृद्ध यूरेनियम के भंडार को अनुपयोगी बनाकर देश से बाहर निकालना अनिवार्य होगा—यह प्रावधान केवल संवर्धन पर रोक से कहीं आगे जाता है ।
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना। एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सामरिक घटक में जलडमरूमध्य के माध्यम से मुक्त नौवहन बहाल करना और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाना शामिल है । इससे ईरान अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में तेल निर्यात फिर से शुरू कर सकेगा।
चरणबद्ध आर्थिक राहत। प्रतिबंधों में ढील और जमे हुए संसाधनों तक पहुँच वृद्धिशील रूप से प्रदान की जाएगी, जो समझौते के परमाणु प्रावधानों के ईरान के प्रदर्शित अनुपालन से जुड़ी होगी ।
क्षेत्रीय दायरा। इस ढाँचे को एक "व्यापक क्षेत्रीय शांति समझौते" के रूप में वर्णित किया गया है जिसमें लेबनान और खाड़ी देश शामिल हैं, हालाँकि हिज़्बुल्लाह जैसे प्रॉक्सी समूहों के लिए ईरान के समर्थन को संबोधित करने के तंत्र अस्पष्ट बने हुए हैं ।
ढाँचे पर प्रगति के बावजूद, कई महत्वपूर्ण अड़चनें अंतिम समझौते को पटरी से उतारने की धमकी दे रही हैं:
संवर्धन अवधि का अंतर। संवर्धन की समय-सीमा पर तीन-तरफ़ा रस्साकशी—10 साल (ईरान), 15 साल (अपेक्षित समझौता), और 20 साल (अमेरिकी माँग)—अनसुलझी बनी हुई है ।
मिसाइल कार्यक्रम को बाहर रखा गया। इज़राइल के दृष्टिकोण से शायद सबसे महत्वपूर्ण कमी ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह से छोड़ दिया जाना है। परमाणु-केंद्रित ढाँचा उन मिसाइलों को संबोधित नहीं करता जो वॉरहेड ले जा सकती हैं ।
प्रॉक्सी समूहों का प्रवर्तन। जबकि क्षेत्रीय शांति की भाषा में ईरान के हिज़्बुल्लाह और अन्य मिलिशिया के समर्थन का उल्लेख है, इसके लिए कोई ठोस प्रवर्तन तंत्र नहीं हैं ।
जमे हुए धन तक पहुँच। ईरान कितनी जल्दी और कितनी मात्रा में अपनी विदेशी संपत्तियों तक पहुँच सकता है, यह विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है ।
सत्यापन तंत्र। निरीक्षण व्यवस्था और स्नैपबैक प्रतिबंधों—यानी ईरान द्वारा उल्लंघन करने पर दंड को फिर से लागू करने के प्रावधान—का विवरण अभी भी अंतिम रूप दिया जा रहा है ।
ईरान का अपना संदेह। तेहरान ने समझौते में अपनी पूर्ण भागीदारी को मान्य नहीं किया है, उसने राष्ट्रपति ट्रम्प के सार्वजनिक बयानों को "अटकलें" बताया और अमेरिका पर अपनी माँगों को बदलने का आरोप लगाया है ।
मूल असहमतियाँ। 13 जून को, ईरान के मुख्य वार्ताकार अब्बास अराग़ची ने कहा कि कुछ अमेरिकी परमाणु माँगें "अस्वीकार्य" हैं, हालाँकि विवाद के विशिष्ट बिंदु अस्पष्ट बने हुए हैं ।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दोहरा रुख अपनाया है—राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ सार्वजनिक एकता का प्रदर्शन करते हुए निजी तौर पर उभरती शर्तों पर तीव्र बेचैनी का संकेत देना।
वाशिंगटन के साथ सार्वजनिक तालमेल। नेतन्याहू ने कहा है कि वे और ट्रम्प "पूर्ण सहमति" में हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं मिलना चाहिए, और कोई भी अंतिम सौदा "परमाणु ख़तरे को पूरी तरह समाप्त करे" । उन्होंने ईरानी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को विफल करने के लिए ट्रम्प की "प्रतिबद्धता" की प्रशंसा की है
।
इज़राइल की भूमिका को कम करके आँकना। एक उल्लेखनीय राजनीतिक कदम में, नेतन्याहू के कार्यालय ने ज़ोर देकर कहा है कि इज़राइल उभरते सौदे में "पक्षकार नहीं" है, जिसका उद्देश्य यदि समझौता इज़राइली माँगों से कम रह जाता है तो यरुशलम को किसी भी राजनीतिक प्रतिक्रिया से दूर रखना है ।
सैन्य विकल्प को बनाए रखना। प्रधानमंत्री ने बार-बार ज़ोर देकर कहा है कि उनके कार्यकाल में "ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे" और संघर्ष को जारी बताया है—"युद्ध ख़त्म नहीं हुआ है" । उन्होंने स्पष्ट रूप से एकतरफ़ा सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया है।
अंदरूनी चिंता। पर्दे के पीछे, सूत्रों से संकेत मिलता है कि नेतन्याहू "तेज़ी से चिंतित" हो गए हैं कि अमेरिका एक ऐसे समझौते को स्वीकार कर सकता है जो इज़राइल की सख़्त माँगों से काफ़ी पीछे रह जाए । अमेरिकी प्रशासन ने समझौते की रिपोर्ट की गई शर्तों के संबंध में "इज़राइल की ओर से कुछ संदेह" को स्वीकार किया है
।
नेतन्याहू की मुख्य माँग ईरान के परमाणु बुनियादी ढाँचे का पूर्ण निराकरण है—न कि केवल संवर्धन पर रोक, बल्कि उन मशीनरी और सुविधाओं का भौतिक उन्मूलन जो संवर्धन को संभव बनाती हैं । अंतिम समझौता इस सीमा को पूरा करता है या नहीं, यह संभवतः तय करेगा कि इज़राइल का सार्वजनिक संयम कितनी दूर तक जाएगा।
जैसे-जैसे 14 जून की समय-सीमा नज़दीक आ रही है, इज़राइली सुरक्षा माँगों और अमेरिका-ईरान वार्ता की मेज़ की कूटनीतिक वास्तविकताओं के बीच की खाई ख़तरनाक रूप से चौड़ी बनी हुई है।
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इज़राइल के विपक्षी नेता याइर लैपिड ने उभरते अमेरिका ईरान परमाणु समझौते को 'पूर्ण विफलता' करार दिया है, जो ईरान के नेतृत्व, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु क्षमता को बरकरार रखता है। उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी सीधे प्रधानमंत्...
इज़राइल के विपक्षी नेता याइर लैपिड ने उभरते अमेरिका ईरान परमाणु समझौते को 'पूर्ण विफलता' करार दिया है, जो ईरान के नेतृत्व, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु क्षमता को बरकरार रखता है। उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी सीधे प्रधानमंत्... प्रस्तावित ढाँचे में 15 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन पर रोक, समृद्ध यूरेनियम को हटाना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और चरणबद्ध प्रतिबंध राहत शामिल है, लेकिन मिसाइल कार्यक्रम और प्रॉक्सी समूहों जैसे अहम मुद्दे अनसुलझे है...
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ़ किया है कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु ढाँचे को पूरी तरह ख़त्म किया जाना चाहिए, जबकि उनके कार्यालय ने समझौते में इज़राइल की भूमिका को कमतर बताया है और उन्होंने एकतरफ़ा सैन्य कार्रव...