2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में तेज उछाल आया है, वैश्विक औसत बिक्री मूल्य में लगभग 7% की वृद्धि का अनुमान है, क्योंकि AI डेटा सेंटर दुनिया की मेमोरी चिप्स की आपूर्ति को निगल रहे हैं, जिससे DRAM और NAND फ्लैश की लागत... भारत में, औसत फोन की कीमतें महज पांच महीनों में 7.9% बढ़ीं, 80 से अधिक मॉडलों की कीमतों में औसतन...
प्रकाशितकर्ताDeepSeek-V4-Pro से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में तेज उछाल आया है, वैश्विक औसत बिक्री मूल्य में लगभग 7% की वृद्धि का अनुमान है, क्योंकि AI डेटा सेंटर दुनिया की मेमोरी चिप्स की आपूर्ति को निगल रहे हैं, जिससे DRAM और NAND फ्लैश की लागत...
भारत में, औसत फोन की कीमतें महज पांच महीनों में 7.9% बढ़ीं, 80 से अधिक मॉडलों की कीमतों में औसतन 15% की वृद्धि हुई, और करीब आधे संभावित खरीदार अब अपनी खरीदारी टालने की बात कहते हैं।
काउंटरपॉइंट और IDC के विश्लेषकों का अनुमान है कि कीमतों का दबाव 2026 के अंत तक बना रहेगा और शायद 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक स्थिर न हो। नथिंग के सीईओ कार्ल पेई ने चेतावनी दी है कि बजट फोन पर सबसे ज्यादा मार पड़ेगी।
What is causing smartphone prices to rise sharply in 2026, how much has memory costs increased as a share of device hardware, what specificA global memory chip shortage driven by AI data centers has sent smartphone prices soaring to record highs in 2026.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is causing smartphone prices to rise sharply in 2026, how much has memory costs increased as a share of device hardware, what specific. Article summary: ## What's Driving the 2026 Smartphone Price Surge. Topic tags: general, news, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# The AI-fueled chip shortage could raise smartphone prices — new research spells out by how much. * The average selling price of smartphones in 2026 is expected to rise 6.9%, Coun" source context "Smartphone prices to rise in 2026 due to AI-fueled chip shortage" Reference image 2: visual subject "Coverage of data centers and their impact on business, the environment, neighborhoods, and jobs. Smartphone prices are expected to increase in 2026 due to RAM shortage caused by AI"
openai.com
आपका अगला स्मार्टफोन ज्यादा कीमत का होगा और शायद उसमें सुविधाएं भी कम हों। वैश्विक चिप उद्योग में एक बड़ा बदलाव चल रहा है, और इसका नए कैमरा सेंसर या तेज प्रोसेसर से कोई लेना-देना नहीं है। इसकी असल वजह है मेमोरी चिप की भारी कमी, और अनजाने में इस कमी के लिए जिम्मेदार है वही तकनीक जो सब कुछ स्मार्ट बनाने का दावा करती है: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)।
AI डेटा सेंटर, यानी सर्वरों के विशाल गोदाम जो GPT-5 और Google Gemini जैसे मॉडल्स को पावर देते हैं, उन्हें हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और दूसरे DRAM व NAND फ्लैश कंपोनेंट्स की बेहिसाब भूख है। इस मांग ने वैश्विक आपूर्ति में भारी कमी पैदा कर दी है, जिससे मेमोरी की कीमतें आसमान छू रही हैं और स्मार्टफोन निर्माता हाथ-पैर मारने को मजबूर हैं। जैसा कि नथिंग के सीईओ कार्ल पेई ने जून 2026 में साफ-साफ कहा, मेमोरी चिप्स अब प्रोसेसर या डिस्प्ले से भी ज्यादा महंगी हो गई हैं – यह उद्योग के लिए ऐतिहासिक रूप से असामान्य और आर्थिक रूप से विनाशकारी स्थिति है ।
कैसे AI बूम दुनिया की मेमोरी सप्लाई को चूस रहा है
इसके पीछे का अर्थशास्त्र सीधा-सादा है: सैमसंग, SK हाइनिक्स और माइक्रोन जैसे चिप निर्माता, स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली LPDDR RAM और UFS स्टोरेज की तुलना में मुनाफे वाली, AI-केंद्रित HBM चिप्स के उत्पादन को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसने पारंपरिक मेमोरी की घटती सप्लाई के लिए एक बोली युद्ध छेड़ दिया है।
बीबीसी के अनुसार, अक्टूबर 2025 के बाद से RAM की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं । ट्रेंडफोर्स के आंकड़ों से पता चला कि 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले एक आम स्मार्टफोन के लिए, 2026 की पहली तिमाही में कॉन्ट्रैक्ट की कीमतें साल-दर-साल लगभग 200% बढ़ गईं, जो पिछले साल की तुलना में तीन गुना है । फोन की बिल ऑफ मैटेरियल्स (BoM) पर इसका प्रभाव चौंका देने वाला रहा है। ऐतिहासिक रूप से स्मार्टफोन की BoM का लगभग 10-15% हिस्सा रखने वाली मेमोरी, अब बढ़कर 30-40% तक पहुंच गई है । GSM Arena द्वारा काउंटरपॉइंट रिसर्च के हवाले से दिए गए विस्तृत विवरण के अनुसार, 6GB RAM और 128GB eMMC स्टोरेज वाले लो-एंड फोन के लिए, मेमोरी अब कुल BoM का 43% तक खा जाती है ।
Studio Global AI
अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"2026 में स्मार्टफोन के दाम आसमान छूने की असली वजह" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में तेज उछाल आया है, वैश्विक औसत बिक्री मूल्य में लगभग 7% की वृद्धि का अनुमान है, क्योंकि AI डेटा सेंटर दुनिया की मेमोरी चिप्स की आपूर्ति को निगल रहे हैं, जिससे DRAM और NAND फ्लैश की लागत...
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में तेज उछाल आया है, वैश्विक औसत बिक्री मूल्य में लगभग 7% की वृद्धि का अनुमान है, क्योंकि AI डेटा सेंटर दुनिया की मेमोरी चिप्स की आपूर्ति को निगल रहे हैं, जिससे DRAM और NAND फ्लैश की लागत... भारत में, औसत फोन की कीमतें महज पांच महीनों में 7.9% बढ़ीं, 80 से अधिक मॉडलों की कीमतों में औसतन 15% की वृद्धि हुई, और करीब आधे संभावित खरीदार अब अपनी खरीदारी टालने की बात कहते हैं।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
काउंटरपॉइंट और IDC के विश्लेषकों का अनुमान है कि कीमतों का दबाव 2026 के अंत तक बना रहेगा और शायद 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक स्थिर न हो। नथिंग के सीईओ कार्ल पेई ने चेतावनी दी है कि बजट फोन पर सबसे ज्यादा मार पड़ेगी।
2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में तेज उछाल आया है, वैश्विक औसत बिक्री मूल्य में लगभग 7% की वृद्धि का अनुमान है, क्योंकि AI डेटा सेंटर दुनिया की मेमोरी चिप्स की आपूर्ति को निगल रहे हैं, जिससे DRAM और NAND फ्लैश की लागत... भारत में, औसत फोन की कीमतें महज पांच महीनों में 7.9% बढ़ीं, 80 से अधिक मॉडलों की कीमतों में औसतन...
प्रकाशितकर्ताDeepSeek-V4-Pro से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में तेज उछाल आया है, वैश्विक औसत बिक्री मूल्य में लगभग 7% की वृद्धि का अनुमान है, क्योंकि AI डेटा सेंटर दुनिया की मेमोरी चिप्स की आपूर्ति को निगल रहे हैं, जिससे DRAM और NAND फ्लैश की लागत...
भारत में, औसत फोन की कीमतें महज पांच महीनों में 7.9% बढ़ीं, 80 से अधिक मॉडलों की कीमतों में औसतन 15% की वृद्धि हुई, और करीब आधे संभावित खरीदार अब अपनी खरीदारी टालने की बात कहते हैं।
काउंटरपॉइंट और IDC के विश्लेषकों का अनुमान है कि कीमतों का दबाव 2026 के अंत तक बना रहेगा और शायद 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक स्थिर न हो। नथिंग के सीईओ कार्ल पेई ने चेतावनी दी है कि बजट फोन पर सबसे ज्यादा मार पड़ेगी।
What is causing smartphone prices to rise sharply in 2026, how much has memory costs increased as a share of device hardware, what specificA global memory chip shortage driven by AI data centers has sent smartphone prices soaring to record highs in 2026.
AI संकेत
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आपका अगला स्मार्टफोन ज्यादा कीमत का होगा और शायद उसमें सुविधाएं भी कम हों। वैश्विक चिप उद्योग में एक बड़ा बदलाव चल रहा है, और इसका नए कैमरा सेंसर या तेज प्रोसेसर से कोई लेना-देना नहीं है। इसकी असल वजह है मेमोरी चिप की भारी कमी, और अनजाने में इस कमी के लिए जिम्मेदार है वही तकनीक जो सब कुछ स्मार्ट बनाने का दावा करती है: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)।
AI डेटा सेंटर, यानी सर्वरों के विशाल गोदाम जो GPT-5 और Google Gemini जैसे मॉडल्स को पावर देते हैं, उन्हें हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और दूसरे DRAM व NAND फ्लैश कंपोनेंट्स की बेहिसाब भूख है। इस मांग ने वैश्विक आपूर्ति में भारी कमी पैदा कर दी है, जिससे मेमोरी की कीमतें आसमान छू रही हैं और स्मार्टफोन निर्माता हाथ-पैर मारने को मजबूर हैं। जैसा कि नथिंग के सीईओ कार्ल पेई ने जून 2026 में साफ-साफ कहा, मेमोरी चिप्स अब प्रोसेसर या डिस्प्ले से भी ज्यादा महंगी हो गई हैं – यह उद्योग के लिए ऐतिहासिक रूप से असामान्य और आर्थिक रूप से विनाशकारी स्थिति है ।
कैसे AI बूम दुनिया की मेमोरी सप्लाई को चूस रहा है
इसके पीछे का अर्थशास्त्र सीधा-सादा है: सैमसंग, SK हाइनिक्स और माइक्रोन जैसे चिप निर्माता, स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली LPDDR RAM और UFS स्टोरेज की तुलना में मुनाफे वाली, AI-केंद्रित HBM चिप्स के उत्पादन को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसने पारंपरिक मेमोरी की घटती सप्लाई के लिए एक बोली युद्ध छेड़ दिया है।
बीबीसी के अनुसार, अक्टूबर 2025 के बाद से RAM की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं । ट्रेंडफोर्स के आंकड़ों से पता चला कि 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले एक आम स्मार्टफोन के लिए, 2026 की पहली तिमाही में कॉन्ट्रैक्ट की कीमतें साल-दर-साल लगभग 200% बढ़ गईं, जो पिछले साल की तुलना में तीन गुना है । फोन की बिल ऑफ मैटेरियल्स (BoM) पर इसका प्रभाव चौंका देने वाला रहा है। ऐतिहासिक रूप से स्मार्टफोन की BoM का लगभग 10-15% हिस्सा रखने वाली मेमोरी, अब बढ़कर 30-40% तक पहुंच गई है । GSM Arena द्वारा काउंटरपॉइंट रिसर्च के हवाले से दिए गए विस्तृत विवरण के अनुसार, 6GB RAM और 128GB eMMC स्टोरेज वाले लो-एंड फोन के लिए, मेमोरी अब कुल BoM का 43% तक खा जाती है ।
Studio Global AI
अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"2026 में स्मार्टफोन के दाम आसमान छूने की असली वजह" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में तेज उछाल आया है, वैश्विक औसत बिक्री मूल्य में लगभग 7% की वृद्धि का अनुमान है, क्योंकि AI डेटा सेंटर दुनिया की मेमोरी चिप्स की आपूर्ति को निगल रहे हैं, जिससे DRAM और NAND फ्लैश की लागत...
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में तेज उछाल आया है, वैश्विक औसत बिक्री मूल्य में लगभग 7% की वृद्धि का अनुमान है, क्योंकि AI डेटा सेंटर दुनिया की मेमोरी चिप्स की आपूर्ति को निगल रहे हैं, जिससे DRAM और NAND फ्लैश की लागत... भारत में, औसत फोन की कीमतें महज पांच महीनों में 7.9% बढ़ीं, 80 से अधिक मॉडलों की कीमतों में औसतन 15% की वृद्धि हुई, और करीब आधे संभावित खरीदार अब अपनी खरीदारी टालने की बात कहते हैं।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
काउंटरपॉइंट और IDC के विश्लेषकों का अनुमान है कि कीमतों का दबाव 2026 के अंत तक बना रहेगा और शायद 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक स्थिर न हो। नथिंग के सीईओ कार्ल पेई ने चेतावनी दी है कि बजट फोन पर सबसे ज्यादा मार पड़ेगी।
हर ग्राहक को डराए बिना लागत को संभालने के लिए, ब्रांड दर्दनाक समझौते करने को मजबूर हैं। ट्रेंडफोर्स की रिपोर्ट है कि निर्माता न केवल कीमतें बढ़ा रहे हैं बल्कि अपने बिल ऑफ मैटेरियल्स को नियंत्रण में रखने के लिए जानबूझकर फोन के स्पेसिफिकेशन को डाउनग्रेड भी कर रहे हैं – जैसे कम RAM या धीमी स्टोरेज का उपयोग करना । नतीजा एक कठिन बाजार है जहां उपभोक्ता ज्यादा भुगतान करते हैं लेकिन अक्सर उन्हें कम पावरफुल हार्डवेयर मिलता है।
शिपमेंट में रिकॉर्ड-तोड़ गिरावट
कीमतों के इस झटके ने पहले से ही मांग को कुचलना शुरू कर दिया है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में साल-दर-साल 6% की गिरावट आई । जैसे-जैसे संकट गहराता गया, पूरे साल के अनुमान नाटकीय रूप से बिगड़ गए। जहां कुछ विश्लेषकों ने शुरुआत में हल्की गिरावट का अनुमान लगाया था, वहीं 2026 के मध्य तक की तस्वीर कहीं ज्यादा डरावनी है।
IDC (मई 2026): ऐतिहासिक रूप से पूरे साल के शिपमेंट में 13.9% की गिरावट का अनुमान है, जो 1.08 बिलियन यूनिट्स रह जाएगी, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक संकुचन होगा। यूनिट्स में गिरावट के बावजूद, ऊंची बिक्री कीमतों के कारण कुल बाजार मूल्य में 3.8% की वृद्धि होने की उम्मीद है ।
काउंटरपॉइंट रिसर्च (जून 2026): इसी तरह 13.9% की गिरावट के साथ 1.08 बिलियन यूनिट्स का अनुमान है, जिसमें मेमोरी की बिगड़ती कमी और भू-राजनीतिक दबावों का हवाला दिया गया है । फर्म ने पाया कि पहली तिमाही में ही वैश्विक थोक कीमतों में 14% की वृद्धि हुई ।
Omdia: तुलनात्मक रूप से आशावादी लेकिन फिर भी गंभीर 7% की गिरावट का अनुमान पेश करता है, यह नोट करते हुए कि कीमतों का दबाव और सीमित आपूर्ति 2026 की दूसरी छमाही में कम होना शुरू हो सकती है ।
दर्द बाजार के सबसे निचले पायदान पर सबसे ज्यादा गंभीर है। एंट्री-लेवल और बजट डिवाइसेस, जो बहुत मामूली मार्जिन पर काम करते हैं, मौजूदा मेमोरी की कीमतों पर आर्थिक रूप से अव्यवहार्य हैं। Omdia का कहना है कि लगातार मूल्य वृद्धि से कीमत-संवेदनशील उभरते बाजारों में मांग सबसे तेजी से कमजोर होने की संभावना है ।
भारत: संकट में घिरा एक बाजार
दुनिया के सबसे बड़े और कीमत-संवेदनशील स्मार्टफोन बाजारों में से एक, भारत, इस संकट की पूरी मार झेल रहा है। 2025 में स्थिर कीमतों के एक साल के बाद, 2026 के पहले पांच महीनों में ही औसत स्मार्टफोन की कीमत 7.9% बढ़ गई । पिछले वर्षों के विपरीत जहां कीमतों में कटौती और वृद्धि संतुलित रहती थी, 2026 में मूल्य वृद्धि बनाम कटौती का अनुपात भारी रूप से वृद्धि के पक्ष में झुक गया है ।
इन बढ़ोतरी का पैमाना चौंकाने वाला है। गैजेट्स 360 के बीबम द्वारा ट्रैक किए गए आंकड़ों में पाया गया कि भारत में बिक्री पर मौजूद लगभग 200 स्मार्टफोन मॉडलों में से 80 से अधिक की कीमतों में वृद्धि देखी गई है, जिसमें औसत वृद्धि लगभग 15% है । यह वृद्धि प्रति डिवाइस ₹500 से ₹8,000 तक है। वनप्लस 15R इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जिस पर पांच महीनों में तीन बार अलग-अलग कीमतें बढ़ाई गईं, कुल मिलाकर इसकी लॉन्च कीमत से ₹7,000 ज्यादा हो गए ।
उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अनुमानित रूप से नकारात्मक रहा है। लगभग 6,000 सक्रिय खरीदारों के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 48% संभावित खरीदार कीमतें स्थिर होने तक अपनी स्मार्टफोन खरीदारी स्थगित कर देंगे, जबकि अन्य 6% इसके बजाय रिफर्बिश्ड या प्री-ओन्ड डिवाइस पर विचार कर रहे हैं । विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो भारत की वार्षिक स्मार्टफोन बिक्री की मात्रा 30% तक गिर सकती है, जो 136-138 मिलियन यूनिट से गिरकर 115-120 मिलियन रह सकती है ।
मनीकंट्रोल से बात करते हुए एक उद्योग विशेषज्ञ ने कहा, "इस लागत संरचना पर, अल्ट्रा-लो प्राइस पॉइंट्स अब व्यवहार्य नहीं हैं," और भविष्यवाणी की कि भारत का मास-मार्केट एंट्री थ्रेशोल्ड ऊपर की ओर शिफ्ट हो जाएगा, क्योंकि सबसे तीव्र मुद्रास्फीति ₹12,000 से कम कीमत वाले फोन पर पड़ेगी ।
आगे क्या: विश्लेषकों और नथिंग के सीईओ कार्ल पेई की भविष्यवाणियां
जो उपभोक्ता जल्दी राहत की उम्मीद कर रहे थे, उनके लिए आउटलुक उदास है।
नथिंग के सीईओ कार्ल पेई ने जून 2026 में अपनी चिंताओं के साथ सार्वजनिक रूप से सामने आए, और पुष्टि की कि कमी बदतर हो रही है। उन्होंने कहा कि मेमोरी अब कुछ डिवाइसेस की हार्डवेयर लागत के आधे से ज्यादा के लिए जिम्मेदार है और चेतावनी दी कि बजट फोन पर सबसे ज्यादा कीमत बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। उनकी कंपनी ने साल की शुरुआत में AI डेटा केंद्रों द्वारा संचालित मेमोरी लागत में तेज वृद्धि का हवाला देते हुए, अपने पूरे पोर्टफोलियो में कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि पहले ही कर दी थी ।
प्रमुख विश्लेषकों के बीच आम सहमति यह है कि साल के बाकी बचे समय के लिए कोई वास्तविक राहत नजर नहीं आ रही है:
काउंटरपॉइंट रिसर्च के निदेशक तरुण पाठक ने चेतावनी दी है कि कीमतें 2026 के दौरान बढ़ती रहेंगी और केवल 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक स्थिर हो सकती हैं, क्योंकि AI-सर्वर की मांग मेमोरी आपूर्ति का उपभोग जारी रखे हुए है ।
IDC इस स्थिति को "अल्पकालिक दबाव" के रूप में नहीं बल्कि "मेमोरी सप्लाई चेन से उपजने वाला लहर-जैसा व्यवधान" बताता है ।
Omdia उम्मीद की एक किरण प्रदान करता है, जो सुझाव देता है कि 2026 की दूसरी छमाही में कीमतों का दबाव कम होना शुरू हो सकता है, हालांकि पूरे साल की शिपमेंट में गिरावट अभी भी महत्वपूर्ण रहेगी ।
असहज सच्चाई यह है कि AI वर्कलोड को तेज बनाने के लिए डिज़ाइन की गई चिप्स, सीधे तौर पर उस हार्डवेयर को नाटकीय रूप से महंगा बना रही हैं जिसका उपयोग आप रोजमर्रा की कंप्यूटिंग के लिए करते हैं ।
trendforce.comMemory Price Surge to Persist in 1Q26; Smartphone and Notebook Brands Begin Raising Prices and Downgrading Specs, Says TrendForce
हर ग्राहक को डराए बिना लागत को संभालने के लिए, ब्रांड दर्दनाक समझौते करने को मजबूर हैं। ट्रेंडफोर्स की रिपोर्ट है कि निर्माता न केवल कीमतें बढ़ा रहे हैं बल्कि अपने बिल ऑफ मैटेरियल्स को नियंत्रण में रखने के लिए जानबूझकर फोन के स्पेसिफिकेशन को डाउनग्रेड भी कर रहे हैं – जैसे कम RAM या धीमी स्टोरेज का उपयोग करना । नतीजा एक कठिन बाजार है जहां उपभोक्ता ज्यादा भुगतान करते हैं लेकिन अक्सर उन्हें कम पावरफुल हार्डवेयर मिलता है।
शिपमेंट में रिकॉर्ड-तोड़ गिरावट
कीमतों के इस झटके ने पहले से ही मांग को कुचलना शुरू कर दिया है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में साल-दर-साल 6% की गिरावट आई । जैसे-जैसे संकट गहराता गया, पूरे साल के अनुमान नाटकीय रूप से बिगड़ गए। जहां कुछ विश्लेषकों ने शुरुआत में हल्की गिरावट का अनुमान लगाया था, वहीं 2026 के मध्य तक की तस्वीर कहीं ज्यादा डरावनी है।
IDC (मई 2026): ऐतिहासिक रूप से पूरे साल के शिपमेंट में 13.9% की गिरावट का अनुमान है, जो 1.08 बिलियन यूनिट्स रह जाएगी, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक संकुचन होगा। यूनिट्स में गिरावट के बावजूद, ऊंची बिक्री कीमतों के कारण कुल बाजार मूल्य में 3.8% की वृद्धि होने की उम्मीद है ।
काउंटरपॉइंट रिसर्च (जून 2026): इसी तरह 13.9% की गिरावट के साथ 1.08 बिलियन यूनिट्स का अनुमान है, जिसमें मेमोरी की बिगड़ती कमी और भू-राजनीतिक दबावों का हवाला दिया गया है । फर्म ने पाया कि पहली तिमाही में ही वैश्विक थोक कीमतों में 14% की वृद्धि हुई ।
Omdia: तुलनात्मक रूप से आशावादी लेकिन फिर भी गंभीर 7% की गिरावट का अनुमान पेश करता है, यह नोट करते हुए कि कीमतों का दबाव और सीमित आपूर्ति 2026 की दूसरी छमाही में कम होना शुरू हो सकती है ।
दर्द बाजार के सबसे निचले पायदान पर सबसे ज्यादा गंभीर है। एंट्री-लेवल और बजट डिवाइसेस, जो बहुत मामूली मार्जिन पर काम करते हैं, मौजूदा मेमोरी की कीमतों पर आर्थिक रूप से अव्यवहार्य हैं। Omdia का कहना है कि लगातार मूल्य वृद्धि से कीमत-संवेदनशील उभरते बाजारों में मांग सबसे तेजी से कमजोर होने की संभावना है ।
भारत: संकट में घिरा एक बाजार
दुनिया के सबसे बड़े और कीमत-संवेदनशील स्मार्टफोन बाजारों में से एक, भारत, इस संकट की पूरी मार झेल रहा है। 2025 में स्थिर कीमतों के एक साल के बाद, 2026 के पहले पांच महीनों में ही औसत स्मार्टफोन की कीमत 7.9% बढ़ गई । पिछले वर्षों के विपरीत जहां कीमतों में कटौती और वृद्धि संतुलित रहती थी, 2026 में मूल्य वृद्धि बनाम कटौती का अनुपात भारी रूप से वृद्धि के पक्ष में झुक गया है ।
इन बढ़ोतरी का पैमाना चौंकाने वाला है। गैजेट्स 360 के बीबम द्वारा ट्रैक किए गए आंकड़ों में पाया गया कि भारत में बिक्री पर मौजूद लगभग 200 स्मार्टफोन मॉडलों में से 80 से अधिक की कीमतों में वृद्धि देखी गई है, जिसमें औसत वृद्धि लगभग 15% है । यह वृद्धि प्रति डिवाइस ₹500 से ₹8,000 तक है। वनप्लस 15R इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जिस पर पांच महीनों में तीन बार अलग-अलग कीमतें बढ़ाई गईं, कुल मिलाकर इसकी लॉन्च कीमत से ₹7,000 ज्यादा हो गए ।
उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अनुमानित रूप से नकारात्मक रहा है। लगभग 6,000 सक्रिय खरीदारों के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 48% संभावित खरीदार कीमतें स्थिर होने तक अपनी स्मार्टफोन खरीदारी स्थगित कर देंगे, जबकि अन्य 6% इसके बजाय रिफर्बिश्ड या प्री-ओन्ड डिवाइस पर विचार कर रहे हैं । विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो भारत की वार्षिक स्मार्टफोन बिक्री की मात्रा 30% तक गिर सकती है, जो 136-138 मिलियन यूनिट से गिरकर 115-120 मिलियन रह सकती है ।
मनीकंट्रोल से बात करते हुए एक उद्योग विशेषज्ञ ने कहा, "इस लागत संरचना पर, अल्ट्रा-लो प्राइस पॉइंट्स अब व्यवहार्य नहीं हैं," और भविष्यवाणी की कि भारत का मास-मार्केट एंट्री थ्रेशोल्ड ऊपर की ओर शिफ्ट हो जाएगा, क्योंकि सबसे तीव्र मुद्रास्फीति ₹12,000 से कम कीमत वाले फोन पर पड़ेगी ।
आगे क्या: विश्लेषकों और नथिंग के सीईओ कार्ल पेई की भविष्यवाणियां
जो उपभोक्ता जल्दी राहत की उम्मीद कर रहे थे, उनके लिए आउटलुक उदास है।
नथिंग के सीईओ कार्ल पेई ने जून 2026 में अपनी चिंताओं के साथ सार्वजनिक रूप से सामने आए, और पुष्टि की कि कमी बदतर हो रही है। उन्होंने कहा कि मेमोरी अब कुछ डिवाइसेस की हार्डवेयर लागत के आधे से ज्यादा के लिए जिम्मेदार है और चेतावनी दी कि बजट फोन पर सबसे ज्यादा कीमत बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। उनकी कंपनी ने साल की शुरुआत में AI डेटा केंद्रों द्वारा संचालित मेमोरी लागत में तेज वृद्धि का हवाला देते हुए, अपने पूरे पोर्टफोलियो में कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि पहले ही कर दी थी ।
प्रमुख विश्लेषकों के बीच आम सहमति यह है कि साल के बाकी बचे समय के लिए कोई वास्तविक राहत नजर नहीं आ रही है:
काउंटरपॉइंट रिसर्च के निदेशक तरुण पाठक ने चेतावनी दी है कि कीमतें 2026 के दौरान बढ़ती रहेंगी और केवल 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक स्थिर हो सकती हैं, क्योंकि AI-सर्वर की मांग मेमोरी आपूर्ति का उपभोग जारी रखे हुए है ।
IDC इस स्थिति को "अल्पकालिक दबाव" के रूप में नहीं बल्कि "मेमोरी सप्लाई चेन से उपजने वाला लहर-जैसा व्यवधान" बताता है ।
Omdia उम्मीद की एक किरण प्रदान करता है, जो सुझाव देता है कि 2026 की दूसरी छमाही में कीमतों का दबाव कम होना शुरू हो सकता है, हालांकि पूरे साल की शिपमेंट में गिरावट अभी भी महत्वपूर्ण रहेगी ।
असहज सच्चाई यह है कि AI वर्कलोड को तेज बनाने के लिए डिज़ाइन की गई चिप्स, सीधे तौर पर उस हार्डवेयर को नाटकीय रूप से महंगा बना रही हैं जिसका उपयोग आप रोजमर्रा की कंप्यूटिंग के लिए करते हैं ।
trendforce.comMemory Price Surge to Persist in 1Q26; Smartphone and Notebook Brands Begin Raising Prices and Downgrading Specs, Says TrendForce