यह इनकार ‘मुख्य प्रबंधकीय और प्रशासनिक सदस्यों’ के लिए था, जिसमें ईरान फुटबॉल महासंघ के महासचिव हेदायत मोम्बेनी और उपाध्यक्ष मेहदी मोहम्मद नबी शामिल हैं । जिन लोगों पर अभी भी प्रतिबंध लगा है, उनमें कुछ अहम नाम हैं: मुर्तज़ा मोहम्मदी (राष्ट्रीय टीम समिति के प्रमुख), सईद सालेही (फुटबॉल महासंघ के बोर्ड सदस्य), हसन कामरानफ़र (टीम के डॉक्टर) और मोहम्मद रज़ा साकेत (वरिष्ठ सलाहकार) ।
ईरान ने इस पूरे मामले में अमेरिका पर 'द्वेषपूर्ण व्यवहार' और 'भेदभावपूर्ण रवैया' अपनाने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि ये वीज़ा इनकार उन प्रबंधकीय, कार्यकारी और तकनीकी स्टाफ़ को निशाना बनाकर किया गया है जो किसी भी राष्ट्रीय टीम की रीढ़ होते हैं । तुर्की में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए पूछा कि आख़िर अमेरिका के राजदूत टॉम बैरक ने यह क्यों नहीं बताया कि खिलाड़ियों के वीज़ा मंज़ूर होने के साथ ही 'बड़ी संख्या में' सहयोगी स्टाफ़ को वंचित कर दिया गया है ।
यह विवाद कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि अमेरिका-ईरान के बीच चल रही गहरी कूटनीतिक दुश्मनी, लगातार जारी सैन्य तनाव, प्रतिबंधों और ईरान से जुड़े ठिकानों पर अमेरिकी हवाई हमलों के बीच उपजा है। कई रिपोर्ट्स में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि इस वीज़ा खींचतान को इसी बड़े राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए ।
व्हाइट हाउस के विश्व कप टास्क फ़ोर्स के प्रमुख एंड्रयू गिउलियानी ने सरेआम इस इनकार का बचाव किया और कहा कि यह सुरक्षा और जांच संबंधी चिंताओं के आधार पर किया गया ।
सिर्फ़ अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि आम प्रशंसकों पर भी इसका असर पड़ा है। टूर्नामेंट शुरू होने के कुछ दिन पहले ही ईरानी फुटबॉल महासंघ (FFIRI) ने बड़ा दावा किया कि फीफा ने अमेरिका में होने वाले तीनों ग्रुप-स्टेज मैचों के लिए ईरान के पूरे टिकट कोटे को रद्द कर दिया है । इसका असर उन हज़ारों प्रशंसकों पर पड़ेगा जिन्होंने पहले से यात्रा की बुकिंग करा ली थी। ईरान ने इसे 'ईरानी प्रशंसकों की उपस्थिति में तोड़फोड़' करने का फ़ैसला बताया । वहीं फीफा ने सफ़ाई देते हुए कहा कि वह 'ईरानी प्रशंसकों के मैचों में शामिल होने के अवसरों को अधिकतम करने' पर काम कर रहा है । ये मैच होंगे: 15 जून को लॉस एंजिल्स में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़, 21 जून को लॉस एंजिल्स में ही बेल्जियम के ख़िलाफ़, और 26 जून को सिएटल में मिस्र के ख़िलाफ़ ।
इस पूरे प्रकरण में एक और दिल तोड़ने वाली घटना सामने आई। सोमाली रेफ़री ओमर आर्टन को मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) ने 'जांच संबंधी चिंताओं' का हवाला देते हुए प्रवेश देने से इनकार कर दिया, जबकि उनके पास वैध वीज़ा और राजनयिक पासपोर्ट मौजूद था । 34 वर्षीय आर्टन विश्व कप के इतिहास में रेफ़री बनने वाले पहले सोमाली बनने जा रहे थे, लेकिन फीफा ने उन्हें टूर्नामेंट से हटा दिया । सोमालिया में वापस लौटने पर उनका नायकों जैसा स्वागत किया गया । गिउलियानी ने इस इनकार का भी बचाव करते हुए इसे व्यापक सुरक्षा जांच से जोड़ा ।
ईरान के खिलाड़ियों को भले ही वीज़ा मिल गया और वे प्री-टूर्नामेंट प्रशिक्षण के लिए मैक्सिको पहुंच गए हैं, लेकिन प्रतिबंधित 11 स्टाफ़ सदस्यों की अनुपस्थिति से उनका सपोर्ट स्ट्रक्चर कमज़ोर पड़ गया है । वीज़ा के नतीजों के इंतज़ार में टीम को लगभग तीन हफ़्तों तक तुर्की में प्रशिक्षण लेना पड़ा ।
'खेल को राजनीति से अलग रखने' की बात करने वाले फीफा के सामने यह एक बड़ी चुनौती है, जहां एक मेज़बान देश की नीतियां मैदान के अंदर और बाहर खेल को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही हैं।