असल चुनौती क्वालीफिकेशन नहीं, बल्कि अमेरिका में प्रवेश की अनुमति और वीज़ा हासिल करना थी।
एक समय, जब ईरानी प्रतिनिधिमंडल को बेहद सीमित वीज़े मिले, तो ईरान ने विश्व कप के ड्रॉ समारोह का बहिष्कार करने की धमकी दे दी थी। खासतौर पर ईरानी फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष को वीज़ा नहीं दिया गया था।
बाद की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की फुटबॉल टीम को अमेरिकी वीज़े मिल गए, हालांकि वीज़ा नीति को लेकर तनाव बना रहा। कुछ स्टाफ सदस्यों के वीज़े आखिरी समय तक अटके रहे।
संक्षेप में कहें तो, ईरान वहां इसलिए पहुंचा क्योंकि उसने खेल के मैदान पर अपनी जगह बनाई, फीफा ने उसे बाहर नहीं किया और अमेरिका ने खिलाड़ियों की भागीदारी के लिए पर्याप्त वीज़ा एक्सेस दे दिया। राजनीति भले ही तनावपूर्ण रही हो, लेकिन खेल प्रक्रिया और वीज़ा व्यवस्था ने ईरान की भागीदारी का रास्ता साफ़ कर दिया।
असल चुनौती क्वालीफिकेशन नहीं, बल्कि अमेरिका में प्रवेश की अनुमति और वीज़ा हासिल करना थी।
एक समय, जब ईरानी प्रतिनिधिमंडल को बेहद सीमित वीज़े मिले, तो ईरान ने विश्व कप के ड्रॉ समारोह का बहिष्कार करने की धमकी दे दी थी। खासतौर पर ईरानी फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष को वीज़ा नहीं दिया गया था।
बाद की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की फुटबॉल टीम को अमेरिकी वीज़े मिल गए, हालांकि वीज़ा नीति को लेकर तनाव बना रहा। कुछ स्टाफ सदस्यों के वीज़े आखिरी समय तक अटके रहे।
संक्षेप में कहें तो, ईरान वहां इसलिए पहुंचा क्योंकि उसने खेल के मैदान पर अपनी जगह बनाई, फीफा ने उसे बाहर नहीं किया और अमेरिका ने खिलाड़ियों की भागीदारी के लिए पर्याप्त वीज़ा एक्सेस दे दिया। राजनीति भले ही तनावपूर्ण रही हो, लेकिन खेल प्रक्रिया और वीज़ा व्यवस्था ने ईरान की भागीदारी का रास्ता साफ़ कर दिया।